PK Shahi resigns: पूर्व मुखमंत्री नीतीश कुमार के करीबी रहे बिहार सरकार के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) पी के शाही ने अपने पद का परित्याग कर दिया है. उनके इस्तीफे के बाद अब राज्य सरकार जल्द नए महाधिवक्ता की नियुक्ति करेगी. बता दें कि पीके शाही लंबे समय तक पटना हाई कोर्ट में बिहार सरकार का पक्ष रखते रहे और इससे पहले नीतीश कुमार सरकार में शिक्षा मंत्री सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभा चुके हैं.
एडवोकेट जनरल पीके शाही ने पद से् इस्तीफा दिया.
बिहार सरकार के साथ लंबा और गहरा नाता
वरिष्ठ अधिवक्ता पीके शाही का बिहार सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ बेहद पुराना और गहरा रिश्ता रहा है. वह बिहार के उन चुनिंदा कानूनी दिग्गजों में गिने जाते हैं जिन्होंने कानूनी दांवपेच के साथ-साथ राजनीति के मैदान में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है. इससे पहले पीके शाही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कैबिनेट में बिहार के शिक्षा मंत्री, पर्यावरण मंत्री और योजना विकास मंत्री जैसी अहम जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं. उन्होंने राजनीति से जब संन्यास लिया और मंत्री पद मुक्त हुए तो इसके तुरंत बाद उन्होंने दोबारा पटना हाईकोर्ट में अपनी वकालत शुरू कर दी थी और बीते कई वर्षों से सरकार के लिए पटना हाई कोर्ट में कई लड़ाइयां लड़ीं.
16 जनवरी 2023 को संभाली थी दोबारा कमान
बता दें कि पीके शाही को 16 जनवरी 2023 को बिहार सरकार का महाधिवक्ता नियुक्त किया गया था. तत्कालीन महाधिवक्ता ललित किशोर के इस्तीफे के बाद नीतीश सरकार ने एक बार फिर अपने सबसे भरोसेमंद और वरिष्ठ कानूनी सलाहकार पीके शाही भरोसा जताया था. इसके बाद से वह लगातार पटना हाईकोर्ट में राज्य सरकार के सबसे बड़े कानूनी अधिकारी के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे. उनके कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार ने अदालत में कई महत्वपूर्ण और जटिल कानूनी लड़ाइयां जीतीं.
नीतीश सरकार के पहले कार्यकाल में भी रहे एडवोकेट जनरल
यह पहली बार नहीं था जब पीके शाही को इतनी बड़ी संवैधानिक जिम्मेदारी मिली थी. इससे पहले जब साल 2005 में नीतीश कुमार पहली बार पूर्ण रूप से बिहार के मुख्यमंत्री बने थे, तब भी पीके शाही ही राज्य के महाधिवक्ता बनाए गए थे. साल 2005 से लेकर 2010 तक महाधिवक्ता के रूप में उनका पहला कार्यकाल बेहद शानदार और बेदाग रहा था. 2010 में नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में पी. के. शाही को शिक्षा, पर्यावरण और योजना जैसे अहम विभागों का मंत्री बनाया गया था. नीतीश कुमार के बेहद करीबी रहे पी के शाही ने वर्ष 2013 में जदयू के टिकट पर महाराजगंज लोकसभा सीट से उप चुनाव भी लड़ा था, लेकिन आरजेडी के प्रत्याशी से हार गए थे. इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति को छोड़ दिया, लेकिन उनके ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए साल 2023 में नीतीश सरकार ने उन्हें दोबारा एडवोकेट जनरल के पद की कमान सौंपी गई थी.
नए महाधिवक्ता की रेस हुई तेज
पीके शाही के अचानक पद छोड़ने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिहार का अगला महाधिवक्ता कौन होगा? सूत्रों के अनुसार, राज्य का विधि विभाग नए एडवोकेट जनरल की नियुक्ति के लिए फाइलों को तेजी से आगे बढ़ा रहा है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत राज्यपाल द्वारा नए महाधिवक्ता की नियुक्ति की अधिसूचना जल्द ही जारी की जा सकती है. इस रेस में पटना हाईकोर्ट के कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नामों पर मंथन चल रहा है.
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