नई दिल्ली. रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई में तीन दिनों से चल रही मौद्रिक नीति सीमिति (MPC) की बैठक के नतीजा आ गया है. इस बार आरबीआई के सामने कई चुनौतियां थीं. इसलिए कयास लगाए जा रहे थे कि रुपये को थामने के लिए ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन ज्यादातर एक्सपर्ट का यही मानना है कि रिजर्व बैंक रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा. आरबीआई ने अपनी पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं किया है.
RBI Policy News: विदेशी मुद्रा भंडार से भारत को मजबूत सुरक्षा कवच
RBI Monetary Policy Today: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) वैश्विक अनिश्चितताओं और बाहरी झटकों के खिलाफ एक बड़ा सुरक्षा कवच प्रदान करता है. उन्होंने भरोसा जताया कि देश के पास ऐसे पर्याप्त संसाधन हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में पैदा होने वाले जोखिमों का सामना करने में मदद कर सकते हैं.
गवर्नर ने यह भी कहा कि विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए RBI पूरी तरह सतर्क है और जरूरत पड़ने पर अपने सभी उपलब्ध साधनों का इस्तेमाल करने के लिए तैयार है. उनका कहना था कि केंद्रीय बैंक का लक्ष्य रुपये और विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित तथा संतुलित स्थिति बनाए रखना है, ताकि किसी भी वैश्विक उथल-पुथल का असर भारतीय वित्तीय प्रणाली पर सीमित रहे.
RBI Monetary Policy Meeting: सरकारी बॉन्ड (G-Sec) निवेश पर कैपिटल गेन टैक्स खत्म
RBI Monetary Policy Meeting: सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को आकर्षित करने के लिए सरकारी बॉन्ड (G-Sec) निवेश पर कैपिटल गेन टैक्स खत्म कर दिया है. नए अध्यादेश के तहत अब विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से होने वाले मुनाफे पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना होगा.
पहले 12 महीने से अधिक समय तक रखी गई सरकारी प्रतिभूतियों पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता था, जबकि एक साल से कम अवधि के निवेश पर 20% शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता था. अब इन दोनों टैक्स देनदारियों को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है.
इस कदम का मकसद भारतीय बॉन्ड बाजार को विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना और देश में विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देना है. इससे सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश बढ़ने और वित्तीय बाजारों को अतिरिक्त समर्थन मिलने की उम्मीद है.
Real Estate : रेपो रेट स्थिर रहने से घर खरीदारों और डेवलपर्स को राहत
गंगा रियल्टी के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर विकास गर्ग ने कहा कि RBI द्वारा रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए उत्साहजनक है. उनके मुताबिक यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब देश का आवासीय बाजार मजबूत स्थिति में है और उपभोक्ताओं का भरोसा लगातार बढ़ रहा है.
उन्होंने कहा कि ब्याज दरों में स्थिरता रहने से होम लोन लेने वाले खरीदारों को राहत मिलेगी, जिससे वे घर खरीदने के अपने फैसले को अधिक विश्वास के साथ आगे बढ़ा सकेंगे. वहीं डेवलपर्स के लिए भी यह माहौल अनुकूल रहेगा क्योंकि इससे बाजार में मांग बनी रहने की संभावना बढ़ेगी.
विकास गर्ग का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, लोगों की बढ़ती आय और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण आवासीय संपत्तियों की मांग लगातार मजबूत हो रही है. ऐसे में मौद्रिक नीति में स्थिरता निवेशकों और खरीदारों दोनों का भरोसा बढ़ाएगी तथा आने वाले महीनों में बिक्री और नए निवेश को अतिरिक्त गति दे सकती है.
स्थिर ब्याज दरों से रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगा भरोसा
त्रिगुणा प्रोजेक्ट्स के सह-संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक रघुनाथ रेड्डी भट्टागिरी ने कहा कि रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर बनाए रखने का फैसला पूरे रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है. उनके अनुसार स्थिर ब्याज दरों से घर खरीदारों को अपने खरीदारी के फैसले लेने में अधिक भरोसा मिलेगा, जबकि डेवलपर्स को नई परियोजनाओं में निवेश और योजना बनाने के लिए बेहतर स्पष्टता मिलेगी.
