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एक समय था जब इस म्यूजिक डायरेक्टर की धुनों के बिना बॉलीवुड की सबसे बड़ी फिल्मों की कल्पना भी नहीं की जाती थी. इनके गानों ने सिर्फ चार्ट्स ही नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के दिलों में भी खास जगह बनाई. अब लंबे समय बाद ये दिग्गज संगीतकार फिर से अपनी जबरदस्त वापसी करने जा रहे हैं. नीचे पढ़ें पूरी खबर.

सिर्फ संगीतकार नहीं, दिल जीतने वाले इंसान भी: जिन लोगों ने इस्माइल दरबार के साथ काम किया है, वे सिर्फ उनके संगीत की नहीं बल्कि उनकी सादगी और व्यवहार की भी तारीफ करते हैं. इंडस्ट्री में उन्हें एक ऐसे इंसान के तौर पर जाना जाता है जो हर किसी को रिस्पेक्ट देते हैं. उनकी यही खूबी उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती है.

Ismail Darbar receives the National Film Award for Best Music Direction from then President K. R. Narayanan for the 1999 blockbuster Hum Dil De Chuke Sanam. (Image: ismaildarbarofficial/Instagram)

वायलिनिस्ट से बने बॉलीवुड के बड़े संगीतकार: बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में बड़ा नाम बनने से पहले इस्माइल दरबार सालों तक वायलिनिस्ट और अरेंजर के तौर पर काम कर चुके थे. इसी दौरान उन्होंने संगीत की बारीकियां सीखीं. भारतीय शास्त्रीय संगीत पर उनकी मजबूत पकड़ बाद में उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी.

‘देवदास’ के संगीत ने रचा इतिहास: अगर ‘हम दिल दे चुके सनम’ ने उन्हें पहचान दिलाई, तो ‘देवदास’ ने उन्हें हमेशा के लिए यादगार बना दिया. ‘मार डाला’, ‘डोला रे डोला’, ‘बैरी पिया’ और ‘सिलसिला ये चाहत का’ जैसे गानों ने साबित कर दिया कि इस्माइल दरबार भव्य और दिल छू लेने वाला संगीत बनाने में माहिर हैं. बदले दौर में भी नहीं भूले लोग: समय के साथ म्यूजिक इंडस्ट्री बदलती गई और इस्माइल दरबार धीरे-धीरे लाइमलाइट से दूर हो गए. लेकिन उनकी धुनों का जादू कभी कम नहीं हुआ. आज भी उनके गाने टीवी, सोशल मीडिया और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर खूब सुने जाते हैं. नई पीढ़ी भी उनके संगीत से जुड़ रही है.

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बेटे ज़ैद और राघव सचर के साथ नई शुरुआत: 62वें जन्मदिन पर इस्माइल दरबार सिर्फ अपने सुनहरे अतीत की वजह से चर्चा में नहीं हैं, बल्कि अपने नए सफर को लेकर भी सुर्खियों में हैं. बेटे ज़ैद दरबार और म्यूजिक कंपोजर राघव सचर के साथ उनका नया कोलैबोरेशन फैंस के लिए किसी ट्रीट से कम नहीं है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि उनकी नई धुनें एक बार फिर वही जादू चला पाती हैं या नहीं.

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