NEET Solver Gang Toppers Arrested: नीट सॉल्वर गैंग से जुड़ा हैरान करने वाला अपडेट सामने आया है. झारखंड की स्टेट टॉपर पूनम और पलामू की चंचल कुमारी डमी कैंडिडेट बनकर दूसरों के नाम पर नीट परीक्षा दे रही थीं. दोनों टॉपर आखिर नीट सॉल्वर कैसे बन गईं? जानिए 18 बायोमेट्रिक कर्मियों की गिरफ्तारी और 5 राज्यों में फैले इस फर्जीवाड़े के सिंडिकेट का सच.
NEET Solver Gang: नीट सॉल्वर गैंग में 2 टॉपर लड़कियां भी शामिल थीं
आर्थिक तंगी और लगातार असफलता पड़ी भारी
चंचल कुमारी की कहानी भी अलग नहीं है. साल 2016 में पलामू जिला टॉपर बनी चंचल फिलहाल ओडिशा के एक सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज में बीएएमएस (BAMS) के फाइनल ईयर की छात्रा है. उसके 2 भाई आयुर्वेद चिकित्सक हैं और वो अपनी बहन को भी डॉक्टर बनते देखना चाहते थे. लेकिन चंद रुपयों के लालच या किसी शातिर के बहकावे में आकर चंचल ने अपनी पूरी जिंदगी दांव पर लगा दी. वह ‘नंदनी राज’ नाम की मूल परीक्षार्थी की जगह डमी कैंडिडेट बनकर परीक्षा हॉल में बैठी थी.
‘सॉल्वर सिंडिकेट’ कैसे काम करता है?
लखीसराय एसपी प्रेरणा कुमार के मुताबिक, यह खेल केवल परीक्षा हॉल में बैठकर पेपर सॉल्व करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था में अंदरूनी मिलीभगत का बहुत बड़ा सिंडिकेट है.
- फर्जी पहचान पत्र: डमी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों में एंट्री दिलाने के लिए सबसे पहले उनके फर्जी पहचान पत्र और आधार कार्ड तैयार किए जाते हैं, जिन पर चेहरा डमी कैंडिडेट का होता है और नाम असली छात्र का.
- बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन में सेंध: इस फर्जीवाड़े का सबसे डरावना पहलू यह है कि पुलिस ने जांच के दौरान 18 बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कर्मियों को भी गिरफ्तार किया है.. यानी उंगलियों के निशान मैच कराने वाले कर्मचारी ही इस गिरोह से मिले हुए थे.
- अंतरराज्यीय नेटवर्क: पुलिस की प्रारंभिक जांच में इस गिरोह के तार बिहार, झारखंड, दिल्ली, मध्य प्रदेश और राजस्थान तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं. गिरफ्तार लोगों में दिल्ली, मधेपुरा और मुजफ्फरपुर के कई नामी मेडिकल छात्र भी शामिल हैं.
समाज और माता-पिता के लिए कभी न भूलने वाला दर्द
नीट फर्जीवाड़ा कांड ने परीक्षा की शुचिता तो भंग की ही है, लेकिन उससे भी ज्यादा कई हंसते-खेलते परिवारों के गर्व और प्रतिष्ठा को हमेशा के लिए दफन कर दिया है. पूनम के पिता बालेश्वर प्रसाद राणा अपनी बेटी के कृत्य से इतने दुखी और हैरान हैं कि उन्होंने कैमरे के सामने रोते हुए कहा- मेरी बेटी ने घर और पूरे गांव की इज्जत मिट्टी में मिला दी है, मैं अब उससे जेल में मिलने तक नहीं जाऊंगा. वहीं चंचल के भाई भी हैरान हैं कि उनकी बहन इस दलदल में कैसे फंस गई.
क्यों दलदल की तरफ खिंच रहे हैं मेधावी स्टूडेंट्स?
शिक्षाविदों और जानकारों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हैं. पहला कारण है नीट जैसी परीक्षाओं के लिए कोचिंग सेंटर की लाखों की फीस. दूसरा, मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों में एडमिशन मिलने के बाद भी हॉस्टल, किताबों और रहने का खर्च उठा पाना गरीब या मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बेहद मुश्किल होता है. जब इन स्टूडेंट्स को अपनी जरूरतों के लिए पैसों की किल्लत होती है तो सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड इनका फायदा उठाते हैं. वे इन चमकते हुए दिमागों को चंद रुपयों या तुरंत अमीर बनने का लालच देकर अपनी ढाल बना लेते हैं और मेधावी छात्र बिना अंजाम सोचे इस चक्रव्यूह में फंस जाते हैं.
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