Ayodhya News: अयोध्या राम मंदिर मामले में पदाधिकारी चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब SIT रिपोर्ट लीक हो गई है. इस रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे हुए हैं और कई बड़ी कमियां पाई गई हैं. इसमें हुंडियों की संख्या और अभिलेखों में अंतर देखने को मिला है और कुल 70 अफसरों पर गाज गिरने की जानकारी मिली है. साथ में यह भी जानकारी मिली है कि टिन्नू के एक रिश्तेदार को बार-बार चोरी करते हुए पकड़ा गया, लेकिन उस पर कोई कार्रवाी नहीं हुई.
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट
SIT की जांच में आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट का भी परीक्षण किया है. वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में कई प्रक्रियात्मक कमियों के संकेत मिले हैं. इसमें हुंडियों की संख्या और अभिलेखों में अंतर देखने को मिला है.
इस तारीख तक फुटेज की जांच
वहीं सूत्रों के मुताबिक, SIT के पास पर्याप्त सीसीटीवी फुटेज नहीं था. इस रिपोर्ट में पाया गया कि भेंट/चढ़ावा के गणना, नकदी संचालन और प्रबंधन में SIT की बड़ी खामियां पाई गईं. रिपोर्ट के अनुसार, चंदा चोरी मामले में सीसीटीवी की 27 अप्रैल से 05 जून तक की फुटेज खंगाली गई थी.
कई बार चोरी करते पकड़ा गया टिन्नू का रिश्तेदार
SIT की लीक रिपोर्ट के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में कई बार रामशंकर यादव यानि टिन्नू का करीबी रिश्तेदार मनीष कुमार यादव चोरी करते हुए दिखा था, लेकिन फिर भी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई. जानकारी के मुताबिक, टिन्नू यादव ने ही मनीष को नौकरी दिलवाई थी.
70 अफसरों पर SIT की नजर
SIT रिपोर्ट में ये भी पता चला कि कई कमियों के बाद भी पदाधिकारियों ने कोई कदम नहीं उठाए. वहीं सुरक्षा प्रोटोकॉल सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गए, जमीनी स्तर पर उसका कोई प्रभाव नहीं दिखा. साथ में यह भी खुलासा हुआ कि इस चंदा चोरी मामले में कुल 70 अफसरों को चोरी/गबन संबंधित गतिविधियों में पकड़ा गया था. SIT की जांच में इसे लेकर कुछ अहम सबूत भी मिले हैं. SIT की रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि सीसीटीवी फुटेज में कुल 65 बार चोरी देखी गई, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. SIT की जांच में पुख्ता सबूत भी मिले हैं कि आरोपियों से कुल 60 लाख रुपए बरामद हुए हैं.
पहले से ही चोरी का अंदेशा
SIT की लीक रिपोर्ट में ये भी खुलासा हुआ कि टिन्नू यादव के पास बिना आदेश के हुंडियों की चाभी थी. जानकारी निकलकर सामने आई कि ट्रस्ट को बहुत पहले ही चोरी का अंदेशा था, लेकिन फिर भी पदाधिकारियों ने कोई एक्शन नहीं लिया. सितंबर 2024 और फरवरी 2025 में ट्रस्ट और बैंक के बीच एसओपी बैठक बनी थी और स्टेट बैंक की तरफ से गोविन्द मिश्र और ट्रस्ट की तरफ से अनिल मिश्र ने अभिलेख पर हस्ताक्षर किया था. वहीं यह भी जानकारी निकलकर सामने आई कि गणना की पूरी प्रक्रिया में सही तरीके से जांच नहीं हुई और जानबूझकर लापरवाही की गई.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.
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