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S Sreesanth love story: एस श्रीसंत ने अपने जीवन के सबसे काले दौर 2013 के आईपीएल स्पॉट-फिक्सिंग विवाद को याद करते हुए बताया कि उनकी पत्नी भुवनेश्वरी उनके जीवन का सबसे बड़ा सहारा थीं. जेल के दिनों में जब वे गहरी निराशा में थे और उनके मन में आत्महत्या के विचार आ रहे थे, तब भुवनेश्वरी से किया वादा ही उनके जीवित रहने की वजह बना. शारीरिक बीमारियों, बैन और गंभीर कानूनी आरोपों के बावजूद भुवनेश्वरी के परिवार ने उनका साथ नहीं छोड़ा और संकट के उस दौर में भी शादी की.
श्रीसंत ने अपनी पत्नी को पूरा क्रेडिट दिया.
साल 2013 के आईपीएल के दौरान दिल्ली पुलिस ने श्रीसंत (Sreesanth) को उनके साथी खिलाड़ियों अजीत चंडीला और अंकीत चव्हाण के साथ स्पॉट-फिक्सिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया था. इस घटना के बाद बीसीसीआई (BCCI) ने उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया और उनकी आईपीएल फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स ने भी उनका कॉन्ट्रैक्ट सस्पेंड कर पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी. श्रीसंत के लिए यह एक ऐसा सदमा था, जिसने उन्हें अंदर से पूरी तरह झकझोर दिया था. जेल की सलाखों के पीछे रहते हुए उनके मन में आत्महत्या तक के विचार आने लगे थे. इस खौफनाक दौर को याद करते हुए श्रीसंत ने बताया.
श्रीसंत ने अपनी पत्नी को पूरा क्रेडिट दिया.
बकौल श्रीसंत, ‘जब मैं जेल में था, तो मेरे खुदकुशी न करने की सबसे बड़ी वजह मेरी पत्नी भुवनेश्वरी ही थीं. मैंने साल 2010 में उनसे वादा किया था कि अगर भारत 2011 का वनडे वर्ल्ड कप जीत जाता है, तो मैं उनसे शादी करूंगा.’ यह भुवनेश्वरी का प्यार और उनका दिया हुआ हौसला ही था, जिसने श्रीसंत को जेल के उस अंधेरे कमरे में भी जिंदगी की जंग लड़ने की ताकत दी.
लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में श्रीसंत ने अपनी लव स्टोरी के उन पांच खास पड़ावों का भी जिक्र किया, जो आखिरकार शादी के मंडप तक पहुंचे. दिलचस्प बात यह है कि उनकी सगाई (रोका) तब हुई जब वे जेल से जमानत पर बाहर आए थे. उन्होंने अपनी मुलाकातों को याद करते हुए कहा मेरी भुवनेश्वरी से पहली मुलाकात एक स्कूल में हुई. जहां श्रीसंत मैं चीफ गेस्ट के तौर पर गया था. तब भुवनेश्वरी 10वीं कक्षा में पढ़ती थीं. दूसरी मुलाकात ठीक उसके अगले दिन एक क्रिकेट के मैदान पर हुई. तीसरी मुलाकात साल 2010 में (तीन साल बाद) एक पूलसाइड पर हुई, जहां उनके अंकल और सुरक्षाकर्मी भी मौजूद थे. चौथी मुलाकात इंदौर में हुई. पांचवीं मुलाकात मेरे जीवन की सबसे खास मुलाकातों में से एक थी. श्रीसंत ने बताया, ‘यह हमारा रोका (शादी से पहले की रस्म) था, जो तब हुआ जब मैं वास्तव में जमानत पर बाहर आया था.’
अपाहिज होने का खतरा, फिर भी परिवार ने नहीं छोड़ा साथ
2013 के विवाद से पहले, साल 2012 में श्रीसंत एक गंभीर शारीरिक समस्या से जूझ रहे थे. उनके पैर के अंगूठे की सर्जरी हुई थी और वे व्हीलचेयर पर आ गए थे. डॉक्टरों ने उन्हें बताया था कि उन्हें ‘बोन मैरो एडिमा’ है. यह एक ऐसी नर्व-एंडिंग सर्जरी थी, जिसमें उनके 17 प्रतिशत अपाहिज होने की संभावना थी. इस स्थिति में श्रीसंत ने भुवनेश्वरी की मां से कहा था कि वे अभी शादी नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें खुद नहीं पता कि वे दोबारा कभी क्रिकेट खेल पाएंगे या नहीं. लेकिन इसके बावजूद भुवनेश्वरी और उनके परिवार का फैसला नहीं बदला. श्रीसंत ने अपनी पत्नी के परिवार के प्रति आभार जताते हुए कहा, ‘उस दौर में जो कुछ भी हुआ, उसके बावजूद वे पीछे नहीं हटे और शादी के फैसले पर कायम रहे. भुवनेश्वरी ही मुख्य वजहों में से एक थीं, जिनकी वजह से मुझे जमानत मिल सकी.’
एक चैंपियन का संघर्ष और वापसी
एस श्रीसंत भारत की दो सबसे बड़ी ऐतिहासिक जीतों का हिस्सा रहे हैं. वे महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में 2007 के पहले आईसीसी वर्ल्ड टी20 और 2011 के वनडे वर्ल्ड कप की विजेता टीमों के प्रमुख सदस्य थे. स्पॉट-फिक्सिंग के दाग के बाद उनके जीवन में लंबा कानूनी संघर्ष चला. आखिरकार, सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बीसीसीआई ने उनके आजीवन प्रतिबंध को घटाकर सात साल कर दिया, जो सितंबर 2020 में समाप्त हुआ. इसके बाद श्रीसंत ने घरेलू क्रिकेट में केरल की टीम से वापसी भी की. अंततः, मार्च 2022 में उन्होंने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा कर दी. श्रीसंत की यह कहानी केवल खेल और विवादों की नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे सच्चे प्रेम और निष्ठा की मिसाल है, जिसने एक टूटते हुए इंसान को न सिर्फ बिखरने से बचाया, बल्कि समाज के सामने दोबारा सिर उठाकर जीने का हौसला भी दिया.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें
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