ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को सुख, सौभाग्य, धन, विवाह और बुद्धि का कारक माना गया है। 2 जून 2026 को गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करने जा रहे हैं। गुरु का यह गोचर बेहद शुभ माना जाता है, लेकिन इसके सकारात्मक प्रभावों को कई गुना बढ़ाने और कुंडली में गुरु ग्रह को बलवान करने के लिए शास्त्रों में कुछ विशेष उपायों का उल्लेख किया गया है। यदि आप भी इस गोचर काल के दौरान सुख-समृद्धि, करियर में उन्नति और मानसिक शांति चाहते हैं, तो बिना किसी तालिका के नीचे दिए गए इन 7 सरल और बेहद असरदार उपायों को विस्तार से समझें और अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
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1. घर में सत्यनारायण भगवान की पूजा और माता का आशीर्वाद
बृहस्पति का गोचर कर्क राशि में हो रहा है, जिसके स्वामी चंद्रमा हैं और चंद्रमा का सीधा संबंध 'माता' से होता है। इस शुभ अवधि में अपने घर पर भगवान सत्यनारायण की कथा या विशेष पूजा का आयोजन अवश्य करवाएं। पूजा के बाद अपनी माता या माता के समान किसी भी बुजुर्ग महिला (जैसे दादी, नानी या सास) के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें और उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार कोई सुंदर उपहार दें। ऐसा करने से चंद्रमा और गुरु दोनों प्रसन्न होते हैं, जिससे घर का कलह शांत होता है और सुख-शांति आती है।
2. भगवान विष्णु को पीले फूल और विष्णु सहस्रनाम का पाठ
देवगुरु बृहस्पति के आराध्य भगवान विष्णु हैं। गोचर के दौरान प्रतिदिन या विशेषकर गुरुवार के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं। उन्हें पीले रंग के फूल (जैसे गेंदा या पीला गुलाब) अर्पित करें। इसके बाद पूर्ण श्रद्धा के साथ 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ करें। यदि आप पाठ नहीं कर सकते, तो इसे शांत मन से सुन भी सकते हैं। इस उपाय से आर्थिक तंगी दूर होती है और भाग्य का पूरा साथ मिलने लगता है।
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3. नियमित रूप से मस्तक पर केसर का तिलक
कुंडली में गुरु ग्रह को मजबूत करने का सबसे सरल और प्रामाणिक उपाय है तिलक धारण करना। गोचर की इस पूरी अवधि में रोज सुबह पूजा-पाठ करने के बाद थोड़ा सा केसर (Kesar) गंगाजल या शुद्ध पानी में मिलाकर अपने माथे (मस्तक) पर तिलक लगाएं। यदि केसर उपलब्ध न हो, तो आप हल्दी का तिलक भी लगा सकते हैं। मस्तक के बीचों-बीच आज्ञा चक्र होता है, जहाँ केसर का तिलक लगाने से एकाग्रता बढ़ती है, क्रोध शांत होता है और समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ता है।
4. गुरुवार को केले के पेड़ की विशेष पूजा और हल्दी अर्पण
सनातन धर्म में केले के वृक्ष को देवगुरु बृहस्पति का साक्षात रूप माना गया है। इस गोचर काल में पड़ने वाले हर गुरुवार को सुबह उठकर केले के पेड़ की जड़ में शुद्ध जल अर्पित करें। उस जल में थोड़ी सी पिसी हुई हल्दी जरूर मिला लें। इसके बाद वृक्ष के तने पर हल्दी का टीका लगाएं, चने की दाल और गुड़ चढ़ाएं और घी का दीपक जलाकर सात बार परिक्रमा करें। ध्यान रखें कि गुरुवार के दिन केले के फल का सेवन भूलकर भी न करें। यह उपाय विवाह में आ रही रुकावटों को दूर करने के लिए रामबाण माना जाता है।
5. नारायण की नियमित आराधना और पीले रंग का महत्व
इस गोचर के दौरान अपने घर के मंदिर में नियमितता (Regularity) लेकर आएं। भगवान विष्णु की पूजा को अपनी रोज की आदत बना लें। पूजा के समय उन्हें पीले फूल चढ़ाने के साथ-साथ स्वयं भी पीले या हल्के रंग के वस्त्र धारण करने का प्रयास करें। भगवान विष्णु को जो भी भोग लगाएं (जैसे पंचामृत या हलवा), उसमें तुलसी का पत्ता जरूर डालें। नियमित आराधना से आपके भीतर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होगी और सकारात्मक विचारों का संचार होगा।
6. गुरुवार के दिन गौ माता की सेवा (चना दाल और गुड़)
हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय माना गया है क्योंकि उनमें सभी देवी-देवताओं का वास होता है। गुरु गोचर के शुभ फल पाने के लिए हर गुरुवार को अपने हाथ से गाय को भीगी हुई चने की दाल और थोड़ा सा गुड़ खिलाएं। आप चाहें तो आटे की लोई (पेड़ा) बनाकर उसमें थोड़ी सी हल्दी, चने की दाल और गुड़ भरकर भी गौ माता को खिला सकते हैं। इस उपाय से कुंडली के बड़े से बड़े ग्रह दोष शांत हो जाते हैं और फंसा हुआ धन वापस मिलने के रास्ते खुलते हैं।
7. नहाने के पानी में हल्दी और केसर का अनूठा प्रयोग
अपने दिन की शुरुआत ही गुरु के आशीर्वाद के साथ करने के लिए यह एक दिव्य उपाय है। रोज सुबह जब आप नहाने जाएं, तो अपने नहाने के पानी में मात्र एक चुटकी पिसी हुई हल्दी और केसर की एक-दो पत्तियां मिला लें। इस औषधीय और आध्यात्मिक पानी से स्नान करने से शरीर की आभा (Aura) मजबूत होती है। यह उपाय आपके शरीर से आलस्य को दूर भगाता है, स्वास्थ्य में सुधार करता है और आपके भाग्य को चमकाने में मददगार साबित होता है।
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