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नई दिल्ली6 मिनट पहले

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भारतीय सेना ने जवानों की यूनिफॉर्म से गुलामी के दौर की निशानियों को हटा दिया है। 174 पेज की नई ‘आर्मी यूनिफॉर्म-2026’ बुक में कॉलोनियल एरा के नियमों में भी बदलाव किया है। सेना का कहना है कि ये बदलाव भारत की संप्रभु पहचान और राष्ट्रीय भावना के मुताबिक किए गए हैं।

नए नियमों में रिव्यूइंग ऑफिसर के लिए परेड में तलवार रखना वैकल्पिक कर दिया गया है। वहीं, कुछ मैस ड्रेस के साथ इस्तेमाल होने वाली पाउच बेल्ट हटाई गई है। इसके साथ ही रॉयल जैसे पुराने शब्दों का इस्तेमाल बंद किया गया है।

पहली बार फॉर्मल सिविल ड्रेस में स्वदेशी बंदी जैकेट को भी शामिल किया गया है। बंद गले वाली बंदी जैकेट को फुल स्लीव शर्ट, फॉर्मल ट्राउजर और बंद जूतों के साथ पहना जा सकेगा।

सेना इससे पहले फरवरी 2023 में भी कई पुरानी परंपराएं खत्म कर चुकी है। इनमें समारोहों में घोड़ा-गाड़ी का इस्तेमाल, रिटायरमेंट के दौरान ‘पुल आउट’ इवेंट और डिनर में पाइप बैंड की परंपरा शामिल थी।

यूनिफॉर्म बुक में दिए गए बड़े बदलाव

  • सभी रैंकों के लिए नई विंटर ड्रेस 3B शुरू की गई है। इसमें अंगोला शर्ट, बैटल जैकेट और बेरेट शामिल हैं।
  • महिला अधिकारी सादे रंग की साड़ी पहन सकती हैं। दुपट्टे के साथ कुर्ता-सलवार और एंकल-लेंथ स्ट्रेट पैंट पहन सकती हैं। स्लीवलेस कुर्ते, पलाजो और सिगरेट पैंट अलाउ नहीं है।
  • महिला सैनिक-अफसर लिपस्टिक, रंगीन नेल पॉलिश, बिंदी, नोज पिन नहीं पहन सकेंगी। सिंदूर लगाने की परमिशन है, लेकिन वह बेरेट या पीक कैप पहनने पर दिखाई नहीं देना चाहिए।
  • पूजा के दिन कलाई पर एक पवित्र धागे को छोड़कर कोई ब्रेसलेट नहीं पहना जा सकता। सिख सैनिकों को छोड़कर दूसरे सैनिक धार्मिक चिन्ह पहनने की परमिशन नहीं है।
  • मूंछों की लंबाई 12 सेंटीमीटर से ज्यादा नहीं हो सकती। यूनिफॉर्म में डिओ और परफ्यूम नहीं लगा सकेंगे। हालांकि आफ्टर-शेव लोशन यूज कर सकते हैं।

तलवार का इस्तेमाल भी लिमिटेड किया गया

नए नियमों के मुताबिक अब तलवार केवल परेड कमांडर, कंटिंजेंट कमांडर और कुछ निर्धारित अधिकारी ही रख सकेंगे। खास तौर पर गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, सेना दिवस और गार्ड ऑफ ऑनर जैसे प्रमुख समारोहों में इसका इस्तेमाल किया जाएगा। नई गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है किक रिव्यूइंग ऑफिसर परेड के दौरान तलवार नहीं रखेंगे।

सेना ने कहा है कि इन बदलावों का मकसद परंपराओं को खत्म करना नहीं, बल्कि गुलामी के दौर के बचे हुए प्रतीकों को आधुनिक भारतीय सोच के अनुरूप बनाना है।

बिना परमिशन शादी-पार्टी और प्रदर्शनों में यूनिफॉर्म पहनने पर रोक

मैनुअल में पर्सनल अपीयरेंस, मिलिट्री बिहेवियर और यूनिफॉर्म में कंडक्ट पर भी पूरी गाइडलाइन दी गई हैं। इसके अनुसार सैनिकों के बिना परमिशन दाढ़ी रखना, ऊट-पटांग हेयरस्टाइल, दिखने वाले इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, टैटू, बॉडी पियर्सिंग और मेकअप पर बैन रहेगा।

साथ ही सेना से जुड़े अधिकारियों और जवानों को परमिशन नहीं होगी कि कि वे बिना इजाजत के पॉलिटिकल, धार्मिक या प्रोटेस्ट गैदरिंग, शादियों, प्राइवेट पार्टियों और पेड मीडिया इवेंट में यूनिफॉर्म पहनकर जाएं।

इसी साल 246 सड़कों, इमारतों के भी नाम बदले

इस साल की शुरुआत में, इंडियन आर्मी ने अपने सभी ठिकानों पर 246 सड़कों, इमारतों और सुविधाओं का नाम बदलकर औपनिवेशिक दौर की विरासत को खत्म करने की एक बड़ी पहल की। ​​इस कदम का मकसद भारत के अपने इतिहास, माहौल और मिलिट्री परंपराओं में निहित एक संस्थागत पहचान को मज़बूत करना है, साथ ही देश के वीरता पुरस्कार विजेताओं, युद्ध नायकों और जाने-माने मिलिट्री लीडरों का सम्मान करना है।

इंडियन आर्मी के अधिकारियों के मुताबिक, इस एक्सरसाइज में 124 सड़कें, 77 कॉलोनियां, 27 इमारतें और दूसरी मिलिट्री सुविधाएं, और 18 अलग-अलग सुविधाएं शामिल थीं। इनमें पार्क, ट्रेनिंग एरिया, खेल के मैदान, गेट और हेलीपैड शामिल थे।

दिल्ली कैंट में किर्बी प्लेस का नाम केनुगुरुसे विहार और मॉल रोड का नाम अरुण खेत्रपाल मार्ग रखा गया। इसी तरह अंबाला, मथुरा, जयपुर, बरेली, महू, देहरादून और कोलकाता समेत कई सैन्य प्रतिष्ठानों में ब्रिटिश काल के नाम बदले गए।

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सेना ने कॉम्बैट यूनिफॉर्म का पेटेंट कराया: नकल की तो जुर्माना, केस भी चलेगा; जनवरी में लाया गया था

भारतीय सेना ने 2025 में अपने नए कोट कॉम्बैट के डिजाइन (डिजिटल प्रिंट) का पेटेंट करा लिया था। यानी कोई बिना सेना की अनुमति के इस डिजाइन का यूनिफॉर्म न तो बना सकेगा न बेच सकेगा, न उपयोग कर सकेगा। ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई और जुर्माना होगा।

सेना ने जनवरी 2025 में नया कॉम्बैट यूनिफॉर्म को पेश किया था। यह तीन-लेयर वाली यूनिफॉर्म सैनिकों के लिए हर मौसम में आरामदायक है। पढ़ें पूरी खबर…

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