90 के दशक में बॉलीवुड में कई नए चेहरे फिल्म इंडस्ट्री में आए. कई चेहरे तो आज भी बॉलीवुड में राज कर रहे हैं तो कई हीरो समय की धारा में बह गए. कुछ हीरो रातोंरात चमके और रातोंरात इंडस्ट्री से गायब भी हो गए. बॉलीवुड की चमक-दमक भरी जिंदगी ऐसी ही है. बॉलीवुड के दो हीरो शुरुआती फिल्मों से पर्दे पर छा गए लेकिन बाद में फिल्में लगातार फ्लॉप हुई तो काम मिलना बंद हो गया. दोनों घर में बैठने को मजबूर हुए. फिर किस्मत ने पलटा खाया. आज दोनों फिर से इंडस्ट्री में राज कर रहे हैं.
बॉलीवुड में एक फिल्म से करियर चमक उठता है तो एक गलती से करियर भी डूब जाता है. फिल्म इंडस्ट्री बहुत ही अनिश्चितताओं से भरी है. 90 के दशक में दो हीरो ने बॉलीवुड में डेब्यू किया. डेब्यू करते ही दोनों छा गए. रातोंरात दोनों चर्चा में आए. समय एक जैसा नहीं रहता. फ्लॉप फिल्मों का दौर शुरू हुआ तो दोनों हीरो से डायरेक्टर-प्रोड्यूसर दूर भागने लगे. दोनों ही सितारों को काम मिलना बंद हो गया. घर में बैठना पड़ा. किस्मत ने एक बार फिर से साथ दिया. दोनों की किस्मत फिर से चमकी. हम बात कर रहे हैं बॉबी देओल और अक्षय खन्ना की. दोनों ने 90 के दशक में बॉलीवुड में डेब्यू किया था.
सबसे पहले बात करते हैं ‘ही मैन धर्मेंद्र’ के छोटे बेटे बॉबी देओल की जिन्होंने 6 अक्टूबर 1995 में आई फिल्म ‘बरसात’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. डेब्यू फिल्म में बॉबी देओल के अपोजिट ट्विकंल खन्ना थीं. डेब्यू फिल्म सुपरहिट निकली. डायरेक्शन, स्टोरी-स्क्रीनप्ले-डायलॉग सबकुछ राजकुमार संतोषी ने लिखे थे. प्रोड्यूसर धर्मेंद्र थे. फिल्म की कामयाबी में सबसे बड़ा हाथ नदीम-श्रवण के म्यूजिक का था. गीतकार समीर थे. डेब्यू फिल्म से ही बॉबी देओल सबके फेवरेट बन गए.
बॉबी देओल ने 1998 तक बॉलीवुड में तहलका मचा दिया. 1997 में गुप्त और 1998 में सोल्जर जैसी फिल्मों से अपने स्टारडम के ग्राफ को और मजबूत किया. कौन जानता था कि बॉबी के सितारे इतनी जल्दी गर्दिश में चले गए. 1998 में ‘सोल्जर’ फिल्म के बाद अफलता का ऐसा दौर शुरू हुआ कि बॉबी देओल एक हिट फिल्म के लिए तरस गए.
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इस दौरान बॉक्स ऑफिस पर फिल्मों के फ्लॉप होने का सिलसिला चलता रहा. एक नजर उनकी फ्लॉप फिल्मों पर डालें तो ‘दिल्लगी’, ‘हम तो मुहब्बत करेगा’, ‘आशिक’, ‘अजनबी’, ‘क्रांति’, ‘चोर मचाए शोर’, ‘किस्मत’, ‘अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो’, ‘हम तुमको प्यार है’ जैसी फिल्में कब आई और कब उतर गईं, किसी को पता ही नहीं चला. पूरे एक दशक तक बॉबी देओल ने असफलता का दौर देखा. 2011 में उनके होम प्रोडक्शन की फिल्म ‘यमला पगला दीवाना’ ने जरूर थोड़ा सहारा दिया लेकिन उनका स्टारडम नहीं लौटा पाई.
लगातार मिली असफलता से बॉबी देओल डिप्रेशन के शिकार हो गए. इंडस्ट्री में काम मिलना बंद हो गया. ऊपर से शराब के नशे ने उनके परिवार को और मुश्किल में डाला. ऐसे में बॉबी की पत्नी तान्या ने घर चलाया. उन्होंने धैर्य से काम लिया. बॉबी देओल ने भी 2019 में अपना ईगो दूर रखकर इंडस्ट्री से खुलकर काम मांगा. उनकी अपील का असर हुआ. 2019 से उन्हें फिर से काम मिलना शुरू हुआ. 2019 की हाउसफुल 4 में उनकी एक्टिंग की खूब तारीफ हुई. 2022 का साल बॉबी देओल के करियर का टर्निंग प्वॉइंट रहा. रनबीर कपूर की एनिमल फिल्म में चंद मिनट के रोल में बॉबी देओल ने महफिल लूट ली. बॉबी ने दिल की आवाज सुनी. एक्टिंग को चुना. रोल को अहमियत देना शुरू किया. भले ही निगेटिव रोल मिले लेकिन उन भूमिकाओं में शानदार एक्टिंग की.
बॉबी देओल से मिलती-जुलती कहानी सुपरस्टार विनोद खन्ना के बेटे अक्षय खन्ना की है. अक्षय खन्ना ने 4 अप्रैल 1977 में आई फिल्म ‘हिमालय पुत्र’ से बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत की थी. मूवी में अक्षय खन्ना, अंजला झावेरी, विनोद खन्ना, हेमा मालिनी, डैनी डेन्जोंगपा नजर आए थे. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही, फिर भी उन्हें बेस्ट मेल डेब्यू का स्क्रीन अवॉर्ड भी मिला था. 1997 में ही आई ‘बॉर्डर’ में अक्षय खन्ना को सराहना मिली. फिर 1999 ‘ताल’ फिल्म में उनका काम सराहा गया.
‘दिल चाहता है’ (2001) जैसी फिल्मों ने अक्षय खन्ना को स्टार बनाया. फिर 2003 में प्रियदर्शन की फिल्म ‘हंगामा’ में वो जीतू वीडियोकॉन के रोल में छा गए. 2002 में आई एक्शन-थ्रिलर फिल्म ‘हमराज’ और ‘दीवानगी’ ने उनके स्टारडम को संभाला जरूर लेकिन ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उतनी सफल नहीं रहीं. 2002 के बाद से ही अक्षय खन्ना का बुरा दौर शुरू हुआ. गांधी माय फादर (2007), रेस (2008) और आक्रोश (2010) में उनकी एक्टिंग की खूब तारीफ हुई लेकिन फिल्में फ्लॉप रहीं. अगले 9 साल अक्षय खन्ना ने एक तरह से गुमनामी में गुजारे.
‘दिल चाहता है’ (2001) जैसी फिल्मों ने अक्षय खन्ना को स्टार बनाया. फिर 2003 में प्रियदर्शन की फिल्म ‘हंगामा’ में वो जीतू वीडियोकॉन के रोल में छा गए. 2002 में आई एक्शन-थ्रिलर फिल्म ‘हमराज’ और ‘दीवानगी’ ने उनके स्टारडम को संभाला जरूर लेकिन ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उतनी सफल नहीं रहीं. 2002 के बाद से ही अक्षय खन्ना का बुरा दौर शुरू हुआ. गांधी माय फादर (2007), रेस (2008) और आक्रोश (2010) में उनकी एक्टिंग की खूब तारीफ हुई लेकिन फिल्में फ्लॉप रहीं. अगले 9 साल अक्षय खन्ना ने एक तरह से गुमनामी में गुजारे.
अक्षय खन्ना और बॉबी देओल के करियर में कई समनाताएं हैं. दोनों ने 90 के दशक में अपना करियर शुरू किया. दोनों ने 2019 से कमबैक किया. बॉबी देओल की तरह अक्षय खन्ना ने भी 10 से ज्यादा समय तक बुरा दौर देखा. 2019 से एक बार फिर से उनकी किस्मत ने पलटा खाया. यह फिल्म थी सेक्शन 375. फिर 2022 में दृश्यम 2 में कमाल की एक्टिंग से दिल जीत लिया. 2025 में अक्षय खन्ना ने ‘छावा’ और ‘धुरंधर’ जैसे फिल्मों से तहलका मचा दिया. अक्षय खन्ना को भी बॉबी देओल की तरह निगेटिव रोल्स में कामयाबी मिली. 5 दिसंबर 2025 में ‘धुरंधर’ में उन्होंने रहमान डकैत का कालजयी किरदार निभाया. उम्मीद है कि आगे भी अक्षय खन्ना अपनी अदाकारी से दर्शकों का दिल जीतते रहेंगे.
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