<strong>Purushottam Maas Panchami 2026: </strong>हिंदू पंचांग में 'अधिक पंचमी' का संबंध अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) से है। जब अधिक मास के कृष्ण पक्ष या शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि आती है, तो उसे 'अधिक पंचमी' कहा जाता है। चूंकि अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए इस पूरे महीने की हर तिथि का महत्व सामान्य दिनों से कहीं अधिक बढ़ जाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/adhikmaas-guru-pradosh-vrat-2026-mahatva-puja-vidhi-katha-126052000039_1.html" target="_blank">3 वर्ष बाद आया अधिकमास का गुरु प्रदोष, जानिए महत्व और कथा</a></strong>
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक पंचमी के दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, जप, दान और पुण्य कर्म करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है। यह दिन आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष माना गया है। कई श्रद्धालु इस दिन गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और गरीबों को दान देकर पुण्य अर्जित करते हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अधिक पंचमी पर किए गए धार्मिक उपाय ग्रह दोषों को शांत करने और जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक माने जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, जप और पूजा कई गुना फल प्रदान करता है। इसलिए अधिक पंचमी को पुण्य संचय और ईश्वर भक्ति का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।
- अधिक पंचमी का महत्व
- अधिक पंचमी पर क्या करें? जानें पूजा विधि और उपाय
आइए यहां जानते हैं अधिक पंचमी का क्या महत्व है और इस दिन क्या करना फलदायी होता है। पढ़ें अधिक पंचमी का महत्व, पूजन की विधि और उपाय…
अधिक पंचमी का महत्व
हिंदू धर्म में अधिक मास को बहुत पवित्र माना गया है। इस महीने में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना होकर मिलता है।
<strong>दोषों से मुक्ति:</strong> इस दिन भगवान विष्णु (श्रीहरि) और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन के सभी कष्टों, पापों और कुंडली के दोषों से मुक्ति मिलती है।
<strong>अक्षय फल की प्राप्ति: </strong>मान्यता है कि अधिक पंचमी के दिन किए जाने वाले दान-पुण्य और व्रत का फल कभी नष्ट नहीं होता, वह अक्षय बना रहता है।
<strong>मानसिक शांति:</strong> इस तिथि पर पूजा-पाठ और ध्यान करने से मानसिक तनाव दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
अधिक पंचमी पर क्या करें? जानें पूजा विधि और उपाय
यदि आप अधिक पंचमी के दिन विशेष लाभ पाना चाहते हैं, तो निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं:<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/when-will-adhikmas-end-126052100023_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास 2026: कब समाप्त होगा अधिकमास?</a></strong>
1. श्रीहरि विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले फल, चंदन और तुलसी दल यानी तुलसी के पत्ते अर्पित करें।
माता लक्ष्मी को मखाने की खीर या सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
2. महामंत्रों का जाप
इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना या नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है:
- 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय'
- 'ॐ श्री विष्णवे नमः'
3. दीपदान का विशेष महत्व
अधिक मास में दीपदान (दीपक जलाना) सबसे उत्तम माना गया है। पंचमी की शाम को घर के मंदिर में, तुलसी के पौधे के पास और संभव हो तो किसी पवित्र नदी या पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जरूर जलाएं।
4. दान-पुण्य
पंचमी तिथि पर भूखे लोगों को भोजन कराना, पीले अनाज- जैसे चने की दाल, पीले कपड़े या केले का दान करने से बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है और भाग्य का साथ मिलता है।
<strong>ध्यान दें: </strong>अधिक मास (मलमल मास) में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक व शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इसलिए अधिक पंचमी के दिन केवल ईश्वर की भक्ति, साधना, व्रत और दान-पुण्य पर ही ध्यान देना चाहिए।
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