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सुल्तानपुर के कई किसानों ने धान और गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों की जगह केले की खेती अपनाकर अपनी आय में बड़ा इजाफा किया है. कम लागत, सरकारी सब्सिडी और आधुनिक तकनीकों की मदद से किसान लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं. कुछ किसान केले के साथ सब्जियों की नर्सरी तैयार कर डबल इनकम भी हासिल कर रहे हैं.

विमलेश सिंह सुल्तानपुर के वो किसान हैं जिन्होंने केले की खेती में महारथ हासिल की हुई है. लंभुआ तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव तेरये के रहने वाले किसान विमलेश सिंह बताते हैं कि उन्होंने पारंपरिक फसल धान और गेहूं को छोड़कर केले की खेती की शुरुआत की. जिसमें उनको कम लागत में अच्छा मुनाफा होने लगा.

जिससे वह अब अपने अधिकतम खेत में केले के ही खेती कर रहे हैं. विमलेश ने बताया कि लगभग 10 एकड़ खेत में उन्होंने 12 हजार पौधे लगाए, जिसमें तैयार होने तक उसकी लागत 2 लाख रुपए आई और उन्होंने 5 लाख रुपए का केला बेचा. इससे उनको केले की खेती में काफी फायदा हो रहा है.

सुल्तानपुर ग्राम सभा रामपुर के रहने वाले किसान चंद्रप्रकाश मिश्रा ने लोकल 18 को बताया कि उन्होंने पारंपरिक फसल धान और गेहूं को छोड़कर केला की खेती की शुरुआत की जिसमें उनको कम लागत में अच्छा मुनाफा होने लगा है. जिससे वह अब अपने अधिकतम खेतों में केले के ही खेती कर रहे हैं चंद्रप्रकाश ने बताया कि लगभग आधा हेक्टर खेत में उन्होंने 1800 पौधे लगाए हैं. जिसमें तैयार होने तक उसकी लागत 1 लाख रुपए आई और उन्होंने 6 लाख रुपए का केला बेचा इससे उनको केले की खेती में काफी फायदा हो रहा है.

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ये सुल्तानपुर के ऐसे किसान हैं जिन्होंने लगभग 670 से अधिक केले के पौधे लगाए हैं जिससे इनको तगड़ी कमाई हो रही है. इनका घर सुल्तानपुर के हरिपुर बनवा में पड़ता है. दलजीत वर्मा केले के साथ-साथ केले के पौधों के नीचे सब्जियों की नर्सरी भी लगाई है जिससे उनको दो फसलों का एक साथ लाभ मिल रहा है. खेती के मामले में वे तकनीकी कृषि विधि का प्रयोग करते हैं.यही वजह रही है कि केले की खेती के साथ-साथ गोभी, मिर्च, लौकी, नेनुआ आदि की भी खेती करते हैं और नर्सरी लगाकर सब्जी के पौधों को भी बाजार में सप्लाई करते हैं.

5 हजार से अधिक पौधे की खेती करने वाले किसान अनुपम यादव अभी युवा हैं. उन्होंने केले की खेती को ही अपने कैरियर के रूप में चुना है. सुल्तानपुर के रहने वाले किसान अनुपम यादव ने लोकल 18 से बताया कि उन्होंने केले का यह पौधा उद्यान विभाग से मंगवाया था जिसको अपने खेतों में लगाकर वह अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. उन्होंने 5000 से अधिक पेड़ लगवाएं हैं जो लगभग 2.5 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में तैयार हो रहा है.

अनुपम आगे बताते हैं कि उनके इस केले की खेती में लगभग 40 हजार रुपए लागत आई है लेकिन लागत का वे कई गुना मुनाफा कमा रहे हैं. उनके इस खेती में उद्यान विभाग के सहायक उद्यान निरीक्षक दिनेश सिंह का अधिक सहयोग रहता है. उन्होंने बताया कि केले का पौधा लगभग 12 माह में तैयार हो जाता है उन्होंने बताया कि एक केले के पौधे से दूसरे केले के पौधे के बीच की दूरी लगभग 6 फिट होनी चाहिए.

सुल्तानपुर जिले की बल्दीराय तहसील के अंतर्गत आने वाले एक गांव के रहने वाले किसान कृष्ण कुमार सिंह ने लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने पारंपरिक फसल धान और गेहूं को छोड़कर केले की खेती की शुरुआत की है. जिसमें उनको कम लागत में अच्छा मुनाफा होने लगा. जिससे वह अब अपने अधिकतम खेत में केले के ही खेती कर रहे हैं. विमलेश ने बताया कि
वे 1 एकड़ खेत में उन्होंने 1100 पौधे लगाए, जिसमें तैयार होने तक उसकी लागत 1 लाख रुपए आई और उन्होंने 3 लाख रुपए का केला बेचा. इससे उनको केले की खेती में अच्छा मुनाफा हो रहा है.

किसान कृष्ण कुमार सिंह सिंह ने बताया कि उनको केले की खेती करने का प्रोत्साहन जिला उद्यान विभाग द्वारा मिलता है. उनको केले का पौधा लगाने के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी भी उपलब्ध करवाई जाती है. जिसके लिए उन्होंने जिला उद्यान अधिकारी रणविजय सिंह और सहायक उद्यान निरीक्षक दिनेश सिंह को सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया.

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