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Unique Tree Chitrakoot: चित्रकूट के मानिकपुर स्थित प्रसिद्ध बरम बाबा मंदिर परिसर में आस्था और प्रकृति का अनोखा चमत्कार देखने को मिल रहा है. यहां करीब 100 वर्ष पुराना एक ऐसा दुर्लभ त्रिवेणी वृक्ष मौजूद है, जिसमें हिंदू धर्म में परम पवित्र माने जाने वाले नीम, पीपल और बरगद तीनों एक ही आधार यानी एक ही जड़ से एक साथ विकसित हुए हैं. मानिकपुर-कर्वी मुख्य मार्ग पर स्थित आस्था का यह केंद्र स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है.

चित्रकूट: बुंदेलखंड की पावन धरती पर स्थित चित्रकूट जिले के मानिकपुर क्षेत्र में आस्था और प्रकृति का एक ऐसा ही हैरतअंगेज चमत्कार देखने को मिल रहा है. यहां के सुप्रसिद्ध बरम बाबा मंदिर परिसर में स्थित करीब 100 वर्ष पुराना एक दुर्लभ वृक्ष इन दिनों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र बना हुआ है. इस अनोखे वृक्ष की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें हिंदू धर्म में परम पवित्र माने जाने वाले नीम, पीपल और बरगद, तीनों एक साथ मिलकर फल-फूल रहे हैं, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग खिंचे चले आ रहे हैं.

एक ही आधार पर तीन पवित्र वृक्षों का त्रिवेणी संगम
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस वृक्ष की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके एक ही आधार से तीनों पवित्र वृक्षों का संगम दिखाई देता है. आमतौर पर नीम, पीपल और बरगद अलग-अलग स्थानों पर पाए जाते हैं, लेकिन यहां इनका एक साथ होना लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता है. यही कारण है कि दूर-दूर से श्रद्धालु इस अद्भुत वृक्ष के दर्शन करने और पूजा-अर्चन के लिए पहुंचते हैं. बरम बाबा मंदिर परिसर में स्थित इस त्रिवेणी वृक्ष की श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं. मान्यता है कि इसकी परिक्रमा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

मानिकपुर-कर्वी मुख्य मार्ग पर स्थित है आस्था का यह केंद्र
वहीं स्थानीय निवासी ललित ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि बरम बाबा का यह पवित्र स्थान मानिकपुर-कर्वी मुख्य मार्ग पर स्थित है. इस मार्ग से गुजरने वाले अधिकांश राहगीर कुछ समय के लिए यहां अवश्य रुकते हैं और बाबा के दरबार में माथा टेकने के साथ इस पवित्र वृक्ष के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. ललित ने बताया कि वे अपने बचपन से ही इस वृक्ष को इसी स्वरूप में देख रहे हैं और समय के साथ लोगों की आस्था लगातार बढ़ती ही जा रही है.

100 वर्ष पुराना इतिहास और अटूट जनविश्वास
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह वृक्ष करीब 100 वर्ष पुराना है और आज भी लोगों की अटूट श्रद्धा का प्रतीक बना हुआ है. ललित ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि इस वृक्ष की जड़ों में नीम, पीपल और बरगद तीनों का जो अद्भुत संगम है, वही इसे सबसे खास और अनोखा बनाता है. यही मुख्य वजह है कि इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है. उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी अपने पूरे परिवार के साथ समय-समय पर यहां विशेष पूजा-अर्चना करने के लिए आते हैं.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें

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