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-चेकडैम निर्माण में अनियमितताओं का खुलासा होने पर कानुपर देहात के डीएम ने दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कसा शिकंजा
-तकनीकी सलाहकार समिति की जांच में निर्माण कार्यों में गुणवत्ता संबंधी खामियां और वित्तीय अनियमितताएं उजागर
-फर्जी सत्यापन और करोड़ों के भुगतान पर गिरी गाज, जांच के घेरे में इंजीनियर
-योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का असर, चेकडैम घोटाले में बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई

उदय भूमि संवाददाता
कानपुर देहात। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टालरेंस नीति को कानपुर देहात के डीएम कपिल सिंह अपना रहे हैं। वित्तीय अनियमितताओं पर लगातार प्रहार कर रहे हैं। अब उन्होंने जनपद में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान लघु सिंचाई विभाग द्वारा निर्मित चार चेकडैमों में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद सख्त रुख अपनाया है। तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) की जांच में निर्माण कार्यों में गुणवत्ता संबंधी खामियां और वित्तीय अनियमितताएं उजागर होने पर अधिशासी अभियंता सहित सात अवर अभियंताओं (जेई) के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। साथ ही निर्माण कार्य से जुड़ी दो कार्यदायी संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।

लघु सिंचाई विभाग ने रिंद नदी पर बड़ापुर निगोहिया, सुंदरपुर गजेन और रतनपुर खास तथा सेंगुर नदी पर फत्तेपुर डेरापुर में चेकडैमों का निर्माण कराया था। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इन परियोजनाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आईं। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि कई स्थानों पर निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किया गया और गुणवत्ता से समझौता किया गया है। प्रारंभिक जांच में रतनपुर खास स्थित चेकडैम की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई। वहीं सुंदरपुर गजेन का चेकडैम स्वीकृत स्थल से लगभग एक किलोमीटर दूर बनाया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि निर्माण कार्य में स्वीकृत मानकों के अनुरूप पत्थरों और अन्य सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। इन शिकायतों के आधार पर 21 मार्च 2025 को अधिशासी अभियंता द्वारा निरीक्षण किया गया, जिसमें निर्माण कार्य अधूरा और गुणवत्ताहीन पाया गया था। हालांकि, निरीक्षण रिपोर्ट के मात्र पांच दिन बाद 26 मार्च को एक नई टीम गठित की गई और उसके आधार पर भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी दिखाते हुए 31 मार्च को संबंधित कार्यों का पूरा भुगतान जारी कर दिया गया। जबकि उस समय तक निर्माण कार्य पूरी तरह संतोषजनक नहीं था। इस भुगतान को लेकर भी सवाल उठे और मामले की दोबारा शिकायत की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी कपिल सिंह ने तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) से जांच कराने की संस्तुति मंडलायुक्त कानपुर को भेजी। इसके बाद मंडलायुक्त ने अपर आयुक्त प्रदीप कुमार के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। समिति ने विस्तृत जांच के बाद कई अनियमितताओं की पुष्टि करते हुए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।जांच रिपोर्ट के आधार पर मंडलायुक्त ने 30 अप्रैल 2026 को अपर मुख्य सचिव, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग को कार्रवाई की संस्तुति भेजी। शासन स्तर पर रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद अब दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

जिलाधिकारी कपिल सिंह ने बताया कि अधिशासी अभियंता आशीष कुमार श्रीवास्तव, लघु सिंचाई खंड कानपुर के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। इसके अलावा अवर अभियंता रामसूरत यादव, मनोज कुमार कुशवाहा, अरुण कुमार सिंह, पवन कुमार सिंह, चंद्रिका प्रसाद, अनंत तिवारी और रमेश कुमार के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जांच में दोषी पाई गई कार्यदायी संस्थाएं मेसर्स नेशनल एंटरप्राइजेज, कानपुर तथा मेसर्स शीलू कुमार कंस्ट्रक्शन, इटावा के खिलाफ अनुबंध की शर्तों के तहत दंडात्मक कार्रवाई करने और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश मुख्य अभियंता, लघु सिंचाई कानपुर मंडल को जारी किए गए हैं।

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