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-जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम की कार्यशैली से चमकी विभागीय उपलब्धि, ई-लॉटरी में मिले 920 आवेदन
-16 दुकानों के व्यवस्थापन से सरकार को करोड़ों का लाभ, अगले वित्तीय वर्ष में 35.70 करोड़ रुपये राजस्व का अनुमान
-आबकारी निरीक्षकों की टीम ने दिखाई उत्कृष्ट कार्यकुशलता, चुनौती को अवसर में बदलकर पेश की मिसाल

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार की आबकारी नीति 2026-27 के अंतर्गत आयोजित ई-लॉटरी प्रक्रिया के पांचवें चरण में गाजियाबाद जनपद ने उल्लेखनीय सफलता हासिल करते हुए राजस्व सृजन का नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। जिले में आबकारी विभाग की सुविचारित रणनीति, प्रभावी प्रबंधन और अधिकारियों की सक्रिय कार्यशैली के चलते न केवल रिकॉर्ड संख्या में आवेदन प्राप्त हुए, बल्कि सरकार को आवेदन शुल्क के रूप में भी करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस चरण में हुई ई-लॉटरी से आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में लगभग 35 करोड़ 70 लाख 68 हजार रुपये का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। इस उपलब्धि के पीछे जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम के नेतृत्व और उनकी टीम की मेहनत को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिस चुनौती को कुछ समय पहले विभाग के लिए चिंता का विषय माना जा रहा था, उसे रणनीतिक सोच और प्रशासनिक दक्षता के बल पर राजस्व वृद्धि के अवसर में बदल दिया गया। यही कारण है कि आबकारी विभाग की इस सफलता की चर्चा विभागीय गलियारों से लेकर प्रशासनिक स्तर तक हो रही है।

दरअसल, पांचवें चरण की ई-लॉटरी से पहले जिले में तीन मॉडल शराब की दुकानें ऐसी थीं, जिनकी लाइसेंस फीस अपेक्षाकृत अधिक होने के कारण आवेदक सामने नहीं आ रहे थे। इससे विभाग को संभावित राजस्व हानि का खतरा था। यदि इन दुकानों का व्यवस्थापन नहीं हो पाता तो सरकार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता था। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम ने पूरी स्थिति का गहन अध्ययन कराया और राजस्व संतुलन की नई योजना तैयार की। उन्होंने विभागीय टीम के साथ मिलकर दुकानों के पुनर्व्यवस्थापन की रणनीति बनाई। इस योजना के तहत तीन मॉडल शॉप के साथ 12 देशी शराब दुकानें और एक कम्पोजिट शॉप को शामिल करते हुए कुल 16 दुकानों के लिए प्रथम चरण में ई-लॉटरी प्रक्रिया आयोजित कराई गई। विभाग की यह रणनीति पूरी तरह सफल साबित हुई और सभी 16 दुकानों का व्यवस्थापन सुनिश्चित हो गया। सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इन 16 दुकानों के लिए लगभग 920 आवेदन प्राप्त हुए।

आवेदनकर्ताओं की भारी भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि विभाग द्वारा तैयार की गई योजना व्यवहारिक और प्रभावी थी। इन आवेदनों से सरकार को लगभग 5 करोड़ 61 लाख 25 हजार रुपये का राजस्व केवल आवेदन शुल्क के रूप में प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त इन दुकानों से वर्ष 2026-27 में लगभग 35 करोड़ 70 लाख 68 हजार रुपये के राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है, जो विभाग की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम ने इस सफलता का श्रेय अपनी पूरी टीम को देते हुए कहा कि यह सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा आबकारी विभाग का उद्देश्य केवल राजस्व प्राप्त करना नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और व्यवस्थित ढंग से संचालित करना भी है। हमारी टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्य करते हुए चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को अवसर में बदला है।

ई-लॉटरी प्रक्रिया में प्राप्त रिकॉर्ड आवेदन यह दर्शाते हैं कि विभाग की कार्यप्रणाली पर लोगों का विश्वास बढ़ा है। भविष्य में भी हम शासन की मंशा के अनुरूप राजस्व वृद्धि और पारदर्शिता के लिए इसी प्रकार कार्य करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि गाजियाबाद जनपद प्रदेश के प्रमुख राजस्व देने वाले जिलों में शामिल है और विभाग लगातार ऐसे प्रयास कर रहा है, जिससे सरकार के राजस्व में वृद्धि हो तथा सभी प्रक्रियाएं पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित हों। इस सफलता में आबकारी निरीक्षक मनोज शर्मा, चमन सिंह, कीर्ति सिंह, अखिलेश कुमार, अनुज वर्मा, चन्द्रजीत सिंह और दिनेश सिंह की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। अधिकारियों ने जमीनी स्तर पर लगातार निगरानी रखते हुए दुकानों के व्यवस्थापन, आवेदनों के प्रचार-प्रसार और प्रक्रिया के सफल संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

टीम के समन्वित प्रयासों ने यह साबित कर दिया कि यदि नेतृत्व मजबूत हो और टीम समर्पित भाव से कार्य करे तो किसी भी चुनौती को सफलता में बदला जा सकता है। गाजियाबाद आबकारी विभाग की यह उपलब्धि न केवल राजस्व वृद्धि का उदाहरण है, बल्कि बेहतर प्रशासनिक प्रबंधन, दूरदर्शी नेतृत्व और टीमवर्क का भी उत्कृष्ट मॉडल बनकर सामने आई है। जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम और उनकी टीम ने यह साबित कर दिया है कि नवाचार, रणनीति और प्रतिबद्धता के बल पर सरकारी विभाग भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। यह सफलता आने वाले समय में अन्य जनपदों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

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