उन्होंने कहा कि इसका फायदा केवल आवासीय परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्लॉटेड डेवलपमेंट, मिक्स्ड-यूज कम्युनिटीज और कमर्शियल रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों को भी मिलेगा. रघुनाथ रेड्डी भट्टागिरी का मानना है कि मौद्रिक नीति में स्थिरता से लंबी अवधि की वृद्धि को समर्थन मिलता है, घरों की वहनीयता बेहतर होती है और बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत बना रहता है. उनके मुताबिक यह फैसला रियल एस्टेट उद्योग की निरंतर प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है.
RBI MPC Meeting 2026 Live: विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए बड़ी घोषणा
RBI MPC Meeting 2026 Live: RBI गवर्नर ने प्रवासी भारतीयों (NRI) और ओवरसीज सिटिजन्स ऑफ इंडिया (OCI) के लिए शेयर बाजार में निवेश के नियमों को और आसान बनाने की घोषणा की है. नए फैसले के तहत SEBI में पंजीकरण कराए बिना स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार होने वाले इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश की सीमा बढ़ा दी गई है.
इस बदलाव के बाद NRI और OCI निवेशक भारतीय शेयर बाजार में पहले के मुकाबले अधिक निवेश कर सकेंगे. संशोधित सीमा केवल स्टॉक मार्केट के जरिए किए जाने वाले निवेश पर लागू होगी. RBI का मानना है कि इस कदम से विदेशों में रहने वाले भारतीयों की भारतीय पूंजी बाजार तक पहुंच बढ़ेगी और देश में विदेशी निवेश प्रवाह को भी मजबूती मिलेगी.
RBI Monetary Policy Meeting: विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए RBI के 6 बड़े कदम
भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ाने और रुपये को सहारा देने के लिए RBI ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं. केंद्रीय बैंक ने विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड बाजार तक पहुंच आसान बनाने के उद्देश्य से सभी नई 15, 30 और 40 साल की सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) को FAR व्यवस्था में शामिल कर दिया है.
इसके अलावा, सामान्य निवेश मार्ग के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) पर लागू निवेश एकाग्रता सीमा को हटा दिया गया है. NRI और OCI निवेशकों के लिए सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में निवेश की सीमा भी बढ़ाई गई है, जबकि यह सुविधा विदेश में रहने वाले सभी भारतीय नागरिकों तक विस्तारित कर दी गई है.
RBI Monetary Policy Meeting: RBI ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के विदेशी कर्ज (ECB) के लिए रियायती फॉरेक्स स्वैप विंडो की अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी है. साथ ही 3 से 5 वर्ष की FCNR(B) जमा जुटाने वाले बैंकों को मिलने वाली पूर्ण हेजिंग लागत सहायता भी 30 सितंबर 2026 तक जारी रहेगी.
केंद्रीय बैंक ने निर्यातकों के लिए भी राहत दी है. निर्यात आय को देश में वापस लाने की समयसीमा, जिसे पहले 15 महीने तक बढ़ाया गया था, अब फिर से 9 महीने कर दी गई है. RBI का मानना है कि इन कदमों से विदेशी निवेश आकर्षित करने, डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने और वित्तीय बाजारों में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी.
स्थिर रेपो रेट से रियल एस्टेट बाजार को मिलेगा समर्थन
रॉयल ग्रीन रियल्टी के मैनेजिंग डायरेक्टर Yashank Vasan ने कहा कि RBI की MPC द्वारा रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखना रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक कदम है. उनके अनुसार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होने से घर खरीदारों की EMI पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा, जिससे आवासीय संपत्तियों की मांग को समर्थन मिलेगा. उन्होंने कहा कि स्थिर लोन दरें लोगों को घर खरीदने का फैसला लेने में अधिक भरोसा देंगी. वहीं डेवलपर्स के लिए भी यह माहौल अनुकूल रहेगा, जिससे वे नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने और चल रही परियोजनाओं को तय समय पर पूरा करने की बेहतर योजना बना सकेंगे.
