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कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर तीन स्वदेशी वॉरशिप्स INS दूनागिरी, INS संशोधक और एंटी-सबमरीन INS अग्रय भारतीय नौसेना में शामिल हुए। देश में ही डिजाइन किए और बनाए गए जहाजों के शामिल होने से देश की ऑपरेशनल क्षमताएं बढ़ जाएंगी।
INS संशोधक बिना रीफ्यूलिंग के 12 हजार किलोमीटर तक जा सकता है। INS दूनागिरी एक साथ 8 ब्रह्मोस मिसाइल्स से लैस है। वहीं, INS अग्रय कोस्टलाइन के पास मौजूद दुश्मन सबमरिन्स को मार सकता है।
इस दौरान कार्यक्रम में पीएम मोदी भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि इनका निर्माण भारत में हुआ है। डिजाइन भारत में हुआ है। भारतीय इंजीनियरों का कौशल लगा है, परिश्रम लगा है। यह नए भारत की सबसे बड़ी ताकत है। आज भारत रक्षा क्षेत्र में केवल खरीदार बनकर नहीं रहना चाहता।
उन्होंने आगे कहा कि हमारी सैन्य शक्ति दुनिया के लिए बाजार नहीं बन सकती। मेरी शक्ति की पहचान विश्व का बाजार बनने में नहीं बल्कि मेरी आत्मनिर्भरता में है। भारत निर्माता बनना चाहता है। जिस दिन निर्माता होंगे न, उस दिन निर्णायक भी होंगे।
कार्यक्रम की 3 तस्वीरें…
पीएम मोदी की मौजूदगी में तीनों वॉरशिप नौसेना में शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान नौसेना के जवानों ने परेड की और फ्लैग होस्टिंग (ध्वजारोहण) की।
कमीशन हुए जहाज अब अपने निर्धारित कमांड में तैनात कर दिए जाएंगे।
जानिए तीनों वॉरशिप की खासियत…
INS दूनागिरी- ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों से लैस
INS दूनागिरी प्रोजेक्ट-17A का 5वां स्टील्थ फ्रिगेट वॉरशिप है। इसे नेवी के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। प्रोडक्शन कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) ने किया है। जहाज के कमांडिंग ऑफिसर (डिजाइनेट) कैप्टन दिव्य आलोक ने कहा कि दुनागिरी ईस्ट नेवल कमान और ईस्टर्न फ्लीट का हिस्सा बनेगा।
INS संशोधक- समुद्र का नक्शा और सर्वे करेगा
INS संशोधक सर्वे वेसल (लार्ज) सीरीज का चौथा जहाज है। इसका काम युद्ध लड़ना नहीं, बल्कि समुद्र का सर्वे करना है। इसे तट और गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वे, समुद्री डेटा कलेक्शन और डिफेंस-सिविल यूज के लिए बनाया गया है। बंदरगाहों और समंदर के रास्तों का सर्वे करना भी इसके मुख्य काम में शामिल है।
INS अग्रय- दुश्मन की सबमरीन खोजकर नष्ट करेगा
INS अग्रय अर्नाला क्लास का चौथा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट यानी उथले पानी का वॉरशिप है। इसे हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और एडवांस्ड सोनार सिस्टम से लैस किया गया है। जिससे यह तटों पर तैनात दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाकर उन्हें निशाना बना सकता है।
भारतीय नौसेना में 140 से 145 वॉरशिप्स
भारतीय नौसेना के पास इस समय लगभग 140 से 145 सक्रिय वॉरशिप्स हैं। नौसेना का मुख्य लक्ष्य साल 2030 तक अपने जहाजों की कुल संख्या को 150 से 160 तक पहुंचाना है।
भारत अपने इन युद्धपोतों को मुख्य रूप से तीन नौसैनिक कमांड्स और एक रणनीतिक द्वीप कमान में तैनात करता है। विशाखापट्टनम (पूर्वी कमान) के जहाज बंगाल की खाड़ी और मलक्का में चीन की घेराबंदी करते हैं।
मुंबई और कारवार (पश्चिमी कमान) के युद्धपोत अरब सागर में पाकिस्तान पर नजर रखने और समुद्री लुटेरों से व्यापारिक जहाजों को बचाने के लिए चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं। इसके अलावा, समंदर के बीचो-बीच अंडमान और निकोबार कमान में तैनात जहाज दुश्मन के प्रवेश मार्ग को पूरी तरह ब्लॉक कर देते हैं।
आधुनिक नौसैनिक युद्ध में युद्धपोतों की भूमिका सबसे अहम हो चुकी है क्योंकि दुनिया का 90% व्यापार समुद्री रास्तों से ही होता है। आज के युद्धपोत केवल जहाज नहीं, बल्कि समंदर में तैरते हुए मिलिट्री बेस हैं।
समुद्र में बढ़ी परमाणु ताकत
रिपोर्ट में भारत की समुद्री परमाणु क्षमता को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है। भारत की परमाणु पनडुब्बियां, खासकर INS अरिहंत, अब देश की ‘सेकेंड स्ट्राइक कैपेसिटी’ का बड़ा आधार बन रही हैं।
SIPRI का अनुमान है कि भारत अब शांति काल में भी सीमित संख्या में परमाणु हथियारों को बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों पर तैनात करने लगा है। इससे दुश्मन के पहले हमले के बाद भी जवाबी कार्रवाई की क्षमता बनी रहती है।
INS अरिघात पनडुब्बी पानी के अंदर से परमाणु हथियार लॉन्च कर सकती है।
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