भारत में सर्किट हाउस और गेस्ट हाउस दोनों ही ठहरने की जगहें हैं, लेकिन इनके उद्देश्य, इतिहास और इनमें रुकने वाले लोगों के अधिकार में काफी बड़ा अंतर होता है.
क्या होता है सर्किट हाउस
सर्किट हाउस ब्रिटिश जमाने यानि औपनिवेशिक काल से चली आ रही एक प्रशासनिक व्यवस्था है. पुराने समय में जब जज या कलेक्टर अपने प्रशासनिक क्षेत्र यानि सर्किट का दौरा करने निकलते थे तो उनके रुकने के लिए जिले के मुख्यालय में एक खास जगह बनाई जाती थी. जिसे ‘सर्किट हाउस’ कहा जाता था.
ये पूरी तरह से राज्य या केंद्र सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग या लोक निर्माण विभाग के अधीन होते हैं. ये मुख्य रूप से माननीय राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रियों, न्यायाधीशों और सीनियर आईएएस या आईपीएस अधिकारियों के लिए रिजर्व होते हैं.
कोलोनियल स्टाइल में भारत का एक पुराना सर्किट हाउस (AI Photo)
यहां रुकने के लिए कड़ा प्रोटोकॉल होता है. जिले के जिलाधिकारी की अनुमति या उनके कार्यालय के आदेश के बिना यहां किसी को कमरा अलॉट नहीं किया जा सकता. आम जनता या सामान्य पर्यटकों के लिए यहां एंट्री लगभग नामुमकिन होती है.
क्या होता है गेस्ट हाउस
गेस्ट हाउस सरकारी भी होते हैं और प्राइवेट भी. कई सरकारी विभाग जैसे सिंचाई विभाग, वन विभाग, रेलवे या बिजली बोर्ड अपने कर्मचारियों और अधिकारियों के दौरों के लिए अपने अलग ‘विभागीय गेस्ट हाउस’ या ‘रेस्ट हाउस’ बनाते हैं. निजी और कार्मशियल गेस्ट हाउस भी होते हैं. ये प्राइवेट व्यक्ति या कंपनी चला सकती है, जो होटल की तरह ही काम करता है. इसका माहौल थोड़ा घरेलू और बजट फ्रेंडली होता है.
वन विभाग के नियंत्रण में आने वाले रेस्ट हाउस जंगलों, नेशनल पार्कों और वन्यजीव अभ्यारण्यों के अंदर या उनके बेहद करीब होते हैं. यहां मुख्य रूप से फॉरेस्ट अफसरों (IFS) और रिसर्च करने वालों को जगह मिलती है. वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह रुकने की सबसे शानदार और शांत जगह मानी जाती है.
सरकारी गेस्ट हाउस में उस विशेष विभाग के कर्मचारियों को प्राथमिकता मिलती है, लेकिन खाली होने पर अन्य सरकारी कर्मचारियों या कभी-कभी आम जनता को भी शुल्क के साथ कमरा मिल जाता है. प्राइवेट गेस्ट हाउस को तो कोई भी व्यक्ति पैसे देकर ऑनलाइन या ऑफलाइन बुक कर सकता है. यूरोप और ब्रिटेन में गेस्ट हाउस बहुत लोकप्रिय हैं.
साउथ अफ्रीका में बना हुआ एक सर्किट हाउस (AI Photo)
और किन देशों में होते हैं सर्किट हाउस
चूंकि ‘सर्किट हाउस’ और ‘सरकारी गेस्ट हाउस’ जैसी व्यवस्था मुख्य रूप से ब्रिटिश प्रशासनिक प्रणाली की देन है, इसलिए इसका सबसे ज़्यादा असर उन देशों में दिखता है जो कभी ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा थे. भारतीय उपमहाद्वीप के पड़ोसी देशों और कुछ अफ्रीकी देशों में आज भी ‘सर्किट हाउस’ शब्द और व्यवस्था वैसी ही है जैसी भारत में है. वैसे मूल ब्रिटेन या अमेरिका जैसे देशों में आज ‘सर्किट हाउस’ नाम की कोई सरकारी इमारत नहीं होती. पुराने समय में ब्रिटेन में भी ‘सर्किट कोर्ट’ होते थे, जहां जज एक इलाके से दूसरे इलाके में यात्रा करके न्याय करते थे.
होता था डाक बंगला और इंस्पेक्शन बंगलो भी
ये भी ब्रिटिश काल की व्यवस्था है. मुख्य रूप से लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग के पास ये बंगले होते हैं. जब अफसर सड़कों, पुलों या नहरों के निरीक्षण के लिए ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में जाते हैं, तो उनके रुकने के लिए ये बनाए जाते हैं.
