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Ajit Doval Kirti Chakra Story: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पुरानी तस्वीर वायरल हो रही है. इसमें वह यंग IPS अधिकारी है जिसे सबसे कम उम्र में कीर्ति चक्र मिला था. यह तस्वीर है अजीत डोभाल की. 1968 बैच के केरल कैडर के इस अधिकारी ने खालिस्तानी आतंकवाद, मिजो विद्रोह और पाकिस्तान में अंडरकवर मिशन जैसे कई खतरनाक ऑपरेशन किए. 1988 के ऑपरेशन ब्लैक थंडर के दौरान उन्होंने पाकिस्तानी एजेंट बनकर गोल्डन टेंपल में प्रवेश किया था. उनकी बहादुरी और खुफिया रणनीतियों के कारण उन्हें भारत का ‘जेम्स बॉन्ड’ भी कहा जाता है. आज भी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में उनका नाम सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिना जाता है.
गोल्डन टेंपल ऑपरेशन और अंडरकवर मिशन के बाद अजीत डोभाल कीर्ति चक्र पाने वाले पहले IPS अधिकारी बने. (FB)
नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है. यह तस्वीर काफी पुरानी है. लेकिन ये तस्वीर जिनकी है उनकी कहानी हमेशा नई रहेगी. तस्वीर में दिख रहा यह चेहरा एक पूर्व IPS अधिकारी का है. यह अफसर भारत की खुफिया दुनिया के सबसे चर्चित और रहस्यमयी चेहरों में से एक है. ये हैं अजीत डोभाल. वही अजीत डोभाल जिन्हें भारत का ‘जेम्स बॉन्ड’ भी कहा जाता है. आतंकवाद, अंडरकवर ऑपरेशन और दुश्मन के बीच घुसकर मिशन पूरा करने की कहानियों ने उन्हें एक जीवित किंवदंती बना दिया. बहुत कम लोग जानते हैं कि डोभाल पहले ऐसे IPS अधिकारी थे जिन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया. यह ेसम्मान आमतौर पर सेना के जवानों को दिया जाता था. लेकिन डोभाल ने अपनी बहादुरी से वह इतिहास बदल दिया. पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद के दौर में गोल्डन टेंपल के अंदर घुसकर आतंकियों के बीच रहना कोई साधारण काम नहीं था. उस दौर में हर कदम मौत के साये में उठता था. लेकिन डोभाल ने वह कर दिखाया जिसे सुनकर आज भी लोग हैरान रह जाते हैं.
अजीत डोभाल की कहानी सिर्फ एक पुलिस अधिकारी की सफलता नहीं है. यह उस सोच की कहानी है जिसमें देश पहले आता है. 1968 बैच के केरल कैडर के IPS अधिकारी रहे डोभाल ने अपने करियर का बड़ा हिस्सा इंटेलिजेंस ब्यूरो में बिताया. पाकिस्तान में अंडरकवर मिशन से लेकर मिजो विद्रोह और खालिस्तानी आतंकवाद को कमजोर करने तक, उन्होंने कई ऐसे ऑपरेशन किए जिनकी चर्चा आज भी सुरक्षा हलकों में होती है. 1989 में उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया. उस समय उनकी उम्र करीब 44 साल थी. उन्हें यह सम्मान ऐसे ऑपरेशन के लिए मिला जिसमें उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर आतंकियों के नेटवर्क को तोड़ा. यही वजह है कि आज भी भारतीय सुरक्षा तंत्र में उनका नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है.
गोल्डन टेंपल ऑपरेशन ने बना दिया लीजेंड
- 1988 में पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद चरम पर था. गोल्डन टेंपल के अंदर आतंकियों ने अपना मजबूत ठिकाना बना लिया था. इसी दौरान अजीत डोभाल एक पाकिस्तानी एजेंट बनकर मंदिर परिसर में दाखिल हुए. आतंकियों को लगा कि वह ISI का आदमी है जो उनकी मदद करेगा. लेकिन असल में वह भारतीय खुफिया एजेंसी के सबसे खतरनाक मिशन पर थे. यही ऑपरेशन बाद में ‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ की सफलता की बड़ी वजह बना.
- अजीत डोभाल ने सिर्फ पंजाब में ही नहीं, बल्कि मिजोरम में भी बड़ा रोल निभाया. बताया जाता है कि उन्होंने मिजो नेशनल फ्रंट के भीतर घुसकर कई कमांडरों को भारत सरकार के पक्ष में किया. इसके बाद 1986 का ऐतिहासिक मिजो समझौता संभव हो पाया. यही कारण है कि उन्हें भारत के सबसे सफल अंडरकवर ऑपरेटिव्स में गिना जाता है.
- डोभाल पाकिस्तान में भारतीय मिशन में भी तैनात रहे. वहां उन्होंने अलगाववादी गतिविधियों और भारत विरोधी नेटवर्क पर नजर रखी. उनकी पहचान ऐसे अधिकारी की रही जो दुश्मन के इलाके में जाकर भी मिशन पूरा करने की क्षमता रखते थे. कई रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि उनकी रणनीति और नेटवर्किंग क्षमता ने भारत की सुरक्षा नीति को नई दिशा दी.
कीर्ति चक्र पाने वाले पहले IPS अधिकारी
1989 में अजीत डोभाल को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया. यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है. उनसे पहले यह सम्मान मुख्य रूप से सैन्य अधिकारियों को मिलता था. डोभाल पहले पुलिस अधिकारी बने जिन्हें यह सम्मान मिला. यह उनके साहस और खुफिया ऑपरेशनों की बड़ी उपलब्धि मानी जाती है.
आज भी सुरक्षा नीति के सबसे बड़े चेहरे
अजीत डोभाल वर्तमान में भारत के सबसे प्रभावशाली सुरक्षा रणनीतिकारों में गिने जाते हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार यानी NSA के रूप में उन्होंने कई बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाई. सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर आतंकवाद विरोधी रणनीतियों तक, उनका नाम हमेशा चर्चा में रहा है.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें
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