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AN-32 IAF Transport Aircraft: इंडियन एयरफोर्स के पास ट्रांसपोर्ट एयसरक्राफ्ट का बेड़ा अलग से है जो समय पर पड़ने पर सैन्य साजो-सामान के साथ ही रेस्क्यू ऑपरेशन में भी काम आता है. इसमें सोवियत कालीन AN-32 परिवहन विमान की अपनी खास जगह है. इस विमान को खास तौर पर हाई-अल्टीट्यूड और अत्यधिक तापमान में भी ऑपरेशनल रहने के अनुकूल बनाया गया है.
इंडियन एयरफोर्स का मीडियम लिफ्ट सोवियत युग का AN-32 एयरक्राफ्ट असम में क्रैश हो गया है. यह विमान कई मायनों में बेहद खास है. (फोटो: Reuters
AN-32 IAF Transport Aircraft: इंडियन एयरफोर्स के लिए शनिवार 13 जून 2026 का दिन बुरी खबर लेकर आया. IAF का मीडियम लिफ्ट ट्रांसपोर्ट AN-32 एयरक्राफ्ट असम के जोरहाट में क्रैश हो गया है. इस हादसे में यह विमान पूरी तरह से तबाह हो गया. AN-32 विमान के महत्व को इसी से समझा जा सकता है कि यह एयरक्राफ्ट अत्यधिक ऊंचाई और ज्यादा तापमान में भी ऑपरेशन को अंजाम देने में सक्षम है. AN-32 एयरक्राफ्ट चार दशक से भी ज्यादा समय से इंडियन एयरफोर्स के ट्रांसपोर्ट अभियान में अहम भूमिका निभाता आ रहा है. इस विमान को तत्कालीन सोवियत संघ से साल 1984 में पहली बार खरीदा गया था. मौजूदा समय में भारत के पास 80 से 100 AN-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट्स हैं.
भारतीय वायुसेना के परिवहन बेड़े का अहम हिस्सा माने जाने वाले AN-32 (Antonov AN-32) विमान ने चार दशक से अधिक समय से देश की सामरिक और मानवीय जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आ रहा है. सोवियत मूल का यह सैन्य परिवहन विमान अपनी मजबूती, उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑपरेशनल कैपेबिलिटी और विषम मौसम में बेहतर प्रदर्शन के कारण इंडियन एयरफोर्स का भरोसेमंद साथी बना हुआ है. AN-32 का विकास मौजूदा यूक्रेन के एंटोनोव डिजाइन ब्यूरो ने भारतीय वायुसेना की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया था. भारत ने इस विमान को वर्ष 1984 में तत्कालीन सोवियत संघ से खरीदा था. वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास लगभग 100 AN-32 विमान हैं, जिनका उपयोग सैनिकों, सैन्य उपकरणों और राहत सामग्री के परिवहन के लिए किया जाता है. NATO ने इस विमान को ‘क्लाइन’ (Cline) नाम दिया है.
AN-32: मुश्किल परिस्थितियों का साथी
विशेषज्ञों के अनुसार AN-32 की सबसे बड़ी विशेषता इसकी कठिन परिस्थितियों में संचालन क्षमता है. यह विमान दिन और रात दोनों समय अत्यधिक गर्मी वाले क्षेत्रों, पहाड़ी इलाकों तथा 55 डिग्री सेल्सियस तक के गर्म मौसम में प्रभावी ढंग से उड़ान भर सकता है. यही कारण है कि लद्दाख, पूर्वोत्तर और अन्य दुर्गम क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता लगातार बनी हुई है. यह एक ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप सैन्य परिवहन विमान है, जिसे दो शक्तिशाली AI-20DM टर्बोप्रॉप इंजनों से शक्ति मिलती है. प्रत्येक इंजन लगभग 5,112 हॉर्सपावर की क्षमता प्रदान करता है. टर्बोप्रॉप तकनीक के कारण विमान अपेक्षाकृत कम ईंधन खर्च करता है, जबकि कठिन रनवे और कम विकसित हवाई पट्टियों पर भी प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता है.
