राज्यसभा चुनाव: NDA की ताकत 150 के पार
10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव के समीकरण पूरी तरह NDA के पक्ष में झुकते नजर आ रहे हैं. विधानसभाओं की मौजूदा सदस्य संख्या के आधार पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन 24 में से NDA के खाते में 14 से 16 सीटें आ सकती हैं, जबकि INDIA अलायंस को महज 7 से 9 सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है.
18 जून को किन राज्यों में राज्यसभा चुनाव?
| राज्य | कुल सीटें | NDA (संभावित) | INDIA / अन्य (संभावित) |
|---|---|---|---|
| आंध्र प्रदेश | 4 | 4 (TDP-BJP) | 0 |
| गुजरात | 4 | 4 | 0 |
| मध्य प्रदेश | 3 | 2 | 1 (कांग्रेस) |
| राजस्थान | 3 | 2 | 1 (कांग्रेस) |
| छत्तीसगढ़ | 2 | 1 | 1 (कांग्रेस) |
| हरियाणा | 2 | 1 | 1 (कांग्रेस) |
| कर्नाटक | 2 | 1 | 1 (कांग्रेस) |
| झारखंड | 2 | 1 | 1 (कड़ी लड़ाई) |
| मणिपुर | 1 | 1 | 0 |
| मेघालय | 1 | 1 (NDA समर्थित) | 0 |
| कुल सीटें | 24 | 15-16 | 8-9 |
यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो राज्यसभा में NDA की ताकत अकेले 150 के पार पहुंच जाएगी.
DMK का साथ और TMC में भगदड़
राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत (164 सीटें) के आंकड़े को छूने के लिए बीजेपी को क्षेत्रीय पार्टियों की मदद की जरूरत होगी और इसके रास्ते भी खुलते दिख रहे हैं.
DMK का बदला रुख: तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके के बीच बढ़ती कड़वाहट के बाद डीएमके अब राष्ट्रीय मुद्दों पर कांग्रेस से अलग लाइन लेती दिख रही है. राज्यसभा में डीएमके के पास 10 सांसद हैं. यदि डीएमके केंद्र को मुद्दों के आधार पर समर्थन देती है तो विपक्ष पूरी तरह बिखर जाएगा. ममता की पार्टी में बिखराव: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर भारी असंतोष और भगदड़ की स्थिति है. पंजाब में राघव चड्ढा प्रकरण की तरह ही टीएमसी के भीतर भी सांसदों के टूटने का खतरा मंडरा रहा है. टीएमसी के पास वर्तमान में 13 राज्यसभा सांसद हैं. यदि इनमें से कुछ सांसद एनडीए के पाले में आते हैं या मुद्दों पर सरकार का साथ देते हैं, तो उच्च सदन में सरकार की ताकत को कोई चुनौती नहीं दे पाएगा.
राज्यसभा में तो राह आसान, पर लोकसभा में कैसे बनेगी बात?
राज्यसभा में संख्या बल मजबूत होने से केंद्र सरकार को बड़े विधायी एजेंडे और संवैधानिक संशोधनों को पारित कराने में अभूतपूर्व मदद मिलेगी. लेकिन असली चुनौती ‘निचली अदालत’ यानी लोकसभा में खड़ी होती है, जहां गठबंधन सरकार को चलाने के लिए सहयोगियों को साधकर रखना अनिवार्य होता है.
इस एंगल से देखें तो क्षेत्रीय दलों की बदलती राजनीति बीजेपी के लिए लोकसभा में भी संजीवनी बन सकती है. विपक्षी एकजुटता (INDIA गठबंधन) के कमजोर होने का सीधा मतलब है कि लोकसभा में भी सरकार के खिलाफ कोई संयुक्त या आक्रामक रणनीति काम नहीं कर पाएगी. द्रमुक जैसे दल अब केंद्र के साथ टकराव की जगह राज्यों के वित्तीय हितों और विकास परियोजनाओं के नाम पर मुद्दों के आधार पर समर्थन देने की नीति अपना रहे हैं. ममता बनर्जी की पार्टी में होने वाली संभावित टूट यदि लोकसभा सांसदों तक पहुंचती है तो निचले सदन में विपक्ष का संख्या बल वैसे ही कम हो जाएगा. कुल मिलाकर, राज्यसभा में बढ़ते आंकड़े और लोकसभा में बिखरता विपक्ष, दोनों ही मोर्चों पर बीजेपी के लिए राह आसान कर रहे हैं.
सवाल-जवाब
18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव में किस गठबंधन को बढ़त मिलने की उम्मीद है?
18 जून को 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव में एनडीए (NDA) को 14 से 16 सीटें मिलने का अनुमान है, जिससे उच्च सदन में उसकी कुल सदस्य संख्या 150 के पार जा सकती है.
तमिलनाडु की क्षेत्रीय राजनीति का असर संसद के समीकरणों पर कैसे पड़ सकता है?
तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों में आई खटास के बाद डीएमके अब राष्ट्रीय मुद्दों पर अलग रुख अपना रही है. डीएमके के पास 10 राज्यसभा सांसद हैं, जिनका रुख संसद में विपक्ष की एकजुटता को कमजोर कर सकता है.
पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति का फायदा बीजेपी को राज्यसभा में कैसे मिलेगा?
पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद टीएमसी के भीतर भारी असंतोष है. यदि टीएमसी के विधायकों और सांसदों में बिखराव होता है, तो आगामी राज्यसभा चुनावों में बीजेपी को बंगाल से अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने में सीधा फायदा मिलेगा.
राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए एनडीए को कितने सांसदों की जरूरत है?
राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सांसदों की आवश्यकता होती है. यदि एनडीए आगामी चुनावों के बाद 150 का आंकड़ा पार करता है, तो डीएमके (10) और टीएमसी (13) के संभावित समर्थन या बिखराव से यह आंकड़ा आसानी से हासिल हो सकता है.
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