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यूपी के संभल जनपद में नॉनवेज के शौकीन लोगों के लिए कई ऐसी नॉनवेज की चीजें हैं, जो बेहद खास हैं. इनका जायका ऐसा है कि नॉनवेज के शौकीन लोग एक बार खाने के बाद उंगलियां तक चाट जाते हैं.

 संभल के गुलाबी और नरम कबाब जो मुंह में डालते ही घुल जाते हैं और ये सबसे ज्यादा मशहूर है. मसालेदार और गाढ़ी ग्रेवी वाला गोश्त यहाँ का बेहद पसंदीदा मुख्य भोजन है. इसके अलावा, हलीम और बिरयानी धीमी आंच पर पकाया गया संभल की खासियत है. साथ ही शाही कोरमा शादी-समारोहों और दावतों में परोसा जाने वाला दानेदार और खुशबूदार मटन या चिकन कोरमा यहाँ के पारंपरिक खान-पान का अहम हिस्सा है. 

संभल का जिक्र हो और मुगलई कबाब की बात न हो ऐसा हो ही नहीं सकता है. ये सिर्फ कबाब नहीं, संभल की पहचान हैं. गुलाबी रंग, रुई जैसे नरम और रस से भरे ये कबाब मुंह में जाते ही ऐसे घुलते हैं जैसे बर्फ घुल जाती है. एक बार जिसने चख लिया, वो इसका दीवाना हो गया. इन कबाब की जान है इसका कीमा और मसालों का मेल, बकरे के बारीक कीमे में शाही गरम मसाला, कच्चा पपीता, अदरक-लहसुन, केसर और देसी घी मिलाया जाता है. फिर इसे 6 से 8 घंटे तक मैरीनेट किया जाता है. उसके बाद सुलगते कोयले की धीमी आंच पर सींक में सेंका जाता है. धुएं की खुशबू और घी की महक मिलकर कबाब को जन्नत बना देती है. अंदर से जूसी और बाहर से हल्की परत वाले ये कबाब सच में नवाबी है.

कहते हैं ये रेसिपी मुगल दौर से चली आ रही है. संभल के पुराने खानसामों ने इसे संभालकर रखा और आज तक वही पारंपरिक तरीका इस्तेमाल होता है. कोई मशीन नहीं, सिर्फ हाथों का हुनर रहता है. संभल में चौधरी सराय, कोट पूर्वी और हयात नगर की गलियों में 40-50 साल पुरानी दुकानें हैं. इनकी भट्ठी शाम 4 बजे सुलगती है और 9 बजे तक सारा माल खत्म हो जाता है लाइन में लगकर लोग अपनी बारी का इंतजार करते हैं. तवे से उतरते ही गरमागरम कबाब पतली रुमाली रोटी, पुदीने की हरी चटनी, नींबू और प्याज के लच्छों के साथ प्लेट में आते हैं. पहला निवाला लेते ही आंख बंद हो जाती है। ऊपर से मलाई वाली लस्सी मिल जाए तो बात ही क्या.

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संभल के खाने की बात हो और नान गोश्त का नाम न आए ऐसा मुमकिन ही नहीं है.यह यहां का सबसे पसंदीदा मुख्य भोजन है. करारी तंदूरी नान और गाढ़ी मसालेदार गोश्त की ग्रेवी का जो मेल है, वो सीधा दिल में उतरता है. नान मैदे को दही, दूध और कलौंजी डालकर गूंथा जाता है. फिर उसे मिट्टी के तंदूर की दीवार पर चिपकाकर सेंका जाता है. तंदूर की आंच से नान ऊपर से क्रिस्पी और अंदर से फूली-फूली, नरम बनती है. उस पर लगा मक्खन इसकी खुशबू दोगुनी कर देता है.

गोश्त को देसी घी, दही, भुना प्याज,अदरक-लहसुन और 15 से ज्यादा साबुत गरम मसालों में घंटों धीमी आंच पर पकाया जाता है. ग्रेवी इतनी गाढ़ी होती है कि नान पर लपेटते ही चिपक जाए. मटन इतना गल जाता है कि हड्डी से खुद अलग हो जाए. तीखा, चटपटा और शाही स्वाद हर निवाले में महसूस होता है. संभल की दीपा सराय, अनूपशहर रोड और कोट गर्बी की पुराने होटल नान गोश्त के लिए मशहूर हैं. दोपहर 12 बजे से देर रात तक यहां तंदूर की आग और गोश्त की खुशबू उड़ती रहती है. गरमागरम नान को हाथ से तोड़ो, गाढ़ी ग्रेवी वाले गोश्त में डुबोकर खाओ साथ में सिरके वाले प्याज, हरी मिर्च का अचार और नींबू हो तो स्वाद दोगुना हो जाता है। आखिर में मीठी लस्सी या फिरनी से मुंह मीठा करना न भूलें.

संभल का असली स्वाद चाहिए तो हलीम और बिरयानी जरूर चखिए. यहां दोनों को लकड़ी की धीमी आंच पर घंटों पकाया जाता है. तभी वो असली जायका आता है.इसके साथ ही इसकी खासियत की बात की जाए तो यह गेहूं, दाल, जौ और गोश्त को तांबे के बड़े देग में 8-10 घंटे तक लगातार घोटा जाता है. देसी घी, केसर और खास मसाले इसे लजीज बनाते हैं. ऊपर से तला प्याज, नींबू, हरा धनिया और घी डालकर परोसा जाता है. इतनी मुलायम कि चम्मच से ही घुल जाए. संभल की हलीम और बिरयानी सिर्फ खाना नहीं, सब्र और हुनर की पहचान है. एक बार खाएंगे तो नवाबी स्वाद जिंदगी भर नहीं भूलेंगे.

संभल में शादी समारोह और दावतों का खाना शाही कोरमा के बिना अधूरा है. यह यहां के पारंपरिक खान-पान का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है.इसके साथ ही दानेदार ग्रेवी और भीनी खुशबू वाला यह मटन या चिकन कोरमा धीमी आंच पर घंटों पकता है. देसी घी, भुना प्याज, दही, काजू का पेस्ट और शाही गरम मसाले इसे लाजवाब बनाते हैं. गोश्त इतना नरम होता है कि जुबान से छूते ही टूट जाए.हर बड़ी दावत, निकाह और ईद पर तंदूरी रोटी या शीरमाल के साथ शाही कोरमा जरूर परोसा जाता है. यह सिर्फ नॉनवेज नहीं, संभल की मेहमाननवाजी और नवाबी तहजीब का स्वाद है.

संभली सीख कबाब बारीक पिसे मटन कीमे से बने, लंबे और पतले कबाब हैं. इन्हें लोहे की सींक पर लपेटकर सुलगते कोयले पर धीमी आंच में सेंका जाता है.कीमे में कच्चा पपीता, भुने बेसन, देसी घी और 12 तरह के खड़े मसाले मिलाए जाते हैं. इससे कबाब अंदर से रसीले, जूसी और बाहर से हल्के स्मोकी बनते हैं. मुंह में रखते ही घुल जाते हैं.इसके साथ ही
यह चौधरी सराय, कोट पूर्वी और नखासा बाजार की पुरानी दुकानों पर शाम 5 बजे के बाद सबसे बढ़िया मिलते हैं.इनका तीखा, चटपटा और शाही स्वाद होता है. रुमाली रोटी, हरी चटनी और प्याज के साथ खाने पर इसका असली मजा आता है. संभल का यह स्वाद एक बार चख लें तो भूल नहीं पाएंगे.

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