संगीत हिंदी फिल्मों की आत्मा है. किसी फिल्म का म्यूजिक जितना ज्यादा हिट होगा, दर्शकों में फिल्म के प्रति दीवानगी उतनी ज्यादा देखने को मिलती है. सुपरहिट संगीत दर्शकों को सिनेमाघर तक खींच लाने में मदद करता है. म्यूजिकल फिल्मों का अपना एक अलग मुकाम है. फिल्म को हिट कराने में सुपरहिट म्यूजिक अहम रोल अदा करता है. बॉलीवुड की इतिहास में कई बार एक ही गाने में दो-दो सुरीली धुनें जोड़ी गईं. 16 साल के अंतराल में बनीं चार फिल्मों में यही पैटर्न नजर आया. चार ही फिल्मों में एक गाने में दो धुनें समाई हुई थीं. चारों ही फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर डंका बजा.
भारतीय संगीत में एक गाने में एक ही धुन का चलन ज्यादा है. हिंदी सिनेमा की ज्यादातर फिल्मों में इसी स्टाइल में गाने बनाए जाते हैं. कई संगीतकारों ने एक ही गाने में दो धुनों को मिला दिया. फिर जो गाना तैयार हुआ, उसने इतिहास रच दिया. 16 साल के अंतराल में चार फिल्मों के एक-एक गाने में यह पैटर्न आजमाया गया. दिलचस्प बात यह है कि सभी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल रहीं. इस तरह के पैटर्न पर गाने भी खूब पॉप्युलर हुए. ये फिल्में थीं : नमक हलाल, हिना, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे और कुछ कुछ होता है.
सबसे पहले बात करते हैं 30 अप्रैल 1982 को रिलीज हुई फिल्म ‘नमक हलाल’ की जिसका डायरेक्शन प्रकाश मेहरा ने किया था. फिल्म में अमिताभ बच्चन-स्मिता पाटिल, शशि कपूर-परवीन बॉबी लीड रोल में थे. वहीदा रहमान, ओम प्रकाश और रंजीत अहम भूमिकाओं में थे. मुहुर्त 1978 में हुआ था लेकिन शूटिंग 1980 के आसपास शुरू हुई. स्टोरी सुरेंद्र कौल ने स्क्रीनप्ले लक्ष्मीकांत शर्मा ने लिखा था. डायलॉग कादर खान ने लिखे थे. म्यूजिक बप्पी लहरी ने कंपोज किया था. ‘नमक हलाल’ शशि कपूर-अमिताभ बच्चन की साथ में आए आखिरी फिल्म थी. फिल्म का म्यूजिक ब्लॉकब्स्टर था.
फिल्म का एक गाना ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी..’ किशोर कुमार ने गाया था. गाना पूरे 9 मिनट का था. इस गाने में दो ट्यून सुनाई देती हैं. गाना एक दोहे ‘बुजुर्गों ने फरमाया कि पैरों पे अपने खड़े होकर दिखलाओ, फिर ये जमाना तुम्हारा है’ से शुरू होता है. गाना ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी..’ से शुरू होता है लेकिन बीच में ‘आप का तो लगता है बस यही सपना, राम नाम जपना पराया माल अपना’ गाने के धुन बिल्कुल अलग है. यानी एक ही गाने में दूसरी धुन सुनाई देती है. गाना प्रकाश मेहरा और अनजान ने गाना लिखा था. बप्पी लहरी की मां ने क्लासिकल अंदाज में गाने का मुखड़ा बनाया था. बप्पी लहरी ने इस गाने में डिस्को बीट जोड़ दी. ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी’ गाने को रिकॉर्ड करने में 3 दिन लगे थे. गाना तीन भाग में है. किशोर कुमार ने इस गाने में जो सरगम सुनाई देती है, उसे गाने से इनकार कर दिया था. सरगम सत्य नारायण मिश्रा की आवाज में है. गाना महबूब स्टूडियो में रिकॉर्ड हुआ था. ‘नमक हलाल’ ने 6 करोड़ का नेट कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी.
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यही पैटर्न मूवी 1991 में रिलीज ‘हिना’ मूवी में भी नजर आया था. राज कपूर ने अपने पुराने सहयोगी ख्वाजा अहमद अब्बास, जैनेंद्र जैन, हसीना मोईन और वीपी साठे से फिल्म की कहानी लिखवाई थी. संगीतकार रविंद्र जैन के साथ मिलकर तीन गाने भी रिकॉर्ड करवाए थे. 1988 में उनकी मौत के बाद उनके बेटे रणधीर कपूर ने फिल्म का डायरेक्शन किया. हिना मूवी में ऋषि कपूर, अश्विनी भावे और पाकिस्तानी एक्ट्रेस जेबा बख्तियार लीड रोल में थे. इसके अलावा, रजा मुराद, कुलभूषण खरबंदा, रीमा लागू, फरीदा जलाज और सईद जाफरी जैसे दिग्गज कलाकार भी नजर आए थे. शूटिंग मनाली, स्विटजरलैंड और ऑस्ट्रिया में हुई थी. फिल्म में गीत-संगीत रविंद्र जैन का था. म्यूजिक सुपरहिट रहा था. फिल्म के सुपरहिट गानों में ‘मैं हूं खुशरं हिना’ ‘देर ना हो जाए, कहीं देर ना हो जाए’, और ‘बेदर्दी तेरे प्यार ने दीवाना कर दिया’ जैसे सॉन्ग शामिल थे.