रपो रेट स्थिर रहने से घर खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा
व्हाइटलैंड कॉरपोरेशन के डायरेक्टर (स्ट्रैटेजी) Sudeep Bhatt ने कहा कि RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) द्वारा रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखने का फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में शुरू हुई ब्याज दरों में कटौती के बाद पूरे वर्ष में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कमी की जा चुकी है, जिससे उधारी की लागत पहले ही कम हुई है. सुदीप भट्ट के मुताबिक मौजूदा फैसला होम लोन दरों को स्थिर बनाए रखेगा, जिससे घर खरीदने वालों का विश्वास मजबूत होगा और मांग को समर्थन मिलेगा. साथ ही डेवलपर्स के लिए फंडिंग और लिक्विडिटी की स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद है. उनका मानना है कि EMI और कर्ज की लागत में स्थिरता निवेशकों और खरीदारों दोनों की रुचि बढ़ाने में मदद करेगी.
रेपो रेट स्थिर रहने से रियल एस्टेट सेक्टर को सहारा
जिंदल रियल्टी के सीईओ और प्रेसिडेंट Abhay Mishra ने कहा कि रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है. उनके मुताबिक इससे होम लोन की लागत में स्थिरता बनी रहेगी, जिससे घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों का भरोसा बढ़ेगा और बाजार में मांग की रफ्तार कायम रहने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि डेवलपर्स को भी परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें समय पर पूरा करने में अधिक स्पष्टता मिलेगी. अभय मिश्रा का मानना है कि आने वाले समय में इस सेक्टर की पूरी क्षमता को सामने लाने के लिए नीतिगत समर्थन और बाजार में पर्याप्त तरलता बेहद महत्वपूर्ण होगी.
Repo Rate Today: रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं
जैसा कि उम्मीद थी कि RBI ब्याज दरों में बढ़ोतरी का रास्ता नहीं अपनाएगा, फैसला भी बिलकुल वैसा ही आया है. आरबीआई ने ब्याज दरों को स्थिर रखा है. पूरी खबर यहां देखें.
RBI MPC Meeting 2026 Live: FY27 में महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान
RBI Monetary Policy Meeting: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा और उनकी टीम ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान जताया है. केंद्रीय बैंक के मुताबिक कमर्शियल LPG, बेस मेटल्स, प्लास्टिक, रबर और अन्य औद्योगिक कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई पर दबाव बना हुआ है. इन जरूरी इनपुट्स के महंगे होने से उत्पादन लागत बढ़ रही है, जिसका असर आने वाले समय में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है.
- RBI के अनुमान के मुताबिक पहली तिमाही में महंगाई 4.2% रह सकती है.
- दूसरी तिमाही में यह बढ़कर 5.1% होने का अनुमान है.
- तीसरी व चौथी तिमाही में 5.9% तक पहुंच सकती है.
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि फिलहाल महंगाई को लेकर जोखिम और राहत दोनों की संभावनाएं लगभग बराबर हैं.
RBI Meeting Today: महंगी एनर्जी और सप्लाई संकट से बढ़ी चिंता
RBI Meeting Today: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों और सप्लाई चेन में लंबे समय तक बनी रुकावटों का असर अब अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है. इसी वजह से आर्थिक वृद्धि के अनुमान को नीचे किया गया है, जबकि महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी की गई है. उन्होंने कहा कि अप्रैल की मौद्रिक नीति के बाद से वैश्विक परिस्थितियों में आए बदलावों ने लागत का दबाव बढ़ाया है, जिसका असर आने वाले समय में भी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
RBI Monetary Policy Meeting: FY27 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान घटाया गया
RBI Monetary Policy Today: RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की वास्तविक GDP वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.6% कर दिया है. इससे पहले केंद्रीय बैंक ने 6.9% ग्रोथ का अनुमान जताया था. यानी RBI को अब अर्थव्यवस्था की रफ्तार पहले के मुकाबले थोड़ी धीमी रहने की उम्मीद है. वैश्विक अनिश्चितताओं, बढ़ती लागत और बाहरी चुनौतियों को देखते हुए विकास दर के अनुमान में यह कटौती की गई है.
