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Chitrakoot Kali Ghati Temple:क्या किसी मंदिर में माथा टेकने से सड़क हादसों पर लगाम लग सकती है? आस्था और अंधविश्वास की बहस से इतर, उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में एक ऐसा चमत्कारी मंदिर है, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि यहाँ पूजा-अर्चना करने से वाहनों की दुर्घटनाएं रुक जाती हैं. मानिकपुर की खतरनाक ‘काली घाटी’ में स्थित यह मंदिर पिछले 40 सालों से लाखों वाहन चालकों और मुसाफिरों के लिए सुरक्षित सफर का सुरक्षा कवच बना हुआ है. आइए जानते हैं इस अनोखे मंदिर की दिलचस्प कहानी.

Chitrakoot Kali Ghati Temple: देशभर में ऐसे कई मंदिर हैं, जिनकी अपनी अलग धार्मिक आस्थाएं और मान्यताएं हैं. कहीं संतान प्राप्ति की कामना लेकर श्रद्धालु पहुंचते हैं, तो कहीं रोगों से मुक्ति की आस्था जुड़ी हुई है. लेकिन उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में एक ऐसा मंदिर भी है, जिसके बारे में स्थानीय लोगों का दृढ़ विश्वास है कि यहां दर्शन और पूजा-अर्चना करने से सड़क हादसों पर रोक लग जाती है. यही वजह है कि यहां से गुजरने वाले वाहन चालक अपनी यात्रा सुरक्षित रखने के लिए विशेष रूप से पूजा-अर्चना करते हैं.

मानिकपुर की काली घाटी में स्थित है यह चमत्कारी मंदिर
आपको बता दें कि यह मंदिर चित्रकूट के मानिकपुर क्षेत्र की काली घाटी में बना हुआ है, जो पिछले लगभग 40 सालों से वाहन चालकों और यात्रियों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ बस, ट्रक, जीप और अन्य व्यावसायिक वाहनों के चालक भी अपनी यात्रा शुरू करने से पहले रुककर मां के दर्शन करते हैं और सुरक्षित सफर की कामना करते हैं.

स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब 40 वर्ष पहले काली घाटी का यह इलाका भीषण सड़क दुर्घटनाओं के लिए कुख्यात था. घाटी के तीखे मोड़ों और कठिन रास्तों के कारण आए दिन बसों और ट्रकों के पलटने जैसी गंभीर घटनाएं सामने आती रहती थीं. इन लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए ही यहां मां काली के मंदिर की स्थापना की गई. इसके बाद धीरे-धीरे लोगों में यह विश्वास मजबूत होता गया कि मां काली की कृपा से अब दुर्घटनाओं में भारी कमी आई है.

मंदिर के पुजारी ने दी ऐतिहासिक जानकारी
वहीं, मंदिर के पुजारी राम विलास दास ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि समय के साथ यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान मात्र नहीं रहा, बल्कि वाहन चालकों के लिए अटूट आस्था और विश्वास का प्रतीक बन गया है. आज भी इस घाटी से गुजरने वाले कई चालक मंदिर के सामने अपने वाहनों को रोकते हैं, मां के चरणों में माथा टेकते हैं और फिर आगे की यात्रा शुरू करते हैं. मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना शुरू होने के बाद से सड़क हादसों में पहले की तुलना में काफी कमी देखने को मिली है. यह मंदिर लगभग चार दशक पुराना है और इसकी स्थापना विशेष रूप से सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और यात्रियों की सुरक्षा की भावना से की गई थी.

हादसों को रोकने के लिए हुई थी तीन देवों की स्थापना
पुजारी जी ने आगे की जानकारी में बताया कि पहले इस दुर्गम घाटी में आए दिन बड़े हादसे होते थे. कई बार सवारियों से भरी बसें और भारी-भरकम वाहन अनियंत्रित होकर पलट जाते थे, जिससे भारी जान-माल का नुकसान होता था. इस संकट से मुक्ति पाने के लिए यहां मां काली, मां दुर्गा और बजरंगबली की प्रतिमाएं विधि-विधान से स्थापित की गईं. इसके बाद से स्थानीय नगरवासियों के साथ-साथ दूर-दूर से आने वाले वाहन चालक भी यहां पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं. मां के प्रति इसी अगाध श्रद्धा के चलते यहां हर हफ्ते में एक बार विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाता है.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें

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