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मुंबई3 मिनट पहले

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गुरुवार सुबह दिल्ली में शिवसेना(UBT) सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

दिल्ली में शिवसेना (यूबीटी) के संसदीय दल की बैठक शुरू हो चुकी है। पार्टी ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को व्हिप जारी कर गुरुवार सुबह 11 बजे दिल्ली में होने वाली बैठक में मौजूद रहने का निर्देश दिया है। पार्टी की ओर से 16 जून को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि विभिन्न संगठनात्मक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए यह महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।

वहीं, शिवसेना एमएलसी चंद्रकांत रघुवंशी ने गुरुवार को दावा किया कि शिवसेना (UBT) के 6 सांसद शिवसेना में शामिल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ पूरा हुआ है।

दरअसल, यूबीटी के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, छह सांसदों ने बुधवार सुबह 9:30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजी। हालांकि, अभी स्पीकर या बागी गुट की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

स्पीकर को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजने की चर्चा

यूबीटी के बागी सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल शामिल हैं। संजय ने बुधवार सुबह ही पार्टी छोड़ने की खबरों को खारिज किया था। इस बीच दिल्ली में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों को गाली दी।

राउत ने कहा- ये साले #$% के। ये बेईमान लोग हैं। बेईमानी उनके खून में हैं। राउत ने बाद में सफाई देते हुए कहा- मराठी में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं। राउत की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना (UBT) के 9 में से सिर्फ 3 सांसद, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत मौजूद रहे। राउत ने कहा कि बाकी सांसदों को खुद सामने आकर अटकलों का खंडन करना चाहिए।

शिवसेना में चार साल में यह दूसरी बड़ी टूट है। जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत कर शिवसेना का अलग गुट बनाया था।

6 सांसदों के गुट को दल-बदल कानून से मिल सकती है राहत

लोकसभा में शिवसेना (UBT) के 9 सांसद हैं। दल-बदल कानून के तहत किसी दल में टूट के बाद अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का साथ होना जरूरी है। यानी अगर 9 में से 6 सांसद एक साथ अलग होने का फैसला करते हैं, तो वे खुद को वैध गुट बताने का दावा कर सकते हैं।

इसी वजह से 6 सांसदों के बगावत करने की खबर राजनीतिक और कानूनी, दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जानकारों के मुताबिक, सिर्फ अलग गुट बनाना ही काफी नहीं होगा।

आगे चलकर इन सांसदों को किसी दूसरे दल में विलय की प्रक्रिया भी पूरी करनी पड़ सकती है, ताकि उनकी स्थिति कानूनी रूप से और मजबूत हो सके।

बंगाल-महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु पर भाजपा की नजर

मानसून सत्र से पहले लोकसभा में संख्या बल बढ़ाने की राजनीतिक कवायद तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के बाद अब तमिलनाडु में DMK को अगला लक्ष्य माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, मकसद दो-तिहाई बहुमत जुटाकर परिसीमन (850 सीटें करने), महिला आरक्षण के क्रियान्वयन और ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ जैसे बड़े संवैधानिक बदलावों का रास्ता आसान करना है।

बताया जा रहा है कि पिछले सत्र में परिसीमन समेत अहम बिलों पर जरूरी समर्थन नहीं मिलने के बाद सरकार ने संख्या बल बढ़ाने की रणनीति बनाई है। चर्चा है कि TMC और शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद पाला बदल सकते हैं।

इससे लोकसभा में NDA की संख्या बढ़ सकती है। हालांकि, दो-तिहाई बहुमत के लिए अभी और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। पार्टी के रणनीतिकार का कहना है कि अगर सरकार दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंच गई तो संसद का विशेष सत्र बुलाकर भी परिसीमन बिल पारित कराया जा सकता है।

कांग्रेस बोली- शाह लोकसभा में अपनी बेइज्जती की भरपाई कर रहे

कांग्रेस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर विपक्षी दलों के सांसदों को भाजपा में शामिल कराने की कोशिश करने और भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने X पर कहा- शाह यह सब 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में हुई अपनी बेइज्जती की भरपाई के लिए कर रहे हैं, जब वे परिसीमन विधेयकों को पास नहीं करवा पाए थे।

रमेश ने कहा- शाह के प्रलोभन ऐसे कई लोगों को आकर्षित कर रहे हैं, जो सिर्फ दो साल पहले मजबूत भाजपा-विरोधी एजेंडे पर चुने गए थे और अब भाजपा में शामिल हो रहे हैं।

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