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सुप्रीम कोर्ट ने वनतारा के वन्यजीव बचाव, पुनर्वास और संरक्षण कार्यों को पूरी तरह कानूनी, नैतिक और नियमों के अनुरूप माना है. अदालत ने संस्था पर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए एसआईटी जांच रिपोर्ट पर भरोसा जताया. कोर्ट ने कहा कि विदेशी देशों के साथ हुए पशु ट्रांसफर CITES नियमों के तहत और केवल संरक्षण उद्देश्यों के लिए किए गए थे. जामनगर में चल रहे संरक्षण कार्यों को अदालत ने वैश्विक महत्व का बताया. दूसरी बार मिली न्यायिक राहत के बाद यह फैसला वनतारा के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है.
वनतारा पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की दस बड़ी बातें
सुप्रीम कोर्ट ने वनतारा के काम को बताया पूरी तरह कानूनी: सुप्रीम कोर्ट ने अपने स्पष्ट फैसले में कहा कि वनतारा द्वारा किए जा रहे वन्यजीव बचाव, पुनर्वास और संरक्षण कार्य पूरी तरह कानूनी, नैतिक और नियमों के अनुरूप हैं. अदालत ने माना कि संस्था का उद्देश्य केवल संकटग्रस्त और जरूरतमंद जानवरों की सुरक्षा और देखभाल करना है. इसके कार्यों में किसी प्रकार की अवैधता नहीं पाई गई.
वनतारा पर लगे सभी आरोप अदालत ने खारिज किए: वनतारा के खिलाफ लगाए गए आरोपों की दोबारा जांच की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया. अदालत ने कहा कि आरोपों की पहले ही विस्तृत जांच हो चुकी है और उनके समर्थन में कोई ठोस आधार नहीं मिला. कोर्ट के इस फैसले ने वनतारा के खिलाफ उठाए गए सभी संदेहों को प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया.
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SIT जांच रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके द्वारा गठित एसआईटी पहले ही पूरे मामले की गहन जांच कर चुकी है. जांच के दौरान दस्तावेजों, प्रक्रियाओं और अंतरराष्ट्रीय नियमों की समीक्षा की गई थी. अदालत ने माना कि एसआईटी की रिपोर्ट सही है. वनतारा को दी गई क्लीन चिट पूरी तरह उचित है.
अंतरराष्ट्रीय पशु ट्रांसफर नियमों के तहत हुए सभी आदान-प्रदान: कोर्ट ने पाया कि यूएई, वेनेजुएला, ब्राजील, चेक गणराज्य और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुए पशु आदान-प्रदान पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत किए गए. जानवरों को केवल संरक्षण और पुनर्वास के उद्देश्य से एक चिड़ियाघर से दूसरे चिड़ियाघर भेजा गया था. इनमें CITES के सभी नियमों का पालन किया गया.
किसी भी ट्रांसफर में नहीं था व्यावसायिक उद्देश्य: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जानवरों के आयात या निर्यात में किसी प्रकार का व्यावसायिक लाभ शामिल नहीं था. अदालत ने माना कि यह पूरी प्रक्रिया संरक्षण, चिकित्सा देखभाल और सुरक्षित पुनर्वास के उद्देश्य से की गई थी. इसलिए इन गतिविधियों को व्यापारिक गतिविधि बताने वाले आरोपों में कोई दम नहीं पाया गया.
जामनगर का संरक्षण केंद्र का वैश्विक महत्व: फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने जामनगर में चल रहे वनतारा के संरक्षण कार्यों को ‘वैश्विक महत्व’ का बताया. अदालत ने माना कि यहां किए जा रहे प्रयास केवल भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दुनिया भर में वन्यजीव संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण मॉडल के रूप में देखे जा सकते हैं.
दुर्लभ प्रजातियों को बचाने के प्रयासों की सराहना: अदालत ने विशेष रूप से उन परियोजनाओं का उल्लेख किया जिनमें लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण और पुनर्स्थापन का काम किया जा रहा है. ब्राजील के साथ मिलकर मकाऊ पक्षियों को प्राकृतिक जंगलों में वापस बसाने की पहल और संरक्षण प्रजनन कार्यक्रमों को कोर्ट ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना.
सुरक्षित जीवन जी रहे जानवरों को हटाना हो सकता है क्रूरता: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन जानवरों को कानूनी तरीके से बचाकर सुरक्षित वातावरण में रखा गया है, उनकी वर्तमान स्थिर जिंदगी को बिना कारण बाधित करना उचित नहीं होगा. अदालत ने माना कि ऐसे जानवरों को उनके सुरक्षित और देखभाल वाले माहौल से हटाना स्वयं उनके प्रति क्रूरता जैसा कदम माना जा सकता है.
फैसले से वनतारा के मिशन को मिली नई मजबूती: वनतारा के सीईओ विवान करणी ने कहा कि यह फैसला संस्था की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और पशु कल्याण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है. उन्होंने कहा कि संरक्षण में आने वाले प्रत्येक जानवर को कानूनी और नैतिक तरीके से रखा गया है तथा उसे जीवनभर सुरक्षा और देखभाल देने का संकल्प जारी रहेगा.
अब फैसला माना जाएगा अंतिम: इससे पहले 9 मार्च को भी सुप्रीम कोर्ट इसी तरह की याचिका खारिज कर चुका था. अब दूसरी बार अदालत ने एसआईटी रिपोर्ट और अपने पहले फैसले को सही ठहराया है. कोर्ट के इस रुख के बाद वनतारा से जुड़े आरोपों पर कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है और इस फैसले को अंतिम माना जा रहा है.
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