अब कैंची धाम पहुंचने के लिए एक ऐसा रास्ता भी है, जो न सिर्फ ट्रैफिक जाम से बचाएगा बल्कि यात्रियों को प्रकृति के बेहद करीब ले जाएगा. नैनीताल से कैंची धाम तक जाने वाला ब्रिटिश काल का पुराना पैदल मार्ग श्रद्धालुओं के लिए बेहतरीन विकल्प है, और खास बात ये है इस पुराने रास्ते का पर्यटन विभाग द्वारा सौंदर्यीकरण और मरम्मत का कार्य भी किया गया है.
अब कैंची धाम पहुंचने के लिए एक ऐसा रास्ता भी है, जो न सिर्फ ट्रैफिक जाम से बचाएगा बल्कि यात्रियों को प्रकृति के बेहद करीब ले जाएगा. नैनीताल से कैंची धाम तक जाने वाला ब्रिटिश काल का पुराना पैदल मार्ग श्रद्धालुओं के लिए बेहतरीन विकल्प है, और खास बात ये है इस पुराने रास्ते का पर्यटन विभाग द्वारा सौंदर्यीकरण और मरम्मत का कार्य भी किया गया है. और इसे आकर्षण ट्रैकिंग रूट के रूप में विकसित किया है.
नैनीताल से होती है ट्रैक की शुरुआत
यह ट्रैक नैनीताल की शेर का डांडा पहाड़ी में स्थित बिरला चुंगी से शुरू होकर चोरसा और भवाली गांव होते हुए सीधे कैंची धाम तक पहुंचता है. अंग्रेजों के समय में बनाए गए इस पैदल मार्ग का उपयोग कभी स्थानीय लोग आवाजाही के लिए किया करते थे, लेकिन समय के साथ इस रास्ते का उपयोग कम हो गया. अब पर्यटन विभाग ने इसे फिर से डेवलप कर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक नए ट्रैकिंग रूट के रूप में विकसित किया है.
प्रकृति के करीब लेकर जाता है ट्रैक
चीड़ और देवदार के घने जंगलों से होकर गुजरने वाला यह मार्ग प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है. रास्ते में पक्षियों की मधुर चहचहाहट, पहाड़ी वादियों की शांति और छोटी-छोटी जलधाराएं यात्रियों को एक अलग अनुभव देती हैं.
जिला पर्यटन अधिकारी अतुल भंडारी बताते हैं कि, इस ट्रैकिंग रूट पर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न व्यवस्थाएं की जा गई हैं. मार्ग पर साइन बोर्ड लगाए गए हैं ताकि लोगों को दिशा संबंधी किसी प्रकार की परेशानी न हो. इसके अलावा रेस्ट पॉइंट्स, पेयजल की व्यवस्था और सौंदर्यीकरण के काम भी किए गए हैं.
विकसित की जा रही हैं सुविधाएं
पर्यटन विभाग का मानना है कि आने वाले समय में इस मार्ग पर और भी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे यह धार्मिक पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म का एक आदर्श मॉडल बन सकेगा. इसके साथ ही इस ट्रैक से जुड़े स्थानीय गांवों को भी रोजगार के नए अवसर मिलेंगे. स्थानीय लोग होम-स्टे, गाइड और अन्य पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा सकेंगे. कैंची धाम पहले से ही देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है. अब ट्रैकिंग के जरिए यहां पहुंचने का विकल्प उन लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करेगा, जो अपनी कैंची धाम यात्रा में प्रकृति और रोमांच का अनुभव भी जोड़ना चाहते हैं.
About the Author
विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



