-जनसुनवाई में डीएम का सख्त संदेश-जनसेवा में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, हर शिकायत का होगा गुणवत्तापूर्ण निस्तारण
-नगर निगम, जीडीए, बिजली, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग की शिकायतों पर डीएम ने मांगी जवाबदेही, अधिकारियों को दिए स्पष्ट निर्देश
-एक साल से बंद थी वृद्धावस्था पेंशन, ग्राम चौपाल में रखी बात तो तीन दिन में मिला न्याय और आर्थिक राहत: रहीसुद्दीन
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जिला प्रशासन की जनसुनवाई व्यवस्था एक बार फिर आमजन के लिए राहत का माध्यम बनी। कलेक्ट्रेट सभागार में बुधवार को आयोजित नियमित जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ ने विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना तथा अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनसेवा से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जनसुनवाई में नगर निगम, जीडीए, विद्युत, स्वास्थ्य, राजस्व सहित विभिन्न विभागों से जुड़े बड़ी संख्या में प्रार्थना-पत्र प्राप्त हुए। जिलाधिकारी ने प्रत्येक शिकायतकर्ता से विस्तार से बातचीत करते हुए संबंधित मामलों की जानकारी ली और यह भी पूछा कि शिकायत के संबंध में पहले कोई आवेदन दिया गया था या नहीं। उन्होंने सभी फरियादियों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं का नियमानुसार निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान कराया जाएगा। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक शिकायत का शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। जिन मामलों में स्थलीय निरीक्षण आवश्यक हो, वहां मौके पर जाकर वस्तुस्थिति का सत्यापन करने के बाद ही कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि शिकायत के निस्तारण के बाद संबंधित शिकायतकर्ता से अनिवार्य रूप से फीडबैक लिया जाए, ताकि समाधान की गुणवत्ता का वास्तविक आकलन किया जा सके। जनसुनवाई के दौरान ग्राम अबूपुर निवासी रहीसुद्दीन का मामला चर्चा का विषय रहा। उन्होंने बताया कि तीन दिन पूर्व प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह की अध्यक्षता में आयोजित ग्राम चौपाल में उन्होंने अपनी एक वर्ष से बंद वृद्धावस्था पेंशन की समस्या रखी थी। पेंशन बंद होने के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। प्रभारी मंत्री ने मौके पर ही जिलाधिकारी को प्रकरण में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मात्र तीन दिन के भीतर न केवल रहीसुद्दीन की वृद्धावस्था पेंशन दोबारा शुरू कराई, बल्कि जांच में तत्कालीन ग्राम सचिव की लापरवाही सामने आने पर उन पर 12 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया।
दंड की यह पूरी राशि पीडि़त रहीसुद्दीन को नगद दिलाई गई। रहीसुद्दीन ने इसके लिए प्रभारी मंत्री और जिलाधिकारी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें लंबे समय बाद प्रशासन से त्वरित न्याय मिला है। जिलाधिकारी ने कहा कि जनसमस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी समाधान जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रत्येक अधिकारी यह सुनिश्चित करे कि जनता को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें और शिकायतों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण हो। उन्होंने दोहराया कि जनहित के कार्यों में लापरवाही करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। जनसुनवाई के दौरान अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) ज्योति मौर्य, अपर जिलाधिकारी (भू-अर्जन) अवनीश सिंह, अपर जिलाधिकारी (नगर) विकास कश्यप, सिटी मजिस्ट्रेट सतीश चंद्र त्रिपाठी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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