आज भी ग्रामीण इलाकों में बुजुर्ग लोग किसी भी सरकारी विश्राम गृह या सर्किट हाउस को सामान्य बोलचाल में ‘डाक बंगला’ ही कह देते हैं, क्योंकि आज़ादी से पहले इन जगहों का इस्तेमाल डाक लाने-ले जाने वाले हरकारों और अफसरों के विश्राम के लिए होता था.
भारत में 1840 की दशक में पहले डाक बंगले बनाए गए. ये पहले डाकियों के ठहरने की जगह थी. फिर इसे बेहतर करके अफसरों के ठहरने के बंगलों में तब्दील कर दिया गया.
स्टेट गेस्ट हाउस क्या होते हैं
जब किसी राज्य के मुख्यमंत्री, मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी देश की राजधानी या किसी दूसरे बड़े राज्य के दौरे पर जाते हैं, तो उनके लिए विशेष व्यवस्था होती है, वो स्टेट गेस्ट हाउस में रुकते हैं. कई राज्यों में राज्यों ने अपने अपने गेस्ट हाउस बना रखे हैं.
इसी तरह दिल्ली के चाणक्यपुरी और मंडी हाउस इलाके में लगभग हर राज्य का अपना एक ‘भवन’ है, जैसे- यूपी भवन, बिहार निवास, महाराष्ट्र सदन. यहां उस राज्य के मंत्रियों और अफसरों के रुकने की बेहतरीन व्यवस्था होती है.
रेलवे रिटायरिंग रूम और डॉर्मिटरी
यह देश के लगभग सभी बड़े रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध होता है. यह व्यवस्था आम जनता के लिए भी है. अगर आपके पास एक कन्फर्म या आरएसी टिकट है, तो आप बहुत ही कम कीमत पर स्टेशन के अंदर बने इन कमरों या डॉर्मिटरी को IRCTC के जरिए बुक कर सकते हैं.
ऑफिसर्स मेस और सर्विंग ऑफिसर्स एन्क्लेव
थल सेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारियों के लिए मिलिट्री स्टेशनों और छावनियों में ‘मेस’ होती है. जब अधिकारी ट्रांसफर या ड्यूटी के सिलसिले में सफर करते हैं, तो वे अपनी रैंक के हिसाब से आर्मी मेस में रुकते हैं.
बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी सर्किट हाउस
बांग्लादेश और पाकिस्तान में आज भी ‘सर्किट हाउस’ पूरी तरह सक्रिय हैं. भारत की तरह ही ये जिला मुख्यालयों में होते हैं. इनका प्रबंधन जिला प्रशासन करता है. ये मंत्रियों, जजों व सीनियर सरकारी अधिकारियों के लिए आरक्षित होते हैं. ।
जापान में पारंपरिक गेस्ट हाउस को ‘मिनशुकु’ कहा जाता है. यह कम बजट वाले पर्यटकों के लिए स्थानीय जापानी परिवारों द्वारा चलाए जाने वाले घरेलू गेस्ट हाउस होते हैं, जहां आपको जापानी संस्कृति को करीब से देखने का मौका मिलता है.
भारत का सबसे पुराना सर्किट हाउस
राजस्थान के अजमेर का सर्किट हाउस भारत के सबसे चर्चित और पुराने सर्किट हाउसों में एक है. इसका निर्माण 19वीं सदी के अंत (1800 के अंत) में हुआ था. चूंकि अजमेर सीधे ब्रिटिश शासन के अधीन था. राजपूताना की रियासतों के बीच उनका मुख्य प्रशासनिक केंद्र था, इसलिए आना सागर झील के किनारे पहाड़ी पर बना यह सर्किट हाउस भारत के सबसे शुरुआती भव्य सर्किट हाउसों की श्रेणी में आता है.
भारत में ‘सर्किट’ व्यवस्था की शुरुआत लॉर्ड कॉर्नवॉलिस के समय 1793 में प्रांतीय सर्किट अदालतों के गठन के साथ हुई थी. शुरुआत में अंग्रेज अधिकारी स्थानीय राजाओं के महलों, टेंटों या डाक बंगलों में रुकते थे. 1857 की क्रांति के बाद जब शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के हाथ में आया, तब अधिकारियों की सुरक्षा और कड़े प्रोटोकॉल के लिए हर जिले में व्यवस्थित रूप से पक्के ‘सर्किट हाउस’ बनाने की नीति शुरू की गई.
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