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किसान नंदलाल जायसवाल बताते हैं कि भिंडी एक ऐसी सब्जी है जिसे लगभग हर घर में पसंद किया जाता है. लोग इसे हरी सब्जी के रूप में खूब खाते हैं. इसी वजह से इसकी बिक्री आसानी से हो जाती है और किसानों को अच्छा दाम भी मिलता है. बाजार में मांग लगातार बनी रहने के कारण उन्हें अपनी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती है. नंदलाल जायसवाल बताया कि भिंडी की खेती में सही समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और कीटों से बचाव का विशेष ध्यान रखना पड़ता है.

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गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड मुजेहना के ग्राम सभा उज्जैनीकल का एक युवा किसान पारंपरिक खेती छोड़कर सब्जियों की खेती कर रहा है. उसकी मेहनत और नई सोच ने उसे अच्छी पहचान दिलाई है. इस समय वह अपने खेतों में भिंडी की खेती कर रहा है और इससे सालाना लाखों रुपये की कमाई कर रहा है.

लोकल 18 से बातचीत के दौरान युवा किसान नंदलाल जायसवाल का कहना है कि पहले वह गेहूं, धान जैसी पारंपरिक फसलें उगाता था, लेकिन इन फसलों में लागत के मुकाबले मुनाफा कम होता था. इसके बाद उसने सब्जी की खेती की ओर कदम बढ़ाया. कई तरह की सब्जियों की खेती करने के बाद उसने भिंडी की खेती को अपनाया, क्योंकि इसकी बाजार में हमेशा मांग बनी रहती है.

बाजार में रहती है खूब डिमांड

किसान नंदलाल जायसवाल बताते हैं कि भिंडी एक ऐसी सब्जी है जिसे लगभग हर घर में पसंद किया जाता है. लोग इसे हरी सब्जी के रूप में खूब खाते हैं. इसी वजह से इसकी बिक्री आसानी से हो जाती है और किसानों को अच्छा दाम भी मिलता है. बाजार में मांग लगातार बनी रहने के कारण उन्हें अपनी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी नहीं होती है. नंदलाल जायसवाल बताया कि भिंडी की खेती में सही समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और कीटों से बचाव का विशेष ध्यान रखना पड़ता है. यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करें तो कम समय में अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं. भिंडी की फसल तैयार होने के बाद कई दिनों तक लगातार तुड़ाई होती रहती है, जिससे किसानों को नियमित आमदनी मिलती रहती है.

भिंडी की खेत में डालते वर्मी कम्पोस्ट

युवा किसान नंदलाल जायसवाल के अनुसार, भिंडी की खेती से उन्हें पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना अधिक लाभ मिल रहा है. उनकी फसल स्थानीय मंडियों के साथ-साथ आसपास के बाजारों में भी भेजी जाती है. बताते हैं कि हम अपने भिंडी की सप्लाई अगल-बगल के बाजारों में करते हैं. उसके अलावा अगल-बगल के लोग हमारे खेत से ही भिंडी ले लेते हैं. हम अपने भिंडी के खेत में साड़ी गोबर वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करते हैं. रासायनिक खाद का प्रयोग ना के बराबर करते हैं इसीलिए हमारे फसल के डिमांड मार्केट में हमेशा बनी रहती है और हर किसान से हमारे भिंडी की रेट अधिक रहती है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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