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Jawai Crocodile Man: जवाई क्षेत्र में रहने वाले हरि भाई को लोग प्यार से ‘क्रोकॉडाइल मैन’ के नाम से जानते हैं. मगरमच्छों के संरक्षण और रेस्क्यू कार्यों में उनकी पहचान एक साहसी वन्यजीव प्रेमी के रूप में बनी है. हरि भाई अब तक सैकड़ों मगरमच्छों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और उन्हें मानव बस्तियों से दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. जवाई बांध और आसपास के जलाशयों में रहने वाले लगभग 300 मगरमच्छों के बीच वे बिना किसी भय के उतरकर रेस्क्यू अभियान चलाते हैं. उनका उद्देश्य वन्यजीवों और इंसानों के बीच संघर्ष को कम करना और दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. वर्षों के अनुभव और साहस के दम पर उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरे किए हैं.

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पाली: एक ऐसा खूंखार शिकारी, जिसका एक वार और इंसान के जिस्म के चीथड़े उड़ जाएं! जिसके तीखे दांतों और फौलादी जबड़े के आगे काल भी कांपता है लेकिन राजस्थान के जवाई में एक शख्स ऐसा भी है, जिसे इन खूंखार मगरमच्छों से डर नहीं, बल्कि प्यार है!जी हां, हम बात कर रहे हैं जांबाज हरि भाई की. राजस्थान का जवाई इलाका, जो अपनी खूबसूरती के साथ-साथ पानी के राजा यानी मगरमच्छों के लिए जाना जाता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इस जवाई में 300 से ज्यादा खूंखार मगरमच्छ रहते हैं. लेकिन जब यही मगरमच्छ रास्ता भटककर गांवों में घुस आते हैं, तो चीख-पुकार मच जाती है. लोग डर के मारे कांपने लगते हैं. और तब, एंट्री होती है जवाई के असली हीरो हरि भाई की!

राजस्थान का जवाई इलाका अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, जवाई बांध और पैंथर्स के साथ-साथ पानी के राजा यानी मगरमच्छों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. इस पथरीले और जलीय क्षेत्र में करीब 300 से 500 मगरमच्छ राज करते हैं. अमूमन ये शांत रहते हैं, लेकिन कभी-कभी स्थितियां बेहद भयानक हो जाती हैं. क्षेत्र में मगरमच्छों द्वारा इंसानों पर हमले की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जिसमें पूर्व में एक देवासी परिवार के सदस्य को अपनी जान तक गंवानी पड़ी थी.

जब गांवों में मचती है चीख-पुकार, तब होती है हरि भाई की एंट्री
जवाई बांध और आसपास के जलस्रोतों से निकलकर जब ये खूंखार मगरमच्छ रास्ता भटककर रिहायशी इलाकों और गांवों में घुस आते हैं, तो ग्रामीणों में हड़कंप मच जाता है. लोग डर के मारे कांपने लगते हैं. ऐसे खौफ के माहौल में जवाई के रक्षक बनकर हरि भाई सामने आते हैं. हरि भाई बिना किसी डर के, बेहद सूझबूझ के साथ इन भारी-भरकम और खतरनाक मगरमच्छों का रेस्क्यू करते हैं और उन्हें सुरक्षित वापस पानी में छोड़ते हैं. हरि भाई कहते भी है कि जब भी कोई मगरमच्छ आबादी क्षेत्र में आता है, तो ग्रामीणों की सुरक्षा और बेजुबान वन्यजीव की जान बचाना ही मेरा सबसे पहला मकसद होता है.

2013 का वो खौफनाक मंजर: जब बुलाने पड़े थे एक्सपर्ट्स
हरि भाई के साहस की कहानी साल 2013 में तब और बड़ी हो गई, जब जवाई बांध में एक आदमखोर मगरमच्छ का आतंक चरम पर पहुंच गया था. स्थिति इतनी बिगड़ चुकी थी कि उस मगरमच्छ को पकड़ने के लिए विशेष एक्सपर्ट टीमें बुलानी पड़ी थीं. उस बेहद जोखिम भरे ऑपरेशन में हरि भाई ने मुख्य भूमिका निभाई और अपनी जान पर खेलकर उस मगरमच्छ को रेस्क्यू करवाया, जिसे बाद में उदयपुर शिफ्ट कर दिया गया था.

वन्यजीव और मानव सेवा की अनूठी मिसाल
हरि भाई आज जवाई क्षेत्र में पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का बड़ा चेहरा बन चुके हैं. वे न सिर्फ ग्रामीणों को मौत के मुंह से निकालते हैं, बल्कि भटक चुके मगरमच्छों को भी भीड़ के गुस्से से बचाकर उन्हें नया जीवन देते हैं. जवाई का यह ‘क्रोकॉडाइल मैन’ आज न सिर्फ राजस्थान बल्कि देश के लिए बहादुरी की एक अनूठी मिसाल है.

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Jagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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