भारतीय उच्च शिक्षा ने वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में आईआईटी दिल्ली 118वें स्थान पर पहुंचकर किसी भी भारतीय संस्थान के अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की बराबरी करने में सफल रहा है। खास बात यह है कि इस बार सफलता सिर्फ आईआईटी तक सीमित नहीं रही। देश के 19 राज्यों के 52 विश्वविद्यालयों ने रैंकिंग में जगह बनाई है, जबकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के बाद बड़ी संख्या में नॉन-आईआईटी और राज्य विश्वविद्यालयों ने भी रिकॉर्ड सुधार दर्ज कर भारतीय उच्च शिक्षा के बढ़ते दायरे और गुणवत्ता का संकेत दिया है।
क्यूएस की सीईओ जेसिका टर्नर ने कहा, लंदन में बृहस्पतिवार तड़के जारी क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में भारत के 19 राज्यों के कुल 52 विश्वविद्यालयों को जगह मिली है। सबसे बड़ी युवा आबादी का देश भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी प्रतिनिधित्व वाली उच्च शिक्षा प्रणाली बन गया है। करीब, 52 फीसदी भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों ने प्रदर्शन में सुधार किया है। पिछले एक दशक में भारत की हिस्सेदारी में 271 फीसदी (14 से बढ़कर 52) की वृद्धि हुई है, जोकि जी-20 देशों में सबसे तेज़ है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बाद से, 29 भारतीय विश्वविद्यालयों ने रैंकिंग में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है। इनमें से 18 विश्वविद्यालय तो अकेले इसी साल इस नए मुकाम पर पहुंचे हैं, जो एनईपी के दौर में एक साल में हुआ सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है। जैसे-जैसे भारत विकसित भारत 2047 के विजन की ओर बढ़ रहा है, इसके विश्वविद्यालय देश को नई ऊंचाइयों तक लेकर जाने को तैयार है। इनका योगदान क्लासरूम और कैंपस तक ही सीमित नहीं है, वे ऐसी प्रतिभाओं, विचारों और खोजों को विकसित कर रहे हैं जो आर्थिक विकास, तकनीकी नेतृत्व और सामाजिक प्रगति का आधार बनेंगे। प्रतिभा, रिसर्च और इनोवेशन में भारत का निवेश वैश्विक स्तर पर उसकी स्थिति को मज़बूत कर रहा है।
एमआईटी अमेरिका लगातार 15वें वर्ष दुनिया का शीर्ष विश्वविद्यालय बना हुआ है। जबकि इम्पीरियल कॉलेज लंदन और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी संयुक्त रूप से दूसरे, स्थान पर हैं । इस साल अमेरिका के 66 फीसदी और जर्मनी के 78 फीसदी विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में गिरावट आई है। वहीं, भारत 52 फीसदी सुधार और चीन में 72 फीसदी सुधार दिखा है।
आईआईटी के वर्चस्व पछाड़ आगे बढ़ते राज्य और विश्वविद्यालय
क्यूएस इंडिया के उपाध्यक्ष डॉ. अश्विन फर्नाडीस ने कहा अब तरक्की कुछ चुनिंदा बड़े संस्थानों तक ही सीमित नहीं है। बड़े हिस्से में सुधार दिख रहा है। एक दशक पहले, टॉप रैंक वाली यूनिवर्सिटीज सिर्फ नौ राज्यों में थी। आज वे 19 राज्यों तक पहुंच गई है। वर्ष 2017 में नॉन -आईआईटी संस्थानों की संख्या सात से बढ़कर 2027 में 43 हो गई है। इस साल अब तक की सबसे अच्छी रैंकिंग पाने वाली 18 यूनिवर्सिटीज़ में से 13 नॉन-आईआईटी है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और दिल्ली के विश्वविद्यालयों ने रिकॉर्ड रैंकिंग में जगह बनाई है। तरक्की अब सिर्फ कुछ चुनिंदा आईआईटी वाले शहरों तक सीमित नहीं है। इस साल ऐसे संस्थानों में ग्लोबल टॉप में जगह बनाई है, जिनका प्रदर्शन पहले खास नहीं था। इसमें वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी 94 पायदान उछाल के साथ 597वें नंबर पर आया है, जोकि किसी भी भारतीय यूनिवर्सिटी के लिए सबसे बड़ी बढ़त है। बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, पिलानी, 93 पायदान उछाल के साथ 575वें नंबर, हिमाचल प्रदेश की प्राइवेट शूलिनी यूनिवर्सिटी, 51 पायदान के साथ भारत की टॉप दस यूनिवर्सिटीज़ में 452वें नंबर पर आ गई है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी 49 पायदान उछाल के साथ 526वें, जामिया मिलिया इस्लामिया 75 पायदान के साथ 686वें नंबर पर पहुंच गई है।
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