-देश के चुनिंदा 12 शहरों में शामिल हुआ गाजियाबाद, एनआईयूए और नगर निगम के बीच हुआ महत्वपूर्ण एमओयू
-जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए बनेगी दीर्घकालिक कार्ययोजना, 15 माह में धरातल पर उतरेंगी परियोजनाएं
-कूलिंग रूम, प्याऊ और हरित परियोजनाओं के जरिए शहर को बनाया जाएगा अधिक सुरक्षित और टिकाऊ
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने की दिशा में गाजियाबाद ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। शहर को देश के चुनिंदा 12 नगरों में शामिल करते हुए ‘हीट रेजिलिएंट सिटी’ परियोजना के लिए चयनित किया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान (एनआईयूए) और गाजियाबाद नगर निगम के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस परियोजना के लिए भारत सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा गाजियाबाद नगर निगम को पांच करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी। एमओयू पर गाजियाबाद नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक और एनआईयूए की निदेशक ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता गाजियाबाद को भविष्य की जलवायु संबंधी चुनौतियों के प्रति अधिक सक्षम, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य शहर में बढ़ती गर्मी के प्रभाव को कम करना, नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना तथा शहरी विकास को जलवायु अनुकूल बनाना है।
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि वर्तमान समय में शहरी क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी और हीट वेव एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में गाजियाबाद को हीट रेजिलिएंट सिटी परियोजना के लिए चुना जाना शहर के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से गर्मी के प्रभाव को कम करने, नागरिकों को राहत पहुंचाने तथा दीर्घकालिक जलवायु अनुकूल विकास सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की जाएंगी। उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत गाजियाबाद नगर निगम एक व्यापक और दीर्घकालिक हीट रेजिलिएंट सिटी फ्रेमवर्क एवं कार्ययोजना तैयार करेगा। यह दस्तावेज आने वाले वर्षों में शहर के विकास कार्यों, नीतियों और परियोजनाओं के लिए मार्गदर्शक का कार्य करेगा। इसमें जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और गर्मी से जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखते हुए विशेष रणनीतियां तैयार की जाएंगी ताकि भविष्य में शहर को अधिक सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।
नगर आयुक्त ने कहा कि इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं, विशेषज्ञों तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी होगी। सभी हितधारकों के सहयोग से ऐसी योजनाएं तैयार की जाएंगी जो सीधे नागरिकों के जीवन को प्रभावित करें और उन्हें भीषण गर्मी से राहत प्रदान करें। परियोजना को सफलतापूर्वक धरातल पर उतारने के लिए 15 माह का समय निर्धारित किया गया है। कार्यक्रम के दौरान नगर आयुक्त ने नगर निगम द्वारा पहले से किए जा रहे जनहितकारी कार्यों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में लोगों को राहत पहुंचाने के लिए शहर के विभिन्न स्थानों पर स्थायी और अस्थायी प्याऊ स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही कूलिंग रूम की व्यवस्था भी की गई है, जहां जरूरतमंद नागरिक भीषण गर्मी के दौरान राहत प्राप्त कर सकते हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य विशेष रूप से श्रमिकों, राहगीरों, वरिष्ठ नागरिकों और कमजोर वर्गों को गर्मी के दुष्प्रभावों से बचाना है।
हीट रेजिलिएंट सिटी परियोजना भविष्य में गाजियाबाद के शहरी विकास की दिशा बदल सकती है। हरित क्षेत्रों का विस्तार, तापमान नियंत्रण के लिए नवाचार आधारित उपाय, जल संरक्षण, पर्यावरण अनुकूल आधारभूत संरचना और जनजागरूकता कार्यक्रम जैसी पहलें शहर को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से मुकाबला करने में सक्षम बनाएंगी।
कार्यक्रम में अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। नगर निगम और एनआईयूए के बीच हुआ यह समझौता गाजियाबाद को एक आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल शहर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। आने वाले समय में यह परियोजना न केवल शहरवासियों को गर्मी से राहत देगी, बल्कि गाजियाबाद को देश के अग्रणी जलवायु-संवेदनशील शहरों की श्रेणी में भी स्थापित करेगी।
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