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Bada Mahadev Pujan 2026: हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए कई विशेष दिन और त्योहार बताए गए हैं, जिनमें से एक है 'बड़ा महादेव पूजन'। अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब यह पर्व ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन, यानी आज 27 जून 2026, दिन शनिवार पड़ रहा है। इस दिन मध्य भारत और विशेषकर मध्य प्रदेश के पचमढ़ी स्थित 'बड़ा महादेव' गुफा मंदिर में एक विशाल मेले और पूजन का आयोजन होता है। भगवान शिव का यह रूप संकटों को हरने वाला और भक्तों की हर मनोकामना पूरी करने वाला माना जाता है।ALSO READ: ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026: व्रत का महत्व और 7 अचूक उपाय, जो बदल सकते हैं आपकी किस्मत

 

आइए जानते हैं आखिर यह पूजन क्यों मनाया जाता है, इसके पीछे का पौराणिक रहस्य क्या है और इसकी सही विधि क्या है।

 

क्यों मनाया जाता है बड़ा महादेव पूजन? जानें पौराणिक रहस्य 

बड़ा महादेव पूजन और इस स्थान का संबंध द्वापर युग की एक बेहद प्रसिद्ध और रोमांचक कथा से जुड़ा है, जो भस्मासुर और भगवान शिव के बीच घटी थी।


 

भस्मासुर का वरदान और शिव पर संकट

पौराणिक कथा के अनुसार, भस्मासुर नाम के एक राक्षस ने भगवान शिव की घोर तपस्या की। भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर उसे वरदान मांगने को कहा। भस्मासुर ने वरदान मांगा कि-'मैं जिसके भी सिर पर हाथ रखूं, वह तुरंत भस्म (राख) हो जाए।' शिवजी ने 'तथास्तु' कह दिया। वरदान मिलते ही भस्मासुर के मन में पाप आ गया और वह खुद भगवान शिव को भस्म करके माता पार्वती को हासिल करने के लिए शिवजी के पीछे दौड़ पड़ा।


 

गुफा में महादेव का छिपना

भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव को वहां से भागना पड़ा। वे जंगलों और पहाड़ों को पार करते हुए सतपुड़ा (पचमढ़ी) की पहाड़ियों में आए और एक विशाल, अंधेरी प्राकृतिक गुफा में जाकर छिप गए। भगवान शिव के लंबे समय तक इस गुफा में रहने के कारण ही इस स्थान और पूजन का नाम 'बड़ा महादेव' पड़ा।


 

भगवान विष्णु का 'मोहिनी' अवतार

जब शिवजी गुफा में थे, तब भगवान विष्णु ने उनकी मदद के लिए 'मोहिनी' नाम की एक अत्यंत सुंदर नर्तकी का रूप धारण किया और भस्मासुर के सामने आ गए। भस्मासुर मोहिनी के रूप पर मोहित हो गया। मोहिनी ने उसे अपने साथ नृत्य करने की शर्त रखी।


 


नृत्य करते-करते मोहिनी ने चालाकी से अपना हाथ अपने सिर पर रखा। भस्मासुर भी नृत्य की धुन में इतना अंधा हो चुका था कि उसने बिना सोचे-समझे अपना ही हाथ अपने सिर पर रख लिया और अपने ही वरदान से जलकर भस्म हो गया। भस्मासुर के अंत के बाद शिवजी सुरक्षित गुफा से बाहर आए। इसी जीत और संकट टलने की खुशी में बड़ा महादेव का पूजन किया जाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/shani-trayodashi-remedies-2026-126062600034_1.html" target="_blank">Shani: शनि त्रयोदशी पर करें 5 उपाय, शनि दोष और साढ़ेसाती से मिलेगगा छुटकारा</a></strong>

 

बड़ा महादेव पूजन की विधि

इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और महादेव के संकट मोचन रूप की पूजा करते हैं। यदि आप मंदिर नहीं जा पा रहे हैं, तो घर पर भी इस विधि से पूजा कर सकते हैं:


 


<strong>स्नान और संकल्प: </strong>सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर व्रत या शिव पूजन का संकल्प लें।


 


<strong>शिवलिंग का अभिषेक: </strong>सबसे पहले जल से शिवलिंग को स्नान कराएं। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें। अंत में दोबारा शुद्ध जल या गंगाजल चढ़ाएं।


 


<strong>प्रिय वस्तुएं अर्पित करें: </strong>महादेव को चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद उनके सबसे प्रिय बेलपत्र (कम से कम 3), धतूरा, आक के फूल, शमी पत्र और भांग अर्पित करें।


 


<strong>धूप-दीप और नैवेद्य: </strong>शिवलिंग के सामने शुद्ध घी का दीपक और धूप जलाएं। भगवान को मौसमी फल (जैसे आम) या सफेद मिठाई का भोग लगाएं।


 


<strong>मंत्र जाप और आरती: </strong>पूजा के दौरान &#039;ॐ नमः शिवाय&#039; का जाप करते रहें। इसके बाद शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में कपूर जलाकर आरती करें।


 


<strong>विशेष महत्व: </strong>बड़ा महादेव के पूजन से जीवन में आने वाले बड़े से बड़े संकट, अकाल मृत्यु का भय और शत्रुओं का नाश होता है। पचमढ़ी के बड़ा महादेव मंदिर में इस दिन श्रद्धालु दूर-दूर से आकर गुफा के पवित्र झरने के पानी से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और मनचाहा वरदान पाते हैं। कुछ स्थानों पर यह पूजन वर्षा, अच्छी फसल, परिवार की सुख-शांति और समाज की समृद्धि की कामना के लिए भी किया जाता है।


 

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