RBI Policy News: अर्थव्यवस्था मजबूत, लेकिन बढ़ती लागत चिंता का विषय: RBI गवर्नर
RBI Meeting Today: RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद भी देश की आर्थिक गतिविधियां स्थिर बनी हुई हैं. उनके मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था ने बाहरी चुनौतियों और वैश्विक तनावों का मजबूती से सामना किया है. हालांकि अब ऊर्जा और अन्य जरूरी कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का असर धीरे-धीरे दिखाई देने लगा है. गवर्नर ने कहा कि लागत बढ़ने और सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों से आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों पर दबाव पड़ सकता है. फिर भी मौजूदा स्थिति में भारतीय अर्थव्यवस्था ने अच्छी मजबूती दिखाई है.
RBI Monetary Policy Meeting: रुपये को बचाने के लिए ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद नहीं
Repo Rate Today: बाजार के जानकारों का मानना है कि RBI सिर्फ रुपये को मजबूत करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी का रास्ता नहीं अपनाएगा. क्वांटम एसेट मैनेजमेंट की फिक्स्ड इनकम फंड मैनेजर स्नेहा पांडे के मुताबिक, मौजूदा हालात 2013 जैसे नहीं हैं, जब केंद्रीय बैंक को करेंसी पर दबाव के कारण सख्त कदम उठाने पड़े थे. उनका कहना है कि RBI फिलहाल ऐसी स्थिति में नहीं है जहां उसे आपातकालीन तौर पर ब्याज दरें बढ़ाकर बाजार को संभालना पड़े.
RBI MPC Meeting: रुपये को संभालने के लिए सरकार और RBI सक्रिय
RBI MPC Meeting: रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार कदम उठा रहे हैं. सरकार ने सोने और चांदी के आयात पर पहले से ज्यादा सख्ती की है, ताकि विदेशी मुद्रा की मांग को नियंत्रित किया जा सके. वहीं RBI ने बैंकों की ओपन फॉरेन एक्सचेंज पोजिशन पर 10 करोड़ डॉलर की सीमा तय कर दी है. इस कदम का मकसद करेंसी बाजार में सट्टेबाजी पर लगाम लगाना और रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकना है.
RBI MPC Meeting: शेयर बाजार में हल्की तेजी
सुबह 9:36 बजे तक भारतीय शेयर बाजार में हल्की मजबूती देखने को मिली. NSE का निफ्टी 50 इंडेक्स 38.05 अंक यानी 0.16% की बढ़त के साथ 23,454.60 पर कारोबार कर रहा था. वहीं, BSE सेंसेक्स 153.08 अंक चढ़कर 74,513.09 के स्तर पर पहुंच गया. शुरुआती कारोबार में निवेशकों का रुझान खरीदारी की ओर दिखा, जिससे प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बने रहे.
रुपया और तेल दोनों में बदलाव
रिजर्व बैंक के एमपीसी बैठक के नतीजे सामने आने से पहले ही भारतीय करेंसी में आज सुधार दिख रहा है. डॉलर के मुकाबले रुपया शुक्रवार सुबह 95.71 के लेवल पर खुला, जो एक दिन पहले 95.79 पर बंद हुआ था. आज ब्रेंट क्रूड का भाव भी बढ़कर 96 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जो इस सप्ताह की शुरुआत में 91 डॉलर के आसपास पहुंच गया था.
बैंकिंग सिस्टम में डाले 17,445 करोड़
रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को अपने एमपीसी बैठक के नतीजे बताने से पहले ही देश के बैंकिंग सिस्टम में 17,445 करोड़ रुपये डाले हैं. यह लिक्विडिटी वैरिएबल रेपो रेट ऑक्शन के जरिये बढ़ाई गई है. आरबीआई ने यह सारी रकम 5.26 फीसदी रेपो रेट के कट ऑफ पर जारी की है.
नए आधार वर्ष पर आएंगे जीडीपी के नतीजे
रिजर्व बैंक एमपीसी बैठक के बाद जीडीपी के विकास दर के नतीजे भी जारी करेगा, जो नए आधार वर्ष पर तय किए जाएंगे. यह आंकड़े काफी मायने रखते हैं, क्योंकि सरकार ने विकास दर के आंकड़ों के लिए नया आधार वर्ष तय किया है. माना जा रहा है कि विकास दर का अनुमान पिछले वित्तवर्ष के लिए 7 फीसदी या उसके आसपास हो सकता है.
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