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होमताजा खबरदेशसिक्किम के जंगलों में 20 साल बाद दिखा दुर्लभ मिश्मी टाकिन का झुंड, क्या है वजह

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उत्तर सिक्किम के टिंगदा वन में 20 साल बाद मिश्मी टाकिन के आठ जानवरों का झुंड देखने को मिला. इसे वी‍डियो में कैद कर लिया गया है. विशेषज्ञ बोले, इनका इस तरह जगलों में दिखना यह पहाड़ के बेहतर पर्यावरण होने का संकेत है.टाकिन 4,500 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहते हैं.

सिक्किम के जंगलों में 20 साल बाद दिखा दुर्लभ मिश्मी टाकिन का झुंड, क्या है वजहZoom

मिश्मी टाकिन पूर्वी हिमालय के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाला एक बड़ा जानवर है.

गंगटोक. उत्तर सिक्किम के टिंगदा वन में पहली बार दुर्लभ मिश्मी टाकिन के झुंड का वीडियो रिकॉर्ड किया गया है. पिछले 20 साल से भी अधिक समय में सिक्किम में इस जानवर के देखे जाने की यह सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है. वन एवं पर्यावरण विभाग की ओर से बुधवार को जारी एक बयान के अनुसार, यह दुर्लभ दृश्य आरक्षित वन के बाकुचेन क्षेत्र में नियमित गश्त के दौरान देखा गया और अधिकारियों ने आठ मिश्मी टाकिन (बुडोरकास टैक्सीकलर) के झुंड का वीडियो बनाया. आखिर क्‍या वजह है,जिस वजह से झुंड  बाहर दिखा, कहीं इनका घर खतरे में तो नहीं है. आइए जानते हैं.

विभाग ने कहा, ‘इस वीडियो में आठ जानवरों का एक झुंड दिखाई दे रहा है, जो इस क्षेत्र में अब तक दर्ज टाकिन का सबसे बड़ा समूह है.’ मिश्मी टाकिन पूर्वी हिमालय के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाला एक बड़ा जानवर है. यह अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की लाल सूची में ‘संवेदनशील’ श्रेणी में सूचीबद्ध है.

गठीले शरीर, घने बाल और जटिल पहाड़ी वातावरण में जीवित रहने की क्षमता के लिए जाने जाने वाले टाकिन 4,500 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहते हैं, जिनमें घने जंगलों वाली घाटियां और ऊंचे पहाड़ी घास के मैदान शामिल हैं. इनकी त्वचा से एक प्राकृतिक तैलीय पदार्थ निकलता है, जो इन्हें बारिश और अत्यधिक खराब मौसम से बचाने में मदद करता है.

बयान में कहा गया है, ‘सिक्किम में मिश्मी टाकिन के देखे जाने के पुराने रिकॉर्ड बहुत कम हैं. इसलिए यह नया वीडियो पिछले 20 साल से ज्यादा समय में इस दुर्लभ जानवर की मौजूदगी का सबसे महत्वपूर्ण और पक्का सबूत माना जा रहा है.’ वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि मिश्मी टाकिन का झुंड इस बात का संकेत है कि इस क्षेत्र का पहाड़ी प्राकृतिक वातावरण अभी भी अच्छा और सुरक्षित है. उन्होंने कहा कि इससे यह भी पता चलता है कि पूर्वी हिमालय में जंगलों और वन्यजीवों के रहने की जगहों का आपस में जुड़े रखना बहुत जरूरी है.

About the Author

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Sharad Pandeyविशेष संवाददाता

करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्‍यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें

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