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पंजाब सीएम के कथित वायरल वीडियो मामले में पंजाब पुलिस के कमिश्नर व एसपी स्तर के अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है। मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों अंकित और अरुण को आठ दिन के रिमांड पर लेकर गुरुग्राम पुलिस ने पूछताछ शुरू की है। 

शुरुआती पूछताछ में आरोपियों से सेक्टर-29 के क्राउन प्लाजा होटल के कमरा नंबर 3000 और 3004 के बारे में पता चला कि इन्हीं में बैठक हुई थी। इस कथित मीटिंग का वीडियो भी वायरल हो रहा है। इतना ही नहीं आरोपियों के साथ हुई चैट के स्क्रीन शाॅर्ट भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जा रहे हैं। पुलिस के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि होटल में जाकर टीम ने इन दोनों कमरों की 15 जून की बुकिंग चेक की।

कमरा नंबर 3000 तो एसपी लुधियाना जशनदीप सिंह के नाम पर 15 जून को बुक हुआ था। वहीं, कमरा नंबर 3004 लुधियाना के पुलिस कमिश्नर (सीपी) स्वप्न शर्मा के नाम पर बुक हुआ था। अधिकारी ने बताया कि दोनों अधिकारियों के नाम व बुकिंग डिटेल होटल से लिए गए हैं। अब इस तथ्य को वेरिफाई भी टीम कर रही है। 

पार्किंग एरिया के फुटेज खंगाल रही पुलिस

गुरुग्राम पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामले में अब तक ये जानकारी मिली है कि फर्जी रिपोर्ट बनाने के लिए 10 लाख रुपये नकद अदा किए गए। ये रुपये होटल के पार्किंग एरिया में खड़ी इनोवा कार से निकालकर दिए गए। सूत्र के अनुसार ये इनोवा कार पंजाब सरकार की गाड़ी बताई गई है। इसकी पुष्टि करने के लिए सबूत के तौर पर होटल के पार्किंग एरिया की सीसीटीवी कैमरे के फुटेज चेक किए जा रहे हैं। फुटेज के जरिये कार का नंबर लेकर जांच आगे बढ़ाई जाएगी। कार का नंबर पता चलने पर ही कैश के सोर्स का भी पता लगाने की कार्रवाई आगे बढ़ेगी। होटल में हुई इस मीटिंग के कई वीडियो और आरोपियों की अधिकारियों से वाॅट्सऐप पर हुई चैट के स्क्रीन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इसमें अधिकारियों आरोपियों के साथ बातचीत करते दिख रहे हैं। हालांकि इस चैट और वीडियो की पुष्टि अमर उजाला नहीं करता।

रिपोर्ट में 1,191 फ्रेम का हुआ विश्लेषण

पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट 17 जून को तैयार की गई थीं और उन पर अंकित शर्मा व अरुण महेंद्रू के हस्ताक्षर थे। करीब 10 और 13 पन्नों की इन रिपोर्टों में दावा किया गया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स से डाउनलोड किए गए वीडियो के पोस्टरल एनालिसिस, बॉडी स्ट्रक्चर ऑब्जर्वेशन, फेशियल रिकग्निशन और अन्य तकनीकी परीक्षणों के आधार पर वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति भगवंत मान नहीं है। अरुण महेंद्रू की रिपोर्ट में 1,191 फ्रेम के फॉरेंसिक सॉफ्टवेयर के जरिए विश्लेषण का भी उल्लेख किया गया था। पुलिस प्रवक्ता संदीप कुमार ने बताया कि दोनों आरोपियों को आठ दिन के रिमांड पर लेकर टीम पूछताछ कर रही है। मामले में जांच में टीमें लगी हुई हैं।

फर्जी वीडियो से मुझे बदनाम किया जा रहा : मान

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने वायरल हुए विवादित वीडियो को फर्जी और मनगढ़ंत बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के जनहित कार्यों का मुकाबला करने में असफल विपक्षी दल अब उन्हें बदनाम करने के लिए झूठे वीडियो का सहारा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विरोधियों के पास सरकार के खिलाफ कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। इसलिए वे उनकी छवि खराब करने के लिए दुष्प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो में दिख रहे व्यक्ति की कद-काठी, शारीरिक बनावट, चलने और व्यवहार का तरीका उनसे मेल नहीं खाता। इसके बावजूद राजनीतिक विरोधी उन्हें निशाना बना रहे हैं। मान ने कहा कि उन्हें पंजाब के लोगों और नानक नाम लेवा संगत पर पूरा भरोसा है। सच्चाई और झूठ का फैसला जनता करेगी। उन्होंने कहा कि उनका ध्यान बिजली, पानी, सड़क, अस्पताल, आम आदमी क्लीनिक और रोजगार जैसी सुविधाएं लोगों तक पहुंचाने पर केंद्रित रहेगा। 

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