Sultanpur Historical Building: उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर जिला अपने दामन में कई ऐतिहासिक कहानियों और अनमोल धरोहरों को समेटे हुए है. ब्रिटिश हुकूमत के दौर की याद दिलाती ऐसी ही एक गवाह है सुल्तानपुर के दरियापुर में स्थित 110 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत. संरक्षण के अभाव में आज भले ही यह अनमोल विरासत खंडहर में तब्दील हो रही है, लेकिन इसकी दीवारें और अनोखी वास्तुकला आज भी लोगों को हैरान करती हैं. आइए जानते हैं सुल्तानपुर की इस खास ऐतिहासिक धरोहर का सफरनामा और क्यों यह आज भी जिला प्रशासन की अनदेखी के बीच अपनी मजबूती की कहानी खुद बयां कर रही है.
110 साल पुरानी है यह ब्रिटिशकालीन बिल्डिंग
इस बिल्डिंग के संरक्षक और मालिक सुरेंद्रनाथ सिंह ने ‘लोकल 18’ से बातचीत में बताया कि यह पूरा परिसर (मकान सहित) उनके पिता ने शांति देवी श्रीवास्तव से खरीदा था. इसका निर्माण लगभग साल 1916-1917 के आसपास किया गया था. इस खंडहर हो रही इमारत में ब्रिटिश काल के चौड़े और लंबे ‘खपरा-नरिया’ लगाए गए हैं, जिनकी बनावट और आकृति सामान्य देसी खपड़ों की तुलना में काफी अलग है. मजबूती के मामले में ये खपरा-नरिया बेहद बेजोड़ होते थे. इसका जीता-जागता उदाहरण यह है कि इस खपड़ा-नरिया वाली बिल्डिंग को बने हुए लगभग 110 साल हो चुके हैं, आज इसकी दीवारें तो धीरे-धीरे गिर रही हैं, लेकिन इसकी छत पर लगे खपरा-नरिया वैसे के वैसे ही सलामत हैं.
सुल्तानपुर शहर की एक अमूल्य धरोहर
सुल्तानपुर शहर में जहां आज के समय में लगभग 100% पक्के मकान बन चुके हैं, वहीं 100 साल से भी अधिक पुरानी यह खपरा-नरिया और प्राचीन देसी स्टाइल से बनी अनूठी आकृति सुल्तानपुर की ऐतिहासिक धरोहरों में प्रमुखता से शामिल की जा सकती है. चूंकि अब ऐसी पारंपरिक वास्तुकला धीरे-धीरे पूरी तरह से विलुप्त हो रही है, ऐसे में इस ऐतिहासिक इमारत को तुरंत उचित संरक्षण और देखरेख की अत्यंत आवश्यकता है.
जानिए क्या होता है ‘खपरा-नरिया’ और इसका काम
स्थानीय ग्रामीण योगेश कुमार पांडेय बताते हैं कि खपरा और नरिया मिट्टी से बनाया गया एक ऐसा पारंपरिक उत्पाद है, जो पहले के समय में कच्चे मकानों के सबसे ऊंचे शिखर (छत) पर लगाया जाता था. इसका मुख्य कार्य बारिश के मौसम में लोगों के घरों को पानी की बूंदों से सुरक्षित रखना होता था. इसके साथ ही, मिट्टी से निर्मित होने की वजह से गर्मी के तपते मौसम में इसमें भीषण धूप को सहन करने की गजब की क्षमता होती थी, जिसके कारण ये कच्चे मकान गर्मियों में भी अंदर से बिल्कुल ठंडे रहते थे.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें
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