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Bahraich News: संगीता देवी बताती है कि जब वह समूह से जुड़ीं, तब उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि कौन सा काम किया जाए. समूह की दीदियों और अधिकारियों ने उन्हें रोजगार से जुड़ी ट्रेनिंग दी और कारोबार करने के तरीके समझाए. इसके बाद उन्होंने अलग-अलग कामों के साथ दाल की बड़ी बनाने का काम शुरू किया. आज वह खबहा और धोई उड़द दाल की बड़ी बनाकर बेचती है और अच्छा मुनाफा कमा रही है.

बहराइच: कभी बेरोजगारी और आर्थिक तंगी से जूझ रही एक महिला ने स्वयं सहायता समूह का साथ पाकर अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी. समूह से मिली ट्रेनिंग और प्रोत्साहन के बाद उन्होंने घर से ही दाल की बड़ी बनाने का कारोबार शुरू किया. आज उनकी बनाई बड़ी की मांग दूर-दूर तक है और इससे उन्हें अच्छी आमदनी भी हो रही है. ये कहानी है बहराइच जिले के ताजपुर गांव की संगीता देवी की. जिसने हुनर सीखकर अपना जीवन बदल डाली.

प्रदेशभर में स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं न सिर्फ अपना हुनर निखार रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर नई मिसाल भी पेश कर रही हैं. इसी कड़ी में बहराइच जिले के छोटे से गांव ताजपुर की रहने वाली संगीता देवी आज समूह की सदस्य बनकर खुद का रोजगार चला रही है और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.

समूह ने दिखाया रास्ता
संगीता देवी बताती है कि जब वह समूह से जुड़ीं, तब उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि कौन सा काम किया जाए. समूह की दीदियों और अधिकारियों ने उन्हें रोजगार से जुड़ी ट्रेनिंग दी और कारोबार करने के तरीके समझाए. इसके बाद उन्होंने अलग-अलग कामों के साथ दाल की बड़ी बनाने का काम शुरू किया. आज वह खबहा और धोई उड़द दाल की बड़ी बनाकर बेचती है और अच्छा मुनाफा कमा रही है.

इस तरह तैयार होती है बड़ी
संगीता देवी के अनुसार बड़ी बनाना कोई मुश्किल काम नहीं है, बस इसे सही तरीके से सीखने की जरूरत होती है. उन्होंने यह कौशल समूह के माध्यम से सीखा और उनका मानना है कि कोई भी इसे सीख सकता है. बड़ी बनाने के लिए पहले खबहा मंगाकर उसका ऊपर का छिलका उतार लिया जाता है. फिर उसे कद्दूकस किया जाता है. इसके बाद बाजार से या घर पर उपलब्ध भीगी हुई उड़द धोई दाल को पीसकर इसमें मिलाया जाता है. फिर मसाला, मिर्च और नमक स्वादानुसार डालकर इस मिश्रण को अच्छी तरह तैयार किया जाता है. तैयार मिश्रण को एक पन्नी पर छोटे-छोटे आकार में चुआ लिया जाता है और धूप में सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है. धूप में अच्छी तरह सूख जाने के बाद इनकी पैकिंग कर ली जाती है और फिर बिक्री के लिए भेज दिया जाता है.

बड़ी को लंबे समय तक सुरक्षित
संगीता देवी छोटे पैकेट के साथ-साथ बड़े आकार की बड़ी भी बनाती हैं. उनका कहना है कि बड़े आकार की एक बड़ी पर लगभग 2 रुपये का खर्च आता है, जबकि बाजार में यह आसानी से 5 रूपये में बिक जाती है. इस तरह उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती है. घर का खर्च आराम से चल जाता है और कहीं बाहर जाने की जरूरत भी नहीं पड़ती. बड़ी को लंबे समय तक सुरक्षित रखकर सालों तक इस्तेमाल किया जा सकता है.

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Manish Rai

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें

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