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भारतीय टीम के दिग्गज विराट कोहली ने हाल ही में ये कहा था कि उनकी कंपनी के जूते बेशक कम बिके, लेकिन अब वह टेस्ट क्रिकेट में वापसी नहीं करेंगे. विराट कोहली ने भारत के लिए 123 टेस्ट मैचों में प्रतिनिधित्व किया, लेकिन उनके जल्दी रिटायरमेंट से फैंस में भारी निराशा देखने को मिली थी. विराट इस समय सिर्फ आईपीएल और वनडे में खेलते हैं.
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व टेस्ट प्लेयर विराट कोहली
अब एक सवाल यह भी उठता है कि जिस विराट कोहली को लेकर दुनिया भर में यह कहा जाता था कि उन्होंने अपने खेल और तेवर से टेस्ट क्रिकेट में नई जान फूंकने का काम किया, अब वही खिलाड़ी लाल गेंद के क्रिकेट में वापसी से क्यों कतरा रहा है. हो सकता है यह विराट कोहली का अपना निजी फैसला हो. यह उनका अधिकार है कि वह किस फॉर्मेट में खेलें और किसमें नहीं, लेकिन विराट कोहली जैसे खिलाड़ी का टेस्ट क्रिकेट से जल्दी रिटायर होना इस फॉर्मेट के लिए नुकसानदायक है.
टेस्ट क्रिकेट के ब्रांड बन गए थे विराट कोहली
विराट कोहली ने टीम इंडिया के लिए 123 टेस्ट मैचों में 9230 रन बनाए. विराट ने अपनी कंपनी वन8 के लाल रंग के जूते की कीमत भी 9230 रुपए रखी है. विराट कोहली ने अपने टेस्ट रनों पर जूते की कीमत तो तय कर दी, लेकिन उन्हें यह ख्याल नहीं रहा कि वह टेस्ट क्रिकेट का ब्रांड बन चुके थे. आज फैंस का झुकाव टी20 की तरफ ज्यादा हो चुका है. वनडे मुकाबलों को भी अब बोझिल माना जाने लगा है. ऐसे में पांच दिन तक खेले जाने वाले टेस्ट क्रिकेट में लोगों की दिलचस्पी कितनी होगी, यह बताना मुश्किल नहीं है.
हालांकि, विराट कोहली जैसे दिग्गज जब टेस्ट मैच खेलते थे, तो सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर के फैंस की उन पर नजर होती थी. विराट के कारण टेस्ट क्रिकेट रोमांचक लगने लगा था. आज जो रूट को छोड़ दें तो दूसरा कोई ऐसा बड़ा नाम नहीं है, जो टेस्ट क्रिकेट के लिए चर्चा में रहता हो. जो रूट ने हाल ही में टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 14000 रन बनाने का कीर्तिमान अपने नाम किया.
विराट जैसे खिलाड़ियों ने भी टेस्ट से हाथ क्यों जोड़े?
टेस्ट क्रिकेट की लोकप्रियता में बेशक आज गिरावट आ गई है, लेकिन अभी भी किसी खिलाड़ी की असली परीक्षा लाल गेंद के क्रिकेट में ही होती है. आज भी क्रिकेटरों का यह सपना होता है कि वे अपने देश के लिए टेस्ट में प्रतिनिधित्व करें, लेकिन फटाफट क्रिकेट यानी टी20 ने अब खिलाड़ियों का मन बदल दिया है. ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं जहां खिलाड़ी पैसे के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट को छोड़कर सिर्फ टी20 लीगों में खेलने लगे हैं. टी20 के लिए वे कम उम्र में रिटायर हो रहे हैं.
यही कारण है कि विराट कोहली कितना भी कहें कि फिटनेस और बढ़ती उम्र के कारण उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को छोड़ा है, लेकिन दूसरा पहलू ये भी है कि अगर विराट कोहली आईपीएल और वनडे में खेल सकते हैं, तो क्या वो ऐसा नहीं कर सकते थे कि आईपीएल और वनडे को छोड़कर वह टीम इंडिया के लिए सिर्फ टेस्ट खेलें? उनके पास यह विकल्प भी तो था. ऐसे में मामला साफ है कि पैसा और व्यक्तिगत उपलब्धि के कारण विराट कोहली जैसे दिग्गज भी टेस्ट फॉर्मेट से दूरी बना रहे हैं. हालांकि, इसके बावजूद भारत में शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल और ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ियों ने टेस्ट क्रिकेट में नई जान फूंकने की पहल की है, लेकिन कहना मुश्किल है कि लगातार हो रहे क्रिकेट के बीच ये प्लेयर भी कब तक लाल गेंद का साथ देंगे.
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जितेंद्र कुमार डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में बीते 10 सालों से सक्रिय हैं. इस वक्त नेटवर्क 18 समूह में हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. क्रिकेट के साथ बॉक्सिंग, कबड्डी, बैडमिंटन, ह…और पढ़ें
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