AN-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को अत्यधिक ऊंचाई और ज्यादा तापमान में भी ऑपरेशनल योग्य बनाया गया है. इस मामले में यह विमान राफेल और तेजस से भी बीस है. (फोटो: PTI)
27000 किलो मैक्सिमम टेक-ऑफ वेट
परफॉर्मेंस की बात करें तो AN-32 की अधिकतम गति लगभग 530 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि इसकी क्रूज गति 470 से 530 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच रहती है. यह विमान 2500 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है और इसकी अधिकतम सर्विस हाइट 9500 मीटर है. विमान का खाली वजन करीब 16,800 किलोग्राम है, जबकि इसका अधिकतम टेक-ऑफ वजन 27,000 किलोग्राम तक पहुंचता है.
AN-32 की खासियत
- भारतीय वायुसेना की जरूरतों के लिए विकसित विमान: एंटोनोव An-32 को मूल रूप से भारतीय वायुसेना (IAF) की मांग पर विकसित किया गया था. यह गर्म मौसम और ऊंचाई वाले एयरफील्ड पर संचालन के लिए विशेष रूप से जाना जाता है.
- दो शक्तिशाली टर्बोप्रॉप इंजनों से लैस: विमान में 2 × ZMKB Progress AI-20DM टर्बोप्रॉप इंजन लगे हैं, जो प्रत्येक 5,112 हॉर्सपावर की शक्ति प्रदान करते हैं.
- 50 यात्रियों या 42 पैराट्रूपर्स की क्षमता: An-32 एक बार में 50 यात्रियों, 42 पैराट्रूपर्स या 24 स्ट्रेचर मरीजों को ले जा सकता है.
- कठिन इलाकों में संचालन की क्षमता: हाई-विंग डिजाइन और ऊंचे इंजन प्लेसमेंट के कारण यह कच्चे, ऊबड़-खाबड़ और बिना पक्के रनवे पर भी सुरक्षित संचालन कर सकता है.
- 530 किमी प्रति घंटा की अधिकतम गति: An-32 की अधिकतम गति 530 किमी/घंटा है, जबकि इसकी क्रूज स्पीड 470 से 530 किमी/घंटा के बीच रहती है.
- 2,500 किमी तक का ऑपरेशनल रेंज: 5,000 किलोग्राम पेलोड के साथ यह विमान लगभग 2,500 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है.
- 31,000 फीट से अधिक ऊंचाई तक उड़ान: इसका सर्विस सीलिंग 9,500 मीटर (करीब 31,165 फीट) है, जिससे यह पर्वतीय और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में प्रभावी रूप से काम कर सकता है.
- विशाल कार्गो केबिन: विमान के कार्गो केबिन की लंबाई 12.48 मीटर, चौड़ाई 2.78 मीटर और ऊंचाई 1.84 मीटर है, जिससे सैन्य उपकरण और राहत सामग्री आसानी से ले जाई जा सकती है.
- फायरफाइटिंग वेरिएंट भी उपलब्ध: AN-32P नामक विशेष संस्करण जंगलों और बड़े अग्निकांडों से निपटने के लिए विकसित किया गया है, जिसमें फायर-रिटार्डेंट तरल पदार्थ गिराने वाले विशेष टैंक लगाए जाते हैं.
एक बार में 7.5 टन सामान ढोने की क्षमता
AN-32 की परिवहन क्षमता भी उल्लेखनीय है. यह एक बार में 7.5 टन तक का माल ढो सकता है. इसके अलावा इसमें 50 यात्री, 42 पैराट्रूपर या 24 मरीजों के साथ तीन मेडिकल क्रू सदस्यों को ले जाने की क्षमता है. यही वजह है कि इसका उपयोग सैन्य अभियानों के साथ-साथ आपदा राहत और मानवीय सहायता मिशनों में भी किया जाता है. विमान की हाई-विंग डिजाइन और शॉर्ट टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (STOL) क्षमता इसे कच्चे, ऊबड़-खाबड़ और बिना पक्के रनवे पर भी सुरक्षित संचालन में सक्षम बनाती है. सीमित बमबारी क्षमता के अलावा इसका उपयोग पैराट्रूपिंग अभियानों में भी किया जाता है. AN-32 का एक विशेष वेरिएंट AN-32P अग्निशमन कार्यों के लिए विकसित किया गया है, जो आग बुझाने वाले रसायनों का छिड़काव कर सकता है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
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