-सोमवती अमावस्या पर सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन, रक्षपाल भैरवनाथ से की गई तीर्थयात्रियों की सुख-समृद्धि की प्रार्थना
-31 विद्वान ब्राह्मणों ने दीं वैदिक आहुतियां, देश-दुनिया में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक जागृति का किया आह्वान
-केदारनाथ की आध्यात्मिक परंपरा का अद्भुत स्वरूप, श्रद्धालुओं और तीर्थ पुरोहितों की मौजूदगी में हुआ भव्य अनुष्ठान
उदय भूमि संवाददाता
रुद्रप्रयाग। देवभूमि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री केदारनाथ धाम में सोमवार को सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर सोमवार को विश्व शांति, मानव कल्याण और समस्त सृष्टि के मंगल की कामना के साथ भगवान भैरवनाथ का भव्य वैदिक हवन एवं यज्ञ सम्पन्न हुआ। हिमालय की दिव्य वादियों के बीच वैदिक मंत्रोच्चार और हवन की पवित्र आहुतियों से संपूर्ण केदारपुरी आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठी। इस अवसर पर देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं, तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय लोगों ने यज्ञ में सहभागिता कर विश्व कल्याण की कामना की। केदारनाथ धाम में आयोजित यह धार्मिक अनुष्ठान सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा माना जाता है। मान्यता है कि भगवान भैरवनाथ केदारनाथ धाम के रक्षपाल हैं और उनकी कृपा से सम्पूर्ण केदारघाटी की रक्षा होती है। इसी आस्था और परंपरा के तहत प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की सोमवती अमावस्या को यह विशेष यज्ञ आयोजित किया जाता है, जिसमें मानव समाज की सुख-शांति, प्राकृतिक संतुलन और विश्व मंगल के लिए प्रार्थना की जाती है।
इस वर्ष आयोजित भैरवनाथ यज्ञ में मुख्य यजमान के रूप में श्री केदार सभा के अध्यक्ष पंडित राजकुमार तिवारी तथा बद्री-केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विजय कपरूवान उपस्थित रहे। वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार सम्पन्न हुए इस अनुष्ठान में आचार्य संजय तिवारी एवं ब्रह्मा जमलोकी जी के नेतृत्व में 31 विद्वान ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रों के साथ आहुतियां अर्पित कीं। यज्ञ के दौरान भगवान भैरवनाथ से सम्पूर्ण विश्व में शांति स्थापित करने, प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा करने तथा देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा को सुरक्षित और मंगलमय बनाने की कामना की गई।
श्री केदार सभा के मीडिया प्रभारी एवं प्रवक्ता पंडित पंकज शुक्ला ने बताया कि भैरवनाथ हवन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सनातन परंपरा की जीवंत धरोहर है। यह आयोजन अनादिकाल से केदारनाथ धाम में होता चला आ रहा है और तीर्थ पुरोहितों द्वारा विश्व शांति एवं मानव कल्याण के उद्देश्य से इसका निर्वहन किया जाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब ऐसे आध्यात्मिक अनुष्ठान समाज में सकारात्मक ऊर्जा और मानवता के प्रति विश्वास को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
यज्ञ के दौरान केदारनाथ धाम का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रों के बीच हवन में सहभागिता कर अपने परिवार, समाज और राष्ट्र की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। हिमालय की गोद में स्थित इस पवित्र धाम में सम्पन्न हुए अनुष्ठान ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और आस्था का विशेष अनुभव कराया। कार्यक्रम में श्री केदार सभा के अध्यक्ष पंडित राजकुमार तिवारी, उपाध्यक्ष विष्णुकांत कुर्माचली, महामंत्री डॉ. राजेन्द्र प्रसाद तिवारी, मंत्री अंकित सेमवाल, ब्लॉक प्रमुख एवं केदार सभा प्रवक्ता पंकज शुक्ला, कोषाध्यक्ष प्रवीण चंद्र तिवारी, आचार्य संतोष त्रिवेदी, बद्री-केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विजय कपरूवान, मंदिर प्रभारी अधिकारी बिपिन चंद्र तिवारी, मंदिर पुजारी गंगाधर लिंग, आचार्य नवीन शुक्ला, आचार्य रोशन लाल सहित बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहित, स्थानीय व्यापारी और देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु मौजूद रहे। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सनातन परंपराएं केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सम्पूर्ण मानवता के कल्याण, विश्व बंधुत्व और शांति की भावना को भी सशक्त बनाती हैं। केदारनाथ धाम में सम्पन्न भैरवनाथ महायज्ञ इसी महान सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।
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