-‘जब बाजार शांत दिखता है, तभी बनते हैं सबसे बड़े अवसर’, 18 वर्षों के अनुभव के आधार पर निवेशकों को सलाह
-बचत खाते और सावधि जमा की सीमित वृद्धि पर उठाए सवाल, महंगाई और कर के प्रभाव को समझने की दी सीख
-‘आज जो स्तर सामान्य दिख रहे हैं, वही कल सुनहरे अवसर साबित हो सकते हैं: रविंद्र तिवारी
उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली। पिछले कुछ वर्षों में सोना, चांदी और अचल संपत्ति ने निवेशकों को शानदार प्रतिफल देकर नई ऊंचाइयों को छुआ है। इन परिसंपत्तियों में आई तेज़ी ने जहां निवेशकों की संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि की, वहीं एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि अधिकांश लोगों का ध्यान इनकी ओर तब गया, जब इनके मूल्य पहले ही रिकॉर्ड स्तरों तक पहुंच चुके थे। अब वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि जिस प्रकार अन्य परिसंपत्तियों ने चुपचाप नई ऊंचाइयां हासिल कीं, उसी प्रकार भारतीय शेयर बाजार भी आने वाले वर्षों में निवेशकों को सकारात्मक आश्चर्य दे सकता है। 18 वर्षों के अनुभव वाले वित्तीय सलाहकार रविंद्र तिवारी का कहना है कि निवेश की दुनिया में सबसे बड़े अवसर अक्सर उस समय पैदा होते हैं, जब बाजार को लेकर उत्साह कम और धैर्य अधिक होता है। उनका मानना है कि वर्तमान समय में निवेशकों को केवल पारंपरिक बचत के साधनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण के दृष्टिकोण से संतुलित और समझदारीपूर्ण निवेश रणनीति अपनानी चाहिए।
रविंद्र तिवारी ने कहा कि आज भी बड़ी संख्या में लोग अपनी अधिकांश पूंजी बचत खाते और सावधि जमा जैसी पारंपरिक योजनाओं में रखते हैं। हालांकि ये साधन सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन बढ़ती महंगाई और कर व्यवस्था को देखते हुए इनसे मिलने वाला वास्तविक प्रतिफल काफी सीमित हो सकता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बचत खातों पर औसतन 2.5 से 4 प्रतिशत तक तथा सावधि जमा पर लगभग 6 से 7 प्रतिशत तक वार्षिक ब्याज मिल रहा है। उन्होंने कहा कि निवेशक अक्सर केवल घोषित ब्याज दर को देखकर संतुष्ट हो जाते हैं, जबकि वास्तविक तस्वीर इससे अलग होती है। बचत खाते और सावधि जमा से प्राप्त ब्याज निवेशक की आय में जुड़ जाता है, जिस पर आयकर देय होता है। यदि कोई व्यक्ति 20 प्रतिशत या 30 प्रतिशत कर वर्ग में आता है तो कर कटौती के बाद उसकी वास्तविक आय और भी कम रह जाती है। रविंद्र तिवारी के अनुसार यदि किसी निवेशक को सावधि जमा पर 7 प्रतिशत ब्याज प्राप्त होता है तो 20 प्रतिशत कर वर्ग में उसका वास्तविक प्रतिफल लगभग 5.6 प्रतिशत और 30 प्रतिशत कर वर्ग में लगभग 4.9 प्रतिशत रह जाता है।
इसी प्रकार बचत खाते पर 4 प्रतिशत ब्याज मिलने की स्थिति में 20 प्रतिशत कर वर्ग वाले निवेशक को लगभग 3.2 प्रतिशत और 30 प्रतिशत कर वर्ग वाले निवेशक को लगभग 2.8 प्रतिशत का वास्तविक प्रतिफल ही प्राप्त होता है। ऐसे में महंगाई की दर को शामिल करने पर पूंजी की वास्तविक क्रय शक्ति में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि निवेश का मूल उद्देश्य केवल धन सुरक्षित रखना नहीं, बल्कि समय के साथ उसकी क्रय शक्ति और मूल्य में वृद्धि करना होना चाहिए। यही कारण है कि निवेशकों को विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों की भूमिका को समझते हुए दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। रविंद्र तिवारी ने बताया कि ऐतिहासिक रूप से सोने ने लंबी अवधि में लगभग 8 से 12 प्रतिशत तक, चांदी ने 8 से 15 प्रतिशत तक तथा शेयर आधारित निवेश और म्यूचुअल फंडों ने कई अवधियों में 15 से 18 प्रतिशत या उससे अधिक का प्रतिफल देने की क्षमता दिखाई है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी निवेश में भविष्य के प्रतिफल की गारंटी नहीं होती और निवेशकों को अपने जोखिम प्रोफाइल तथा वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में सोना, चांदी और अचल संपत्ति की तेजी को अधिकांश लोगों ने तब पहचाना, जब वे पहले ही अपने उच्चतम स्तरों के आसपास पहुंच चुके थे। यही स्थिति कई बार शेयर बाजार में भी देखने को मिलती है, जहां अवसर पहले आते हैं और चर्चाएं बाद में शुरू होती हैं। रविंद्र तिवारी का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता, बढ़ती आय, डिजिटल विस्तार, बुनियादी ढांचे में निवेश और कॉरपोरेट क्षेत्र की मजबूती को देखते हुए भारतीय शेयर बाजार में दीर्घकालिक संभावनाएं मजबूत दिखाई देती हैं। उनका कहना है कि यदि भारतीय शेयर बाजार आने वाले वर्षों में अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढऩा शुरू करता है, तो आज के स्तर भविष्य में बेहद आकर्षक नजर आ सकते हैं। उन्होंने निवेशकों को सलाह देते हुए कहा कि बाजार की अल्पकालिक हलचलों से प्रभावित होने के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। नियमित निवेश, अनुशासन और धैर्य ही सफल निवेश की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी हैं।
रविंद्र तिवारी ने कहा, ‘बाजार अवसर पहले देता है और सुर्खियां बाद में बनती हैं। सोना, चांदी और अचल संपत्ति की तेजी को अधिकांश लोगों ने तब पहचाना जब वे नई ऊंचाइयों पर पहुंच चुके थे। यदि भारतीय शेयर बाजार अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढऩा शुरू करता है, तो आज के स्तर भविष्य में बेहद आकर्षक नजर आ सकते हैं। सिर्फ बचत नहीं, बल्कि समझदारी से किया गया निवेश ही भविष्य की समृद्धि का वास्तविक आधार बनता है। ‘उन्होंने अंत में कहा कि बदलते आर्थिक परिवेश में निवेशकों को जागरूक, धैर्यवान और दूरदर्शी बनकर निर्णय लेने चाहिए, क्योंकि भविष्य की वित्तीय मजबूती केवल बचत से नहीं बल्कि सही समय पर किए गए सुविचारित निवेश से निर्मित होती है।
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