Paddy Farming Tips: धान के खेत में अगर कुछ पौधे तेजी से बढ़ रहे हैं और कुछ छोटे रह जा रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज करना किसानों को भारी पड़ सकता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि खेत में पानी और पोषक तत्वों का असमान वितरण इसकी सबसे बड़ी वजह है. समय रहते सही खाद और जैविक उपाय अपनाकर पौधों की बढ़वार बराबर की जा सकती है, जिससे उत्पादन पर भी अच्छा असर पड़ता है. जानिए किन उपायों को अपनाकर आप अपनी धान की पैदावार बढ़ा सकते हैं.
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, धान के पौधों की असमान बढ़वार के पीछे सबसे बड़ा कारण खेत का समतल न होना और पानी का बराबर मात्रा में न पहुंच पाना है. जहां पानी कम पहुंचता है, वहां पौधों को जरूरी पोषक तत्व भी नहीं मिल पाते. ऐसे स्थानों पर पौधे कमजोर रह जाते हैं, जबकि जहां पानी और पोषण पर्याप्त मिलता है, वहां पौधे तेजी से बढ़ते हैं.
क्यों रुक जाती है धान के पौधों की बढ़वार
धान की खेती में खेत का समतल होना बहुत जरूरी माना जाता है. पलेवा करने के बाद जब खेत में पानी भरा जाता है, तो वह हर हिस्से में समान रूप से रुकना चाहिए. अगर खेत ऊंचा-नीचा है, तो कुछ जगह पानी जमा हो जाता है और कुछ जगह पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता. पानी की कमी वाले हिस्सों में पौधों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता. यही वजह है कि खेत के किनारों या ऊंचे स्थानों पर पौधे छोटे दिखाई देते हैं, जबकि बीच के हिस्सों में पौधे ज्यादा विकसित हो जाते हैं. बाद में ऐसे कमजोर पौधों में बालियां भी कम बनती हैं और उत्पादन घट जाता है.
छोटे रह गए पौधों की ग्रोथ कैसे बढ़ाएं
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं प्रोफेसर डॉ. आई.के. कुशवाहा ने बताया कि अगर खेत पूरी तरह समतल है और पानी पूरे खेत में बराबर पहुंच रहा है, तो पौधों की बढ़वार भी लगभग समान रहती है. लेकिन जिन खेतों में ऊंच-नीच ज्यादा होती है, वहां यह समस्या अधिक देखने को मिलती है. उन्होंने बताया कि पौधों की बेहतर बढ़वार के लिए किसान सड़ी हुई गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट और मुर्गी की खाद का प्रयोग कर सकते हैं. ये जैविक खादें मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के साथ पौधों को जरूरी पोषण भी उपलब्ध कराती हैं.
डॉ. कुशवाहा के अनुसार, बाजार में मिलने वाले जैविक कल्चर भी धान की फसल के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. यदि किसानों को जैविक कल्चर उपलब्ध नहीं हो पाते, तो वे पूसा डीकंपोजर का इस्तेमाल कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि एक एकड़ खेत के लिए 200 लीटर पानी में 2 किलो गुड़ और 1 किलो बेसन मिलाकर घोल तैयार करें. इसके बाद इसमें पूसा डीकंपोजर मिलाकर किसी ड्रम में 4 से 5 दिन तक रख दें. जब घोल पूरी तरह तैयार हो जाए, तो इसे सिंचाई के पानी के साथ खेत में छोड़ दें.
सागरिका का भी कर सकते हैं इस्तेमाल
कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि जिन किसानों के पास पर्याप्त मात्रा में सड़ी गोबर की खाद उपलब्ध है, उनके लिए पूसा डीकंपोजर और भी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है. यह मिट्टी में मौजूद जैविक गतिविधियों को बढ़ाता है और खेत की उर्वरता को संतुलित करता है. अगर किसान यह तरीका नहीं अपना सकते, तो इफको की सागरिका का उपयोग भी कर सकते हैं. इसके प्रयोग से पौधे मजबूत बनते हैं, उनकी बढ़वार बेहतर होती है और फसल की पैदावार बढ़ाने में मदद मिलती है.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें
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