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Single Malt Whisky : सिंगल माल्‍ट व्हिस्‍की की गुणवत्‍ता को बेहतर बनाने और उसे ग्‍लोबल स्‍टैंडर्ड के हिसाब से तैयार करने के लिए होलोग्राम की व्‍यवस्‍था की गई है. यह होलोग्राम उन्‍हीं कंपनियों के प्रोडक्‍ट को मिलेगा, जो सिंगल माल्‍ट व्हिस्‍की तैयार करने में सभी मानक का पालन करेंगी. होलोग्राम देखते ही यूजर पहचान लेंगे कि कौन सा प्रोडक्‍ट क्‍वालिटी पर खरा उतरता है.

अब देखते ही पहचान लेंगे असली व्‍हिस्‍की, हर बोतल पर लगेगा होलोग्रामZoom

भारत में सिंगल माल्‍ट व्हिस्‍की की बोलत पर होलोग्राम लगाने की तैयारी है.

नई दिल्‍ली. शराब के शौकीनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है कि पैसे देकर भी असली सामान नहीं मिल पाता. देश में जिस तरह नकली शराब का कारोबार बढ़ रहा है, असली और गुणवत्‍ता वाली व्हिस्‍की खरीदना मुश्किल होता जा रहा है. इस मुश्किल को हल करने के लिए एसोसिएश ने हर बोतल पर होलोग्राम लगाने का फैसला किया है. इससे बोतल को देखते ही ग्राहक पहचान लेंगे कि यह असली शराब है या फिर नकली. देश में बनने वाली हर सिंगल माल्‍ट व्हिस्‍की पर यह होलोग्राम लगाया जाएगा.

इंडियन माल्ट व्हिस्की एसोसिएशन (आईएमडब्ल्यूए) ने बताया है कि भारतीय सिंगल माल्ट व्हिस्की की प्रामाणिकता और गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करने के लिए होलोग्राम लगाया जाएगा. आईएमडब्ल्यूए ने सिंगल माल्ट व्हिस्की के लिए ‘होलोग्राम’ के रूप में प्रमाणन ट्रेडमार्क लागू करने की घोषणा की है. यह श्रेणी प्रीमियम डिमांड और निर्यात के चलते घरेलू मांग में तेज वृद्धि देख रही है और ग्‍लोबल मार्केट में व्हिस्की प्रेमियों के बीच अपनी स्थिति मजबूत कर रही है.

किस तरह के मैन्‍युफैक्‍चर्स पर होगा लागू
आईएमडब्ल्यूए के अनुसार, यह प्रमाणन ट्रेडमार्क असली व्हिस्‍की की प्रामाणिकता का आश्वासन होगा, जो केवल उन विनिर्माताओं को दिया जाएगा जो एसोसिएशन द्वारा निर्धारित उत्पादन मानकों का पालन करते हैं. ये मानक वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त मानदंडों के अनुरूप हैं. साथ ही भारत की विशिष्ट भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों को भी ध्यान में रखते हैं. जो भी कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन्‍हें होलोग्राम लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

कंपनियों को मानने होंगे कई नियम
एसोसिएशन ने बताया कि पात्रता के लिए विनिर्माताओं को सख्त मानदंडों का पालन करना होगा. इनमें 100 फीसदी माल्टेड जौ का उपयोग (बिना शीरा या न्यूट्रल स्पिरिट के), भारत में एक ही डिस्टिलरी में उत्पादन, तांबे के पॉट स्टिल में आसवन और अधिकतम 700 लीटर की ओक बैरल में कम से कम तीन वर्ष तक ऐज करना भी शामिल है. एसोसिएशन ने कहा कि मैशिंग, आसवन और बॉटलिंग सहित पूरी उत्पादन प्रक्रिया भारत में ही की जानी चाहिए और बाहरी फ्लेवरिंग एजेंट के उपयोग की अनुमति नहीं होगी.

क्‍वालिटी को बेहतर बनाने का प्रयास
आईएमडब्ल्यूए के महानिदेशक मेजर जनरल (डॉ.) राजेश चोपड़ा (सेवानिवृत्त) ने कहा कि यह प्रमाणन चिह्न केवल अनुपालन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रामाणिकता और प्रक्रिया की शुद्धता के लिए एक साझा आधार स्थापित करने का प्रयास है. इस पहल का उद्देश्य बाजार में स्पष्टता लाना, उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करना और इस श्रेणी के विस्तार को सत्यापित मानकों के आधार पर सुनिश्चित करना है. जुलाई 2024 में एक गैर-लाभकारी उद्योग निकाय के रूप में स्थापित आईएमडब्ल्यूए भारतीय माल्ट व्हिस्की विनिर्माताओं का प्रतिनिधित्व करता है. साथ ही इस क्षेत्र में गुणवत्ता, प्रामाणिकता और मानकीकरण को बढ़ावा देने के लिए काम करता है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

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