यमुना बाजार इलाके में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद वहां रहने वाले नाविक समुदाय के सामने सिर्फ घर खोने का संकट नहीं है, बल्कि उनकी पीढ़ियों पुरानी आजीविका भी खतरे में पड़ गई है। यमुना के फ्लडप्लेन क्षेत्र में बसे ये परिवार दशकों से नाव चलाने, धार्मिक अनुष्ठानों और तीर्थयात्रियों को नदी पार कराने का काम करते आए हैं। गुरुवार को कार्रवाई के दौरान बुलडोजर ने घाट नंबर 2 और 32 के बीच बसी झुग्गियों और अस्थायी ढांचों को हटा दिया। इससे कई परिवार बेघर हो गए और उन्हें पास के शेल्टर होम की ओर जाना पड़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार, लगभग 100 से अधिक परिवार इस कार्रवाई से प्रभावित हुए हैं।
नाविक समुदाय से आने वाले रमेश कुमार ने बताया कि यमुना उनके लिए सिर्फ नदी नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। वे पीढ़ियों से इसी नदी पर निर्भर हैं। उनका परिवार करीब 150 से 200 साल से इसी काम में लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि अब उनके सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि नदी से दूर जाकर वे अपना काम जारी नहीं रख सकते। नाविक सुधाकर कुमार निषाद ने बताया कि वे सुबह से घटनास्थल पर स्थिति देख रहे हैं। उनके अनुसार, उनकी नाव ही उनकी एकमात्र संपत्ति है, जिससे उनका पूरा परिवार चलता है। अब उनके बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
आजीविका के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं
स्थानीय निवासियों ने बताया कि प्रशासन ने कुछ दिन पहले यमुना फ्लडप्लेन क्षेत्र को खाली करने का नोटिस दिया था। इसके बाद 24 जून को कार्रवाई की गई। प्रशासन का कहना है कि यह इलाका यमुना के ‘ओ-जोन’ फ्लडप्लेन का हिस्सा है, जहां निर्माण प्रतिबंधित है। हालांकि, प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें सिर्फ जगह खाली करने को कहा गया, लेकिन आजीविका के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बताई गई। उनका कहना है कि अगर वे नदी से दूर हुए, तो उनका पारंपरिक काम पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
परिवार का पालन-पोषण बच्चों की शिक्षा पर आया संकट
एक अन्य नाविक विजय निषाद ने दावा करते हुए बताया कि उनका परिवार लगभग 200 साल से इस क्षेत्र में रह रहा है और यही उनका मुख्य रोजगार है। उन्होंने कहा कि हाल ही में एक घटना में स्थानीय नाविकों ने यमुना में कूदकर एक युवती की जान बचाई थी, जो इस समुदाय के नदी से गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। वहीं, नाविक राजेश ने बताया कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से यमुना किनारे काम कर रहा है। यही उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है। उन्होंने बताया कि अब उनके सामने सबसे बड़ी समस्या परिवार का पालन-पोषण और बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने की है।
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