Poonia Family Service: कैंसर मरीजों और उनके परिजनों के लिए पूनिया परिवार इन दिनों मानवता और सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है. पिछले लगभग डेढ़ महीने से परिवार लगातार निःशुल्क छाछ और राबड़ी का वितरण कर रहा है, जिससे अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके साथ मौजूद परिजनों को राहत मिल रही है. गर्मी के मौसम में यह पहल लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. पूनिया परिवार का उद्देश्य जरूरतमंदों की सेवा करना और मरीजों को पौष्टिक एवं ठंडक पहुंचाने वाला आहार उपलब्ध कराना है. इस अभियान से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग लाभान्वित हो रहे हैं. स्थानीय स्तर पर परिवार के इस सामाजिक कार्य की सराहना की जा रही है और कई लोग इसे मानवता की सच्ची सेवा बता रहे हैं.
बीकानेर. भीषण गर्मी के इस दौर में जहां लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं, वहीं बीकानेर के रासीसर गांव का एक परिवार मानव सेवा की ऐसी मिसाल पेश कर रहा है, जिसकी हर कोई सराहना कर रहा है. रासीसर निवासी भारमल पूनिया और उनका परिवार पिछले करीब डेढ़ महीने से कैंसर हॉस्पिटल के आगे कैंसर मरीजों और उनके परिजनों को निःशुल्क छाछ और राबड़ी वितरित कर रहा है. उनकी यह सेवा न केवल मरीजों को गर्मी से राहत दे रही है, बल्कि उन्हें मानसिक संबल भी प्रदान कर रही है.
भीषण गर्मी के बीच रासीसर के पूनिया परिवार की यह पहल न केवल मानवता की मिसाल बन रही है, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे रही है कि सेवा और संवेदना से बढ़कर कोई धर्म नहीं होता. मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह परिवार उम्मीद और राहत का एक महत्वपूर्ण सहारा बन चुका है.
परिवार के साथ मिलकर यह सेवा कार्य शुरू किया
भारमल पूनिया ने बताया कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को गर्मी के मौसम में ठंडे और पौष्टिक पेय की आवश्यकता होती है. इसी भावना को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने परिवार के साथ मिलकर यह सेवा कार्य शुरू किया. प्रतिदिन घर पर ही छाछ और राबड़ी तैयार की जाती है, जिसे सुबह से दोपहर तक कैंसर अस्पताल के बाहर मरीजों और उनके परिजनों को वितरित किया जाता है.
ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ ऊर्जा भी
उन्होंने कहा कि छाछ और राबड़ी शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ ऊर्जा भी प्रदान करती है. कई मरीज और उनके परिजन इन पेयों को पीकर राहत महसूस करते हैं. पूनिया का कहना है कि कैंसर रोगियों के लिए यह किसी अमृत से कम नहीं है. जब मरीज भीषण गर्मी में ठंडी छाछ या राबड़ी पीते हैं तो उनके चेहरे पर जो संतोष दिखाई देता है, वही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बन जाता है.
पूरा परिवार भागीदारी निभा रहा
इस सेवा कार्य की खास बात यह है कि इसमें पूरा परिवार भागीदारी निभा रहा है. परिवार की बेटियां और बेटे सुबह से ही वितरण कार्य में जुट जाते हैं. घर पर सामग्री तैयार करने से लेकर अस्पताल पहुंचाकर वितरण करने तक की जिम्मेदारी परिवार के सदस्य मिलकर निभाते हैं. परिवार का मानना है कि समाज सेवा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि समय और श्रमदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
सामाजिक सेवा केवल कैंसर अस्पताल तक सीमित नहीं
भारमल पूनिया ने बताया कि उनकी सामाजिक सेवा केवल कैंसर अस्पताल तक सीमित नहीं है. वे हर अमावस्या को समराथल धोरा में आने वाले श्रद्धालुओं और राहगीरों के लिए भी निःशुल्क छाछ और नींबू पानी की व्यवस्था करते हैं. गर्मी के मौसम में वहां आने वाले लोगों को इससे काफी राहत मिलती है. इसके साथ ही लगभग 100 किलो राबड़ी का वितरण किया जाता है और जरूरतमंदों को भोजन भी कराया जाता है.
सेवा अभियान को लेकर परिवार में विशेष उत्साह रहता
उन्होंने बताया कि इस सेवा अभियान को लेकर परिवार में विशेष उत्साह रहता है. सभी सदस्य अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी जरूरतमंद को खाली हाथ न लौटना पड़े. उनका कहना है कि लोगों की दुआएं ही उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार हैं.
सेवा कार्य बारिश शुरू होने तक लगातार जारी रहेगा
पूनिया ने बताया कि यह सेवा कार्य बारिश शुरू होने तक लगातार जारी रहेगा. उनका उद्देश्य अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचकर उन्हें राहत प्रदान करना है. समाज के अन्य लोगों से भी उन्होंने अपील की कि वे अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएं.
About the Author
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