फिल्म का एक गाना ‘देर ना हो जाए, कहीं देर ना हो जाए’ आज भी उतना ही हिट है. इस गाने में दो धुनें सुनाई देती हैं. गाना ‘कब आओगे, कब आओगे’ से शुरू होता है. फिर ‘देर ना हो जाए कहीं देर ना हो जाए’ बजता है. बीच में जब ‘आजा रे माही तेरा रस्ता उडीक दिया’ बजता है तो गाने की धुन बिल्कुल बदल जाती है. यानी गाने के अंदर एक नई धुन सुनने को मिलती है. यह अनोखा प्रयोग था जिसे रविंद्र जैन ने आजमाया. ‘हिना’ फिल्म के बजट की बात करें तो यह 4 करोड़ रुपये के करीब था. इस फिल्म ने 12 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी.
90 के दशक में म्यूजिकल-रोमांटिक फिल्मों का दौर शुरू हुआ. संगीतकार नदीम-श्रवण, आनंद-मिलिंद और जतिन-ललित की जोड़ी पूरे दशक में छाई रही. इनमें जतिन-ललित का म्यूजिक मेलोडियस होने के साथ-साथ सबसे अनूठा था. उन्होंने दो बार ऐसा कारनामा किया. दो बार एक ही सॉन्ग में दो सुरीली धुनें जोड़ दीं. पहली बार यह कारनामा 20 अक्टूबर 1995 को रिलीज हुई ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ फिल्म में किया. इसी फिल्म ने शाहरुख खान-काजोल को रातोंरात सुपरस्टार बनाया. फिल्म में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों का गजब का संयोजन था. बतौर डायरेक्टर आदित्य चोपड़ा की यह पहली फिल्म थी. कहानी-स्क्रीनप्ले आदित्य चोपड़ा ने लिखा था. यश चोपड़ा प्रोड्यूसर थे. सदाबहार म्यूजिक जतिन-ललित ने ही कंपोज किया था. कुल 7 गाने फिल्म में रखे गए थे.
फिल्म का हर सीन आइकॉनिक, हर डायलॉग और हर गाना आइकॉनिक है फिल्म अपने समय से बहुत आगे की थी. इस फिल्म के एक गाने ‘हो गया है तुझको तो प्यार सजना’ में दो धुनें सुनाई देती हैं. गाना ‘ना जाने मेरे दिल को क्या हो गया, अभी तो यहीं था, अभी खो गया था’ से शुरू होता है. फिर अचानक गाने के अंदर ‘हो गया है तुझको तो प्यार सजना’ की धुन सुनाई देने लगती है और गाने का ट्रैक पूरी तरह से बदल जाता है. संगीतकार जतिन ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि दो धुनों को एकसाथ पिरोया गया था. यह अनोखा प्रयोग डायरेक्टर आदित्य चोपड़ा के कहने पर किया गया था. 4 करोड़ के बजट में बनी ‘डीडीएलजे’ ने 103 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. डीडीएलजे को एक नेशनल अवॉर्ड और 10 फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे.
संगीतकार जतिन-ललित ने इसी तरह का कारनामा अपनी एक और फिल्म ‘कुछ-कुछ होता है’ में भी दोहराया था. शाहरुख खान-काजोल और रानी मुखर्जी स्टारर यह फिल्म 16 अक्टूबर 1998 को रिलीज हुई थी. बतौर डायरेक्टर करण जौहर की यह पहली फिल्म थी. फिल्म की कहानी, स्टार कास्ट, गीत-संगीत, सिनेमेटोग्राफी सबकुछ परफेक्ट था. कहानी करण जौहर ने लिखी थी. प्रोड्यूसर उनके पिता यश जौहर थे. फिल्म का डिस्ट्रीब्यशन यशराज फिल्म्स के बैनर तले किया गया था. इस फिल्म का आधे से ज्यादा काम आदित्य चोपड़ा ने संभाला था. दरअसल यश चोपड़ा रिश्ते में करण जौहर रिश्ते के सगे मामा हैं. इस रिश्ते से आदित्य चोपड़ा और करण जौहर भाई-भाई हैं.
‘कुछ कुछ होता है’में जतिन-ललित ने ऐसा म्यूजिक दिया, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा. इस फिल्म का एक गाना ‘तेरे घर आया, मैं आया तुझको लेने’ असाधारण सॉन्ग था. इस गाने में भी दो धुनें सुनाई देती हैं. गाना सलमान खान और काजोल पर फिल्माया गया है. गाने की शुरुआत में सलमान खान ‘तेरे घर आया, मैं आया तुझको लेने’ लाइन गाते हैं. बीच में गाने की धुन तब अचानक बदल जाती है जब रीमा लागू ‘सवेरे चली जाएगी, तू बड़ा याद आएगी’ गाती हैं. करीब 10 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस मूवी ने 106 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक ऑल टाइम फिल्म साबित हुई थी. यह उस साल की सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाली फिल्म थी.
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