-घबराहट नहीं, दीर्घकालिक सोच बनाती है निवेशकों को आर्थिक रूप से मजबूत : रविंद्र तिवारी
-बैंक जमा से आगे बढ़कर इक्विटी और म्यूचुअल फंड में अवसर तलाशने की जरूरत
उदय भूमि संवाददाता
दिल्ली। निवेश की दुनिया में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। जो निवेशक धैर्य, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के साथ लंबे समय तक अपने निवेश को बनाए रखते हैं, वही भविष्य में मजबूत आर्थिक संपत्ति का निर्माण कर पाते हैं। यह विचार प्रसिद्ध वित्तीय सलाहकार रविंद्र तिवारी ने निवेशकों के लिए जारी अपनी विशेष टिप्पणी में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज के दौर में बाजार की छोटी-मोटी हलचलों और अफवाहों से प्रभावित होकर लिए गए फैसले निवेशकों के दीर्घकालिक लक्ष्यों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रविंद्र तिवारी ने कहा कि निवेश के क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती बाजार की अस्थिरता नहीं, बल्कि निवेशकों का अधैर्य है। अक्सर लोग बाजार में गिरावट आते ही घबरा जाते हैं और अपने निवेश को बीच में ही रोक देते हैं। जबकि इतिहास गवाह है कि जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखा, उन्हें समय के साथ बेहतर परिणाम प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि बाजार में पैसा कमाने का सबसे प्रभावी तरीका समय निकालना नहीं, बल्कि लंबे समय तक निवेश में बने रहना है।
उन्होंने वित्तीय सलाहकार और चिकित्सक की भूमिका की तुलना करते हुए कहा कि जिस प्रकार एक ईमानदार चिकित्सक अपने मरीज के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए लगातार उपचार और निगरानी करता है, उसी प्रकार एक जिम्मेदार वित्तीय सलाहकार भी अपने ग्राहक के निवेश की समय-समय पर समीक्षा करता है। उसका उद्देश्य केवल निवेश करवाना नहीं होता, बल्कि निवेशक के आर्थिक भविष्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाना होता है। इसलिए निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार की सलाह पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। रविंद्र तिवारी ने कहा कि हाल के महीनों में अमेरिका-ईरान तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के कारण शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इसके बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। सेंसेक्स और अन्य प्रमुख सूचकांक गिरावट से उबरकर फिर से मजबूत स्थिति में पहुंच गए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि बाजार अल्पकाल में भले ही अस्थिर दिखाई दे, लेकिन दीर्घकाल में धैर्यवान निवेशकों को अच्छा प्रतिफल देता है।
उन्होंने अपने पूर्वानुमान का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ समय पहले ही उन्होंने निवेशकों को संकेत दिया था कि सोना, चांदी और रियल एस्टेट में तेज वृद्धि का बड़ा दौर काफी हद तक निकल चुका है। उस समय भी निवेशकों को धीरे-धीरे इक्विटी और म्यूचुअल फंड की ओर बढऩे की सलाह दी गई थी। आज भी उनका मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए शेयर बाजार और व्यवस्थित निवेश योजनाएं बेहतर अवसर प्रदान कर सकती हैं। वित्तीय सलाहकार ने बैंक जमा योजनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में अधिकांश बैंकों में सावधि जमा पर ब्याज दरें लगभग 6.25 से 6.85 प्रतिशत के बीच हैं। हालांकि कर और मुद्रास्फीति को ध्यान में रखने के बाद वास्तविक लाभ काफी कम रह जाता है। ऐसे में केवल बैंक जमा के भरोसे दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण करना कठिन हो सकता है। उनका कहना है कि निवेश का उद्देश्य केवल पूंजी को सुरक्षित रखना नहीं, बल्कि उसकी क्रय शक्ति को भी बढ़ाना होना चाहिए।
रविंद्र तिवारी के अनुसार यदि कोई निवेश मुद्रास्फीति को पीछे छोड़ते हुए अगले पांच वर्षों में अतिरिक्त वास्तविक वृद्धि प्रदान कर रहा है, तो उसे उत्कृष्ट निवेश माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय इक्विटी बाजार ने लंबे समय में आकर्षक प्रतिफल दिए हैं और कई अच्छे म्यूचुअल फंडों ने 12 से 15 प्रतिशत तक वार्षिक प्रतिफल देने की क्षमता दिखाई है। उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि वे नियमित निवेश योजनाएं जारी रखें, बाजार की गिरावट के समय घबराहट में निर्णय न लें, अपने निवेश की समय-समय पर समीक्षा कराएं और कम से कम पांच से दस वर्षों का निवेश दृष्टिकोण अपनाएं।
उन्होंने कहा कि अनुशासित निवेश, सही परिसंपत्ति आवंटन और विशेषज्ञ सलाह के साथ कोई भी व्यक्ति अपने वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है। अंत में रविंद्र तिवारी ने कहा कि जैसे एक चिकित्सक शरीर को स्वस्थ रखने का प्रयास करता है, वैसे ही एक ईमानदार वित्तीय सलाहकार आपके आर्थिक भविष्य को सुरक्षित बनाने का कार्य करता है। दोनों पर विश्वास, धैर्य और अनुशासन जरूरी है। उनका स्पष्ट संदेश था कि बाजार में संपत्ति बनाने का रहस्य जल्दबाजी में नहीं, बल्कि समय के साथ निवेश को बढऩे देने में छिपा है। यही दीर्घकालिक सफलता और आर्थिक समृद्धि की सबसे मजबूत नींव है।
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