Image Slider

Last Updated:

लोकल 18 से बातचीत के दौरान मंदिर के महंत दीनदयाल वैश्य ने बताया कि लंबे समय से बीमारी या अन्य समस्याओं से जूझ रहे लोग यहां माता के दर्शन के लिए आते हैं. उनका कहना है कि श्रद्धालु माता के चरणों में अपनी मनोकामनाएं रखते हैं और आस्था के साथ पूजा-अर्चना करते हैं. इसी वजह से मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं.

गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित सिद्ध पीठ कोल्हमपुर मंदिर अपनी अनोखी मान्यता के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान रखता है. यहां दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता के दरबार में सच्चे मन से प्रार्थना करने से उन्हें मानसिक शांति मिलती है और जीवन की परेशानियों से लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है. इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां भक्तों को प्रसाद के रूप में नारियल पानी दिया जाता है.

श्रद्धालु माता के चरणों में अपनी मनोकामनाएं रखते हैं

लोकल 18 से बातचीत के दौरान मंदिर के महंत दीनदयाल वैश्य ने बताया कि लंबे समय से बीमारी या अन्य समस्याओं से जूझ रहे लोग यहां माता के दर्शन के लिए आते हैं. उनका कहना है कि श्रद्धालु माता के चरणों में अपनी मनोकामनाएं रखते हैं और आस्था के साथ पूजा-अर्चना करते हैं. इसी वजह से मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं.

क्या है मान्यता

महंत दीनदयाल वैश्य ने बताया कि नारियल पानी को प्रसाद के रूप में देने की परंपरा करीब चार-पांच वर्ष पहले शुरू हुई. उनके अनुसार, एक बार वे उज्जैन महाकाल के दर्शन के लिए गए थे. वहां उनके साथ एक ऐसी घटना घटी वह जिसको छूते थे उनको आराम मिल जाता था वह खुद अचंबित थे कि यह मेरे साथ क्या हो रहा है. फिर वहां से लौटने के बाद उन्होंने माता और भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की. उनका कहना है कि उन्हें आशीर्वाद मिला कि यदि वे श्रद्धालुओं को भभूत मिलाकर नारियल पानी प्रसाद के रूप में देंगे, तो लोगों को लाभ मिलेगा. तभी से मंदिर में यह परंपरा जारी है और श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा के साथ इस प्रसाद को ग्रहण करते हैं.

विभिन्न राज्यों से भी पहुंचते हैं श्रद्धालु 

मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के कारण यहां केवल गोंडा ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं. महंत के अनुसार, कई लोग ऐसे भी आते हैं जो लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से परेशान रहते हैं. वे माता के दरबार में मत्था टेकते हैं और प्रसाद के रूप में नारियल पानी ग्रहण करते हैं.

उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता की कृपा से उन्हें राहत मिलती है. हालांकि, किसी व्यक्ति को लाभ मिलने में कितना समय लगेगा, यह निश्चित नहीं होता. महंत का कहना है कि यह पूरी तरह श्रद्धा और माता की कृपा पर निर्भर करता है. कुछ लोगों को जल्दी राहत महसूस होती है, जबकि कुछ को समय लग सकता है.

मंदिर में मिलता है नारियल पानी का प्रसाद

सिद्ध पीठ कोल्हमपुर मंदिर आज आस्था का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है. यहां आने वाले श्रद्धालु केवल अपनी समस्याओं का समाधान ही नहीं, बल्कि मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा की तलाश में भी पहुंचते हैं. मंदिर में मिलने वाला नारियल पानी का प्रसाद इसकी सबसे अनोखी पहचान बन गया है, जो लोगों की आस्था को और भी मजबूत करता है. उन्होंने बताया कि यहां पर पांच मंगलवार सोमवार या शनिवार आने से सारी बीमारियां दूर होती हैं.

About the Author

authorimg

Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||