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Induction Manufacturing : इंडक्‍शन चूल्‍हे की डिमांड पिछले कुछ महीनों में दोगुनी हो चुकी और इसका उत्‍पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. लेकिन, पेच ये है कि उत्‍पादन के लिए जरूरी सिरेमिक ग्‍लास बनाने वाला कच्‍चा माल चीन से आता है, जो फिलहाल इसकी सप्‍लाई में हीलाहवाली कर रहा है. अब भारत ने इसका तोड़ निकाल लिया है और नया साझेदार साधने की तैयारी में है.

अब चीन नहीं, इस नए साझेदार के सहयोग से जलेगा आपका इंडक्‍शन चूल्‍हा!Zoom

भारत में इंडक्‍शन चूल्‍हे के निर्माण के लिए कच्‍चे माल का आयात चीन से होता है.

नई दिल्‍ली. इंडक्‍शन चूल्‍हे की जितनी जरूरत और चर्चा पिछले 2 से 3 महीने में हुई है, उतनी इसके शुरुआत से अभी तक नहीं हुई. अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से शुरू हुए गैस संकट से निपटने के लिए भारत में इंडक्‍शन चूल्‍हे की डिमांड ऐसी बढ़ी कि कंपनियों ने दिनरात मैन्‍युफैक्‍चरिंग करना शुरू कर दिया. जाहिर है कि इसकी जरूरत भी दिनोंदिन बढ़ती जा रही है और इसके साथ ही उस कच्‍चे माल की भी जरूरत बढ़ रही, जिसका इस्‍तेमाल इसे बनाने में किया जाता है. अभी तक इस कच्‍चे माल के लिए भारत ज्‍यादातर चीन के आयात पर निर्भर था, लेकिन अब उसने नया साझेदार खोज लिया है. इस बदलाव से आम आदमी, अर्थव्‍यवस्‍था और सरकार को क्‍या फायदा होने वाला है, इसकी परतें खोलते हैं.

मामले से जुड़े 2 वरिष्‍ठ अधिकारियों ने मनीकंट्रोल को बताया कि इंडक्‍शन चूल्‍हे के सिरेमिक ग्‍लास को बनाने में इस्‍तेमाल होने वाले स्‍पोडुमेन का आयात अब ऑस्‍ट्रेलिया से करने की तैयारी चल रही है. स्‍पोडुमेन एक कम्‍पोजिशन वाला एलीमेंट है, जो लिथियम, एल्‍युमीनियम और सिलिकेट का मिश्रण होता है. भारत अभी तक इंडक्‍शन के कुकटॉप्‍स को बनाने के लिए चीन से इस एलीमेंट के आयात पर निर्भर करता था, लेकिन अब इसे ऑस्‍ट्रेलिया से मंगाने की कवायद चल रही है. देश में इंडक्‍शन और इन्‍फ्रारेड कुकटॉप्‍स की डिमांड पिछले तीन महीने में बढ़ गई है, क्‍योंकि अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से एलपीजी की सप्‍लाई पर असर पड़ा है.

भारत को क्‍या होगा फायदा
एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने भारत के ऊर्जा सचिव और आर्थिक मामलों के सचिव के हवाले से बताया कि इस पर बात शुरू कर दी है. भारत की तैयारी है कि ऑस्‍ट्रेलिया से टेक्निकल ग्रेड का स्‍पोडुमीन आयात किया जाए और इससे इंडक्‍शन कुकर का ग्‍लास बनाया जाए. देश में इंडस्‍क्‍शन चूल्‍हे की बिक्री फरवरी के 5.13 से बढ़कर 10 लाख से भी ज्‍यादा पहुंच गई. हालांकि, भारत अभी तक इसे बनाने में इस्‍तेमाल होने वाले कच्‍चे माल के लिए आयात पर ही निर्भर है. खासकर चीन से आयात पर निर्भर करता है. भारत में घरेलू स्‍तर पर सिरेमिक ग्‍लास के उत्‍पादन में कमी यहां की इंडक्‍शन कंपनियों के विनिर्माण पर गहरा असर डाल रही है.

कंपनियों के पास कच्‍चे माल की कमी
भारतीय विनिर्माताओं ने सरकारी को दी जानकारी में बताया है कि चीन के सप्‍लायर समय पर डिलीवरी नहीं करते हैं और कच्‍चे माल की कमी की बात कहकर लंबा टाइम देते हैं. मैन्‍युफैक्‍चरर्स का भी कहना है कि सिरेमिक ग्‍लास, इंडक्‍शन क्‍वाइल और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड की कीमतों में 15 से 25 फीसदी का उछाल भी आ चुका है. अब आयात के लिए 4 से 5 हफ्ते का इंतजार करना पड़ रहा है. सिरेमिक ग्‍लास बनाने में स्‍पोडुमेन का इस्‍तेमाल होता है, जो लिथियम आधारित मिनरल होता है. ऑस्‍ट्रेलिया स्‍पोडुमीन का दुनिया में सबसे बड़ा उत्‍पदक देश है. अगर भारत को वहां से आयात होना शुरू हो जाए तो देश में इसकी डिमांड और सप्‍लाई का अंतर कम होगा और उत्‍पादन बढ़ने से प्रोडक्‍ट की कीमतों में भी कमी आएगी.

अगस्‍त से शुरू होगा देश में निर्माण
मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि राजस्‍थान में सिरेमिक ग्‍लास मैन्‍युफैक्‍चरिंग फैसिलिटी में अगस्‍त से विनिर्माण शुरू हो जाएगा, क्‍योंकि अनुमान है कि तब तक अगस्‍त से इसका आयात शुरू हो जाएगा. माना जा रहा है कि इससे घरेलू उत्‍पादन और बेहतर होगा, जो अभी तक आयात पर ज्‍यादा निर्भर है. ऊर्जा मंत्रालय ने राजस्‍थान सरकार से संपर्क भी किया है, ताकि वहां उत्‍पादन जल्‍दी से शुरू किया जा सके. इस प्‍लांट में हर महीने 15 लाख सिरेमिक ग्‍लास बनाने की क्षता होगी और सालाना 1.5 करोड़ यूनिट बनाई जा सकेगी.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

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