Mohammed Rafi Hit Song: संगीतकार नौशाद जब 1968 की फिल्म ‘संघर्ष’ के एक गाने पर काम कर रहे थे, तब स्टूडियो में उनका सामना एक उम्रदराज महिला से हुआ जो तीन लड़कियों के साथ कोरस गाने के लिए पहुंची थीं. जब नौशाद साहब को उनका परिचय मिला, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. वह एक महान गायिका थीं. नौशाद ने उनके रुतबे को देखते हुए जब उनसे कोरस में गवाने से इनकार किया, तो वे गिड़गिड़ाते हुए बोलीं कि मुझे भीख मांगने से बचा लो. आखिरकार, उस महान गायिका ने कोरस में गाना गाया. बाद में नौशाद ने उनसे ‘पाकीजा’ फिल्म में एक यादगार गीत भी गवाया.
नई दिल्ली: 1968 में दिलीप कुमार और वैजयंती माला की फिल्म ‘संघर्ष’ आई थी, जिसके गाने महान संगीतकार नौशाद ने कंपोज किए थे. नौशाद फिल्म ‘संघर्ष’ के संगीत पर जब काम कर रहे थे, तब उन्हें एक गीत मोहम्मद रफी की आवाज में रिकॉर्ड करवाना था. उन्हें गाने में कोरस के लिए 4 लड़कियों की जरूरत थी. जब नौशाद रिकॉर्डिंग स्टूडियो पहुंचे, तो दुविधा में फंस गए. उन्होंने देखा कि यहां तीन लड़कियां हैं और चौथी एक उम्रदराज महिला हैं. उन्होंने तो चार लड़कियों को बुलाया था. उन्हें कुछ समझ नहीं आया. (फोटो साभार: YouTube/videograb)
नौशाद साहब ने फिर अपने असिस्टेंट से पूछा कि मैंने तो चार लड़कियों को बुलाया था, मगर यहां तीन लड़कियां हैं और एक उम्रदराज महिला. यह है कौन? जब असिस्टेंट ने नौशाद को उनका नाम बताया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. नौशाद चौंक गए कि इतनी महान गायिका कोरस में गाएंगी?
नौशाद साहब को अपने स्ट्रगल के दिन आए जब यह महान गायिका गाना रिकॉर्ड करने पहुंची थीं. वे रिकॉर्डिंग स्टूडियो कार से आई थीं. तब उनका रुतबा इतना बड़ा था कि प्रोड्यूसर ने उनके लिए कार का दरवाजा खोला था. वह पुराना मंजर उनकी आंखों के सामने कौंध रहा था. वे उम्रदराज गायिका के पास पहुंचे और हाथ जोड़कर बोले कि मैं आपको कोरस में इस गीत को नहीं गवा सकता, क्योंकि आपका कद काफी बड़ा है. (फोटो साभार: YouTube/videograb)
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महान गायिका ने नौशाद साहब की झिझक को समझते हुए कहा कि मैं समझती हूं कि आप क्यों मना कर रहे हैं, लेकिन मेरे हालात इस वक्त अच्छे नहीं हैं. मुझे कोरस में गाने दीजिए. नौशाद साहब जब नहीं माने, तो गायिका ने ऐसी बात कही जिसने उनके दिल को झकझोर दिया. (फोटो साभार: YouTube/videograb)
गायिका ने नौशाद साहब से कहा कि क्या आप चाहते हैं कि मैं खान मस्ताना जैसे संगीतकार की तरह माहिम दरगाह पर भीख मांगू. नौशाद को खान मस्ताना के दौर की याद आई. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वे चालीस के दशक के मशहूर गायक और संगीतकार थे. मगर हालातों ने उन्हें भीख मांगने के लिए मजबूर कर दिया था. तब नौशाद साहब ने ही उनकी मदद की थी.
नौशाद ने संगीतकारों के समिति के जरिये खान मस्ताना को 300 रुपये महीना दिलवाया था. नौशाद ने फिर अपनी सोच बदली और गायिका को गाने में कोरस में गवाया. गायिका ने जिस गाने को कोरस में गाया था, वह गाना है- ‘मेरे पैरों में घुंघरू बंधा दे फिर मेरी चाल देख ले.’
गाने ‘मेरे पैरों में घुंघरू बंधा दे’ की रिकॉर्डिंग के बाद सब हैरान थे कि नौशाद साहब किस महिला से इतनी गुफ्तगू कर रहे हैं? नौशाद साहब ने फिर सबको उनका परिचय दिया, तो सब चौंक गए. वे गायिका थीं- राजकुमारी दुबे. वे कभी टॉप की गायिका थीं. नौशाद ने उनसे गाना गवा तो लिया, मगर वादा भी किया कि उनके साथ एक गाना रिकॉर्ड करेंगे. (फोटो साभार: YouTube/videograb)
नौशाद साहब ने अपना वादा निभाया. गुलाम मोहम्मद की मौत के बाद जब उनके हाथ ‘पाकीजा’ लगी, तो उन्होंने उनसे ठुमरी ‘नजरिया की मारी मरी’ गवाया. हालांकि, राजकुमारी दुबे की उस तरह मदद नहीं हो सकी, जिसकी उन्हें दरकार थी. साल 2000 में जब महान गायिका का निधन हुआ, तब उनके हालात अच्छे नहीं थे.
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