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Jyeshtha Purnima 2026: ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत 29 जून 2026 सोमवार के दिन रखा जाएगा। वट सावित्री की तरह ही, वट पूर्णिमा (ज्येष्ठ पूर्णिमा) का त्योहार मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में मनाया जाता है। हालांकि उत्तर भारत में इस दिन व्रत रखते हैं। चलिए जानते हैं इस पूर्णिमा का महत्व और 7 उपाय।

 


<strong>पूर्णिमा आरम्भ: </strong>29 जून 2026 को 03:09:28 से..


<strong>पूर्णिमा समाप्त: </strong>30 जून 2026 को 05:29:01 पर। 


 

ज्येष्ठ पूर्णिमा का आध्यात्मिक व पर्यावरणीय महत्व

<strong>जल संरक्षण का संदेश: </strong>हिन्दू पंचांग का तीसरा महीना &#039;ज्येष्ठ&#039; भीषण गर्मी का समय होता है, जब नदी-तालाब सूखने लगते हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने इस महीने के पर्वों (जैसे- गंगा दशहरा, निर्जला एकादशी और ज्येष्ठ पूर्णिमा) के माध्यम से हमें जल के महत्व को समझने और उसके सदुपयोग का संदेश दिया है।


<strong>अमरनाथ यात्रा की शुरुआत: </strong>इस पवित्र तिथि का धार्मिक महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि आमतौर पर इसी दिन से श्रद्धालु गंगाजल लेकर बाबा अमरनाथ की यात्रा के लिए प्रस्थान करते हैं।


<strong>पवित्र कर्मों का दिन: </strong>इस दिन सुबह स्नान, ध्यान, दान और पुण्य कर्म करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।


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ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत के दिन करें ये 7 उपाय

विवाह बाधा दूर करने के विशेष उपाय

यदि विवाह योग्य युवक-युवतियों के विवाह में बार-बार रुकावटें आ रही हों या बात बनते-बनते बिगड़ जाती हो, तो ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन यह उपाय करना चाहिए:-


 


<strong>1. शिवाभिषेक: </strong>जातक इस दिन सफेद (श्वेत) वस्त्र धारण करके भगवान शिव का पूरे विधि-विधान से अभिषेक और पूजन करें। मान्यता है कि इससे विवाह के मार्ग में आने वाली सभी अड़चनें तुरंत दूर हो जाती हैं।


 

सुख-समृद्धि और आर्थिक लाभ के अचूक उपाय

जीवन में पैसों की तंगी को दूर करने और व्यापार में उन्नति के लिए ज्योतिषविदों ने निम्नलिखित उपाय बताए हैं:-


 


<strong>2. पीपल देव की पूजा (रुका धन पाने के लिए): </strong>ज्येष्ठ पूर्णिमा पर पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास माना जाता है। इस दिन एक लोटे जल में थोड़ा कच्चा दूध और बताशा मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित करें। इससे रुका हुआ धन वापस मिलता है और व्यापार में लाभ होता है।


 


<strong>3. महालक्ष्मी और कौड़ियों का उपाय: </strong>माता लक्ष्मी की तस्वीर पर 11 कौड़ियां चढ़ाकर उन पर हल्दी से तिलक करें। अगले दिन सुबह इन कौड़ियों को एक लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें। इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।


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दोष निवारण और भाग्य जागृत करने के उपाय

कुंडली के ग्रहों को शांत करने और अटके हुए कामों को पूरा करने के लिए इस रात कुछ विशेष कर्म किए जा सकते हैं:-


 


<strong>4. चंद्र देव को अर्घ्य (दांपत्य सुख): </strong>वैवाहिक जीवन की समस्याओं को समाप्त करने के लिए पति या पत्नी में से कोई भी (या दोनों मिलकर) पूर्णिमा की रात को चंद्र देव को दूध से अर्घ्य दें।


 


<strong>5. ग्रह दोष शांति (त्रिवेणी पूजा): </strong>यदि कुंडली में कोई ग्रह दोष परेशान कर रहा हो, तो पूर्णिमा के दिन पीपल, बरगद और नीम की त्रिवेणी (जहां ये तीनों पेड़ पास हों) के नीचे बैठकर &#039;विष्णु सहस्त्रनाम&#039; या &#039;शिवाष्टक&#039; का पाठ करें।


 

6. अचानक भाग्य उदय के लिए: मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा की रात को यदि किसी कुएं में एक चम्मच कच्चा दूध डाला जाए, तो सोभा हुआ भाग्य जाग उठता है और महत्वपूर्ण कार्यों में आ रही बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।

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