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Agriculture Tips : राजस्थान में समय से पहले बारिश से खरीफ फसलों की बढ़वार बेहतर, एग्रीकल्चर एक्सपर्ट मोहनलाल ढाका ने देसी खाद, मल्चिंग, संतुलित उर्वरक और थीरम बीज उपचार की सलाह दी. उन्होंने कहा कि बारिश से ठीक पहले फसलों में किसी भी प्रकार की दवा या खाद का छिड़काव करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे फसलों को लाभ मिलने के बजाय नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है.
Agriculture Tips. राजस्थान में इस बार समय से पहले हुई बारिश ने किसानों को फायदा पहुंचाया है. किसानों ने खाली खेतों में फसल बुवाई शुरू कर दी है. कई किसानों ने पहले ही बुवाई कर दी थी, जिसके कारण अब अच्छी बारिश से फसल की बढ़वार बेहतर हो रही है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट मोहनलाल ढाका ने बताया कि अभी खेती के लिए अनुकूल मौसम है. ऐसे में किसानों को देसी खाद, जैसे सड़ी-गली गोबर की खाद और कम्पोस्ट, का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना चाहिए. इससे भूमि की जलधारण क्षमता और पोषक तत्वों की मात्रा में बढ़ोतरी होगी तथा उत्पादन भी अधिक मिलेगा.
उन्होंने बताया कि किसान मिट्टी की जांच के बाद उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें और विशेष रूप से पोटाश की मात्रा बढ़ाएं. इससे पानी की कमी की स्थिति में फसल की सूखा सहन करने की क्षमता बढ़ सकेगी. बारिश आधारित और बारानी क्षेत्रों में भूमि में नमी बनाए रखने के लिए पलवार यानी मल्चिंग का प्रयोग लाभदायक रहेगा. उन्होंने बताया कि खरीफ फसलों की बुवाई के लिए आवश्यक आदान, जैसे बीज, उर्वरक और बीज उपचार के लिए जरूरी रसायनों की व्यवस्था कर लेनी चाहिए. खरीफ फसलों के बीज उपचार के लिए थीरम का 3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से प्रयोग करना चाहिए.
बारिश से पहले न करें छिड़काव
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट मोहनलाल ने किसानों को बारिश के मौसम में खाद और कीटनाशक दवाओं के उपयोग को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि बारिश से ठीक पहले फसलों में किसी भी प्रकार की दवा या खाद का छिड़काव करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे फसलों को लाभ मिलने के बजाय नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है. बारिश होने पर छिड़की गई दवाएं पानी के साथ बहकर आसपास की अन्य फसलों तक पहुंच सकती हैं, जिससे उन फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
प्रत्येक फसल के लिए अलग होती हैं दवाएं
उन्होंने बताया कि प्रत्येक फसल के लिए अलग-अलग प्रकार की दवाएं और पोषक तत्व निर्धारित होते हैं. जो दवा एक फसल के लिए लाभकारी होती है, वह दूसरी फसल के लिए हानिकारक साबित हो सकती है. ऐसे में यदि बारिश से पहले दवाओं का छिड़काव किया जाता है, तो वे पौधों द्वारा अवशोषित होने से पहले ही पानी के साथ बह जाती हैं. इससे दवा का प्रभाव कम हो जाता है और कई बार पूरी तरह समाप्त भी हो जाता है.
मोहनलाल के अनुसार इस स्थिति में किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ता है. एक ओर दवा और श्रम पर किया गया खर्च व्यर्थ हो जाता है, वहीं दूसरी ओर फसल को कीट और रोगों से पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल पाती. इसलिए किसानों को मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए ही खाद और कीटनाशक दवाओं का उपयोग करना चाहिए, ताकि फसलों को अधिकतम लाभ मिल सके और आर्थिक नुकसान से बचा जा सके.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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