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1008 मोनी बाबा पिछले 62 दिनों से अग्नि तपस्या कर रहे हैं. पिलखतरा गांव में चल रही यह अग्नि तपस्या सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक विश्वास का प्रतीक बन गई है. 26 जून को तपस्या पूर्ण होने के साथ यहां हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. फिलहाल पूरा गांव इसी ऐतिहासिक क्षण का इंतजार कर रहा है.

चारों ओर धधकती अग्नि, बीच में साधना... 62 दिन से तपस्या कर रहे मोनी बाबाZoom

बाबा की भक्ति.

एटा: सत्संग, कथा, भागवत और कीर्तन तो हम अक्सर सुनते और देखते हैं. मगर, जब कोई संत 62 दिनों तक अग्नि के बीच मौन साधना में लीन रहे, तो वह केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आस्था, त्याग और तप का अद्भुत संगम बन जाता है. एटा जिले की जलेसर तहसील के गांव पिलखतरा में इन दिनों ऐसा ही दृश्य देखने को मिल रहा है. यहां 1008 मोनी बाबा पिछले 62 दिनों से अग्नि तपस्या कर रहे हैं. उनकी साधना के दर्शन के लिए प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और पूरा गांव धार्मिक वातावरण में सराबोर है. 26 जून को तपस्या पूर्ण होने के साथ विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा.

जलेसर तहसील के पिलखतरा गांव में प्रवेश करते ही भक्ति और श्रद्धा का माहौल दिखाई देता है. सड़क किनारे खड़े वाहन, संतों के जयकारे, भजन-कीर्तन और श्रद्धालुओं की भीड़ इस धार्मिक आयोजन की भव्यता को दर्शाती है. गांव के मध्य स्थित तपस्थल पर 1008 मोनी बाबा 23 अप्रैल से अग्नि तपस्या में लीन हैं. ग्रामीणों के अनुसार यह तपस्या 62 दिनों तक चलेगी और 26 जून को पूर्ण होगी. उनके साथ खड़ेश्वरी बाबा भी साधना में लीन हैं.

ग्रामीणों का कहना है कि मोनी बाबा लंबे समय से कठिन साधनाओं के लिए जाने जाते हैं. बचपन में ही उन्होंने सांसारिक जीवन का त्याग कर संन्यास का मार्ग अपनाया और अपना जीवन आध्यात्मिक साधना को समर्पित कर दिया. श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा का जीवन सादगी, अनुशासन और मौन साधना का प्रतीक है. यही वजह है कि दूर-दराज के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं.

एक ने कहा कि तपस्थल पर दिनभर भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम जारी रहता है. ब्रह्मचारी बाबा, ध्यान बाबा सहित कई संत-महात्मा यहां मौजूद हैं. श्रद्धालु संतों का आशीर्वाद लेकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं. महिलाएं, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं. लोगों का कहना है कि संतों के दर्शन से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है.

बढ़ती भीड़ को देखते हुए गांव के लोग व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं. पेयजल, प्रसाद वितरण, बैठने और छाया की व्यवस्था स्थानीय ग्रामीणों द्वारा संभाली जा रही है. स्वयंसेवकों की टीम भीड़ प्रबंधन में लगातार सहयोग कर रही है. 26 जून को तपस्या पूर्ण होने के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं.

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काव्‍या मिश्रा

Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें

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