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-गौशाला की व्यवस्थाओं से खुश हुए प्रभारी मंत्री, गाजियाबाद मॉडल की खुलकर की सराहना

-1825 गोवंशों की देखभाल देखकर प्रभावित हुए धर्मपाल सिंह, अधिकारियों की पीठ थपथपाई
-गोबर से बन रहे प्राकृतिक उत्पादों को बताया आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का मॉडल
-गौ सेवकों से किया सीधा संवाद, परिवारों के कल्याण पर भी दिया विशेष जोर

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री तथा जनपद गाजियाबाद के प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह ने गुरुवार को नगर निगम द्वारा संचालित गौशाला का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने गौशाला में गोवंशों के संरक्षण, देखभाल और उनके लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की सराहना करते हुए इसे एक सराहनीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि गोसेवा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशील प्रशासन का भी प्रतीक है। गौशाला पहुंचने पर महापौर सुनीता दयाल, जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़, अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, उपमुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. अनुज कुमार सिंह, पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. आशीष त्रिपाठी सहित निगम एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रभारी मंत्री का स्वागत किया। इस अवसर पर महापौर द्वारा उन्हें गौ माता का प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। निरीक्षण के दौरान प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह ने विधिवत गौ पूजन किया तथा गोवंशों को हरा चारा और गुड़ खिलाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। गौशाला में मौजूद गोवंशों के स्वास्थ्य, खानपान और रखरखाव की व्यवस्थाओं का उन्होंने बारीकी से निरीक्षण किया।

अधिकारियों से संवाद करते हुए उन्होंने गोवंशों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और भविष्य की योजनाओं की जानकारी भी प्राप्त की। अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार ने प्रभारी मंत्री को अवगत कराया कि महापौर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त के निर्देशन में वर्तमान में गौशाला में कुल 1825 गोवंशों का संरक्षण किया जा रहा है। इनमें 900 नंदी और 925 गाय शामिल हैं। बढ़ती संख्या को देखते हुए गौशाला के विस्तार का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। गोवंशों के रहने, खाने और चिकित्सा संबंधी व्यवस्थाओं को व्यवस्थित एवं आधुनिक बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रभारी मंत्री ने गौशाला परिसर में संचालित प्राकृतिक पेंट परियोजना का भी निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने उन्हें गोबर से तैयार किए जा रहे प्राकृतिक पेंट और अन्य उपयोगी उत्पादों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मंत्री ने इस पहल को आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि गोबर आधारित उत्पादों को बढ़ावा देकर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं तथा पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिल सकती है।

निरीक्षण के दौरान प्रभारी मंत्री ने गौशाला में कार्यरत गौ सेवकों से भी सीधे संवाद किया। उन्होंने उनकी कार्य परिस्थितियों, वेतन व्यवस्था और अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि सभी गौ सेवकों का वेतन सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाता है। इस व्यवस्था पर संतोष व्यक्त करते हुए मंत्री ने कहा कि गौ सेवकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनके परिवारों के कल्याण एवं आवश्यकताओं का भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने निगम अधिकारियों को निर्देश दिए कि गौशाला की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए तथा गोवंशों की देखभाल में किसी प्रकार की कमी न रहे। साथ ही गोबर से बनने वाले उत्पादों के प्रति आमजन को जागरूक करने और उन्हें स्वरोजगार से जोडऩे के लिए भी व्यापक अभियान चलाने पर जोर दिया।

गाजियाबाद नगर निगम द्वारा संचालित गौशाला की व्यवस्थाओं को देखकर प्रभारी मंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की और महापौर तथा निगम अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यदि इसी प्रकार समर्पण और संवेदनशीलता के साथ कार्य किया जाता रहा तो गाजियाबाद की यह गौशाला प्रदेश में एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित हो सकती है। निरीक्षण के दौरान उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों को उन्होंने गोसंरक्षण और पशु कल्याण के क्षेत्र में